scorecardresearch
 

दो साल के मासूम पर सितम, सिगरेट से दागा गया

वो एक मासूम दो साल का बच्चा है. उसके पैरों पर सिगरेट से दागने के निशान हैं. उसके चेहरे को काटने की कोशिश की गई. उस मासूम के जिस्म को ज़ख्मी किया गया. उसे नशे की हालत में सड़क पर छोड़ दिया गया. जब एक रहमदिल इंसान ने उसे पुलिस तक पहुंचाया तो पुलिस ने जो किया वो हैरान करने वाला था.

बच्चे की देखभाल का जिम्मा एक एनजीओ को दिया गया है बच्चे की देखभाल का जिम्मा एक एनजीओ को दिया गया है

वो एक मासूम दो साल का बच्चा है. उसके पैरों पर सिगरेट से दागने के निशान हैं. उसके चेहरे को काटने की कोशिश की गई. उस मासूम के जिस्म को ज़ख्मी किया गया. उसे नशे की हालत में सड़क पर छोड़ दिया गया. जब एक रहमदिल इंसान ने उसे पुलिस तक पहुंचाया तो पुलिस ने जो किया वो हैरान करने वाला था.

पुलिस ने उस मासूम पर कोई तरस नही खाया. पुलिस को उसके जख्म भी दिखाई नहीं दिए. पुलिस ने अपने फर्ज को भी नहीं निभाया. और बच्चे को वापस उसी इंसान को अपने पास रखने के लिए कह दिया जो उसकी मदद करना चाहता था. मामला किसी छोटे शहर का नहीं बल्कि दिल्ली का है. जहां की पुलिस खुद सबसे बेहतर बताती है.
 
जी हां वो मासूम जिसका हमें नाम नहीं पता. इसके मां-बाप कौन हैं नहीं मालूम. अभी वो ठीक से बोल भी नहीं सकता. ये बच्चा चोरी किया गया है या फिर किसी तस्करी गैंग शिकार बना है. कुछ पता नहीं चल पाया है. ये बच्चा लवारिस हालत में आजतक की टीम को नई दिल्ली के जय सिंह रोड पर मिला है.

एक दर्शक ने आजतक को फोन करके बताया कि एक बीमार बच्चा लवारिस हालत में घूम रहा है. आजतक की टीम जब मौके पर पहुंच गई. पहली नज़र में देखकर ही पता चल रहा था कि बच्चा किसी वारदात का शिकार हुआ है. बच्चा जिस औरत के पास था उसकी हालत ऐसी थी कि वो खुद अपना ख्याल नहीं रख सकती थी.
 
आजतक की टीम ने आस-पास के लोगों से पूछताछ की तो पुलिस की लापरवाही का भंडाफोड़ हो गया. बात साफ हो गई कि बड़ी बड़ी बातें करने वाली दिल्ली पुलिस लवारिस मिलने वाले बच्चों के साथ कैसा सलूक करती है. मामला जुड़ा है पार्लियेमेंट स्ट्रीट पुलिस थाने से, जो सांसदों के बड़े मसले हल करता है. जहां ज्वाइंट सीपी, डीसीपी स्तर के आला अधिकारी बैठते हैं. मगर इनके नीचे काम करने वाली पुलिस के पास इस मासूम बच्चे के लिए कोई वक्त नहीं था.

आजतक की तफ्तीश में खुलासा हुआ कि बुधवार को ही इस बच्चे को चाय की दुकान पर काम करने वाला एक रहमदिल शख्स सत्या पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने लेकर गया था. उसका मकसद था कि बच्चा पुलिस के जरिए सुरक्षित हाथों में पहुंच जाए. लेकिन पुलिस ने सत्या को बच्चे के साथ बैरंग लौटा दिया. कह दिया कि बच्चा तुम रख लो. जब मां-बाप मिलेगें तो हमें बता देना.

होना तो ये चाहिए था कि कानून के मुताबिक पुलिस वालों को तुरंत इस बच्चे की मेडिकल जांच करानी चाहिए थी. फिर इस मामले को चाइड वैलफेयर केमटी के समाने पेश करना था. लेकिन देश की राजधानी के नई दिल्ली में पार्लियेमेंट स्ट्रीट थाने की पुलिस ने ये जेहमत नहीं उठाई. बच्चे को सुरक्षित हाथों में पहुंचाने के लिए आजतक की टीम ने पुलिस को फोन किया. पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस और आला अधिकारियों को भी मासूम बच्चे की जानकारी दी. साथ ही चाइड हेल्प लाइन को भी फोन किया.

मगर एक घंटे तक पुलिस या पीसीआर मौके पर नहीं पहुंची. कुछ और वक्ते बीत जाने के बाद आखिरकार बाइक पर एक दरोगा जी वहां पहुंचे लेकिन उनका बर्ताव ऐसा कि उन्हें कहां बुला लिया. हमारी टीम खुद मासूम को लेकर पुलिस थाने पहुंची. आला अधिकारियों के आदेश के बाद पहले बच्चे का मेडिकल करवाया गया और उसके बाद सीडब्लूसी के आदेश पर बच्चे को एक एनजीओ को सौंप दिया गया.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें