महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं समेत तीन लोगों की भीड़ के द्वारा लिंचिंग के मामले में लगातार एक्शन लिया जा रहा है. बुधवार को इस मामले में तीन और पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है. इनमें एक असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर और 2 हेड कॉन्स्टेबल शामिल हैं, जो कि कासा पुलिस स्टेशन में तैनात थे.
पालघर से कुछ दूर एक गांव में भीड़ ने चोरी के शक में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की हत्या कर दी थी. इसी के बाद राज्य सरकार की ओर से सबसे पहले दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया था, जो कि थाने के इनचार्ज थे. वहीं, बीती रात करीब 35 पुलिसकर्मियों का एक साथ तबादला कर दिया गया था.
गौरतलब है कि इस मामले को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी हुई थी और उद्धव सरकार विपक्ष के निशाने पर थी.
हालांकि, इस मामले में अभी तक 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और हत्या का मामला दर्ज किया जा चुका है. 16-17 अप्रैल की रात जब ये दो साधु अपने ड्राइवर के साथ गांव से गुजर रहे थे, तब लोगों को चोरों के आने का शक हुआ.
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भीड़ ने पीट-पीटकर इनकी हत्या कर दी, इस दौरान वहां पर पुलिसकर्मी खड़े रहे और तमाशा देखते रहे. पुलिसकर्मियों की लापरवाही की बात सामने आने के बाद प्रशासन ने एक्शन लिया और लगातार कई पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया.
साधुओं की हत्या के मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्धव ठाकरे से बात की थी और कड़े एक्शन की अपील की थी. इस मामले के बाद उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में हर किसी से अपील की थी कि इस मामले को धार्मिक रूप ना दें, जो भी दोषी हैं उन्हें सजा दी जाएगी.