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बिहारः हत्यारोपी को पिटाई के बाद छत से फेंका, फिर जिंदा जलाने की कोशिश

नालंदा शहर में कारोबारी की हत्या कर भागते एक आरोपी को भीड़ ने दबोचा और उसकी जमकर पिटाई की. इसके बाद उसे पहले छत से नीचे फेंक दिया और फिर लहूलुहान आरोपी को जिंदा जलाने की कोशिश की.

पुलिस ने बवाल के बाद बामुश्किल आरोपी को भीड़ से बचाया पुलिस ने बवाल के बाद बामुश्किल आरोपी को भीड़ से बचाया

बिहार के नालंदा जिले में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. जहां बेकाबू भीड़ कानून हाथ में लेकर खुद इंसाफ देने उतर आई. हत्या के आरोपी पर भीड़ का कहर इस कदर बरपा कि रौंगटे खड़े हो जाए. शहर में कारोबारी की हत्या कर भागते एक आरोपी को भीड़ ने दबोचा और उसकी जमकर पिटाई की. इसके बाद उसे पहले छत से नीचे फेंक दिया और फिर लहूलुहान आरोपी को जिंदा जलाने की कोशिश की.

ये सन्न कर देने वाली वारदात नालंदा के महलपुर मोहल्ले की है. जहां लोगों के मुताबिक शुक्रवार की सुबह चार बदमाशों ने मिलकर एक बिजनेसमैन को गोली मार दी. मौके पर ही कारोबारी की मौत हो गई. तभी लोगों ने आरोपियों का पीछा किया. तीन आरोपी तो फरार हो गए मगर चौथा आरोपी भीड़ के हत्थे चढ़ गया.

फिर क्या था भीड़ खुद ही इस मामले में इंसाफ करने पर आमादा हो गई. घटना की खबर मिलते ही पुलिस मौके पर जा पहुंची. मगर भीड़ के गुस्से के आगे पुलिस वाले भी बेबस नजर आए. जब भी मौका मिला, नाराज लोगों ने हत्या आरोपी पर लात-घूसों, लाठी-डंडों से हमला किया. उसकी पिटाई कर दी कि आरोपी खून से नहा गया.

नाराज लोगों ने उसे आग में धकेल कर जान भी लेनी चाही. दरअसल, पहले उसे छत से जमीन पर फेंका गया. फिर जमकर मारा-पीटा गया. इसके बाद उसे आग में धकेला और आखिर में आग में ही उस युवक पर बड़ा पत्थर दे मारा. यही नहीं हत्या से नाराज लोगों ने कई गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की. इस दौरान कई पुलिसवाले भी घायल हो गए.

इस दौरान पुलिस की 4 बाइक समेत 6 बाइक को आग के हवाले कर दिया गया. पूरे इलाके में धू-धूकर गाड़ियां जलती रही. पूरा इलाका सुलगता रहा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शहर नालंदा में ये सबकुछ हुआ. भीड़तंत्र की ऐसी हिंसा जिसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

भीड़ आरोपी की पिटाई करती रही. पुलिस तमाशबीन बनी रही. भीड़ तोड़फोड़ करती रही. पुलिसवाले देखते रहे. भीड़ वाहन फूंकती रही. पुलिसवाले अनदेखा करते रहे. पुलिस वक्त रहते एक्शन में आती तो बवाल पर कंट्रोल हो सकता था. हिंसा पर काबू पाया जा सकता था. लेकिन पुलिसवालों के सुस्त रवैये ने आग में घी डालने का काम किया.

हिंसा के बाद जब पुलिसवालों को सुध आई तो 20 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया. सवाल है कि पुलिसवालों ने हिंसा रोकने के लिए मुस्तैदी क्यों नहीं दिखाई. बिजनेसमैन की हत्या के बाद पुलिस हरकत में क्यों नहीं आई? सत्ताधारी पार्टी कह रही है कि सरकार को सुशासन पर लगते ऐसे धब्बे की फिक्र है.

जरूरत है बयानबाजी से उपर उठकर कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने की, नहीं तो नालंदा, वैशाली जैसी घटनाओं को रोक पाना मुश्किल हो जाएगा.

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