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जानिए, अबू सलेम को क्यों नहीं मिल पाई फांसी की सजा?

मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में विशेष टाडा अदालत ने अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने उसे इन धमाकों का मास्टरमाइंड मानते हुए उस पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जबकि इस मामले के दोषी ताहिर मर्चेंट और फिरोज खान को फांसी और करीमुल्लाह शेख को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.

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इस मामले में कोर्ट ने 24 साल बाद फैसला सुनाया है इस मामले में कोर्ट ने 24 साल बाद फैसला सुनाया है

मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में विशेष टाडा अदालत ने अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने उसे इन धमाकों का मास्टरमाइंड मानते हुए उस पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जबकि इस मामले के दोषी ताहिर मर्चेंट और फिरोज खान को फांसी और करीमुल्लाह शेख को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.

24 साल बाद आया फैसला

इन धमाकों के 24 साल बाद अदालत ने इन दोषियों को सजा सुनाई है. इस मामले के एक अन्य दोषी मुस्तफा दोसा की दिल का दौरा पड़ने से पहले ही मौत हो चुकी है. अबू सलेम के फांसी से बचने की कई वजह हैं. दरअसल, मुंबई की विशेष अदालत ने 2013 में सीबीआई की याचिका पर सलेम के खिलाफ कुछ आरोप हटा दिए थे.

सीबीआई ने हटाए थे कुछ आरोप

इस याचिका में सीबीआई ने उन आरोपों को हटाए जाने के पीछे भारत और पुर्तगाल के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि का हवाला दिया था. उन धमाके के आरोपियों को व्यक्तिगत तौर पर या संयुक्त तौर पर दोषी करार दिया गया. इसमें साजिश रचने, आतंकवाद, गोला-बारूद की आपूर्ति करने, हत्या, सार्वजनिक, निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप शामिल हैं.

इसलिए नहीं मिली अबू को फांसी

साल 2005 में अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम और अभिनेत्री मोनिका बेदी को पुर्तगाल से भारत लाया गया था. उस वक्त अबू सलेम पर आठ क्रिमिनल केस थे. जबकि मोनिका पर फर्जी पासपोर्ट का मामला था. जब अबू को भारत लाया गया, तब वहां की सरकार ने भारतीय एजेंसियों के सामने प्रत्यर्पण संधि का उल्लेख करते हुए शर्त रखी थी कि भारत में चल रहे किसी भी केस में अबू सलेम को सजा-ए-मौत नहीं दी जा सकती.

 

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