संदिग्ध चीनी हवाला ऑपरेटर की ओर से लॉन्च की गई कंपनियों में से एक का डायरेक्टर असल में उसी कंपनी का ऑफिस बॉय निकला, जिसे 15,000 रुपए महीना पर रखा गया था. संदिग्ध चीनी चार्ली पेंग उर्फ लुओ सांग को गिरफ्तार किया जा चुका है.
राहुल कुमार ने आजतक/इंडिया टुडे को बताया कि वो गुरुग्राम स्थित फिन एंड ब्लैक रॉक कंपनी में कूरियर और ऑफिस ट्रांसपोर्ट का काम देखा करता था.
राहुल के मुताबिक उसने अक्सर ‘बॉस’ को देखा लेकिन कभी कोई खास बात करने का मौका नहीं मिला. राहुल ने अपने 42 वर्षीय नियोक्ता के लिए कहा- “वो बड़े लोग हैं.”

राहुल का कहना है कि उसका नियोक्ता ई-सिगरेट का व्यवसाय शुरू करना चाहता था, लेकिन पिछले साल भारत में ऐसी डिवाइस पर रोक लगने की वजह से उसने ये इरादा छोड़ दिया.
राहुल के मुताबिक एक दिन उसे अतिरिक्त दस्तावेज जमा कराने के लिए कहा गया जिससे कि उसकी पहचान साबित हो सके. उसके बाद जो हुआ वो असामान्य था. ऑफिस बॉय का दर्जा ऊंचा कर फिन एंड ब्लैक रॉक का डायरेक्टर बना दिया गया.
अगर राहुल की मानें तो उसके भत्ते में कोई अहम बदलाव नहीं हुआ. ऑफिस बॉय के रूप में, उसे 15,000 रुपये महीना मिलते थे. डायरेक्टर के तौर पर उससे 5,000 रुपये ज्यादा मिले.
राहुल से आयकर जांचकर्ता पूछताछ कर चुके हैं. राहुल ने इंडिया टुडे को बताया कि उसने इस साल की शुरुआत में कंपनी छोड़ दी थी. राहुल ने परिवार और अपनी बदनामी को लेकर भी चिंता जताई.
राहुल कुमार के घर का हाल
अलीगढ़ जिले का पीपल का गांव, एक अधेड़ किसान अपने मामूली घर से निकलता है, चिंता उसके चेहरे पर साफ झलक रही है. ये राहुल के पिता श्याम सुंदर हैं. सुंदर भर्राई आवाज में कहते हैं, “मैं किसान हूं, मजदूर हूं, मैं सिर्फ इतना जानता हूं कि वो (राहुल) एक चीनी कंपनी में काम करता था, इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं पता.”
क्या संदिग्ध ने गरीब भारतीयों को फंसाया?
राहुल की पढ़ाई कोई खास नहीं है. उसकी आर्थिक बैकग्राउंड भी मामूली है. फिर भी उसे फिन एंड ब्लैक रॉक कंपनी में डायरेक्टर बनाया गया. ये उन पांच कंपनियों में से एक है जिन्हें पेंग ने शुरू किया. जांचकर्ताओं के मुताबिक पेंग असल में चीनी नागरिक लुओ सांग है जो 1,000 करोड़ रुपए के हवाला रैकेट का संदिग्ध है.
राहुल के पिता सुंदर को गुरुग्राम स्थित कंपनी में उसके आधिकारिक पद नहीं पता है. सुंदर का कहना है कि उनका बेटा सिर्फ धोखाधड़ी का शिकार हुआ हो सकता है, उसे अवश्य मूर्ख बनाया गया.
कोई भी कंपनी ‘आधिकारिक’ पते पर नहीं
आजतक/इंडिया टुडे मामले की और गहराई में गया. गिरफ्तार संदिग्ध की ओर से संचालित एक और कंपनी ओटीए लॉजिस्टिक्स के गुरुग्राम के पते पर हम पहुंचे तो प्रॉपर्टी मालिक ने उस जगह से ऐसी कोई भी कंपनी ऑपरेट होने से इनकार किया.

गुरुग्राम के सोहना चौक के पास स्थित प्रॉपर्टी के मालिक के बेटे संदीप सिंह ने इसे पेंग उर्फ लुओ की जालसाजी करार दिया. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने संदिग्ध के खिलाफ प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केस दर्ज किया है.
कागज पर पहचान का फर्जीवाड़ा
इंडिया टुडे की ओर से खंगाले गए आधिकारिक दस्तावेजों से पता चलता है कि गिरफ्तार व्यक्ति कम से कम पांच कंपनियों के बोर्ड में शामिल था और मेजोरिटी स्टेकहोल्डर के तौर पर उनमें से अधिकतर को कंट्रोल कर रहा था.

उसकी कंपनी की फाइलिंग में ऐसी डिक्लेरेशन है, जिनमें कि वो खुद के मणिपुर के बुआलियांग गांव में स्थायी पते के साथ भारतीय नागरिक होने का दावा करता है. संदिग्ध की अब कथित तौर पर अपनी चीनी पहचान छिपाने और चार्ली पेंग नाम से भारतीय नागरिक बताने की जांच की जा रही है. उसने अपने दावों के समर्थन में आधार और पैन कार्ड जमा कराए थे.

दलाई लामा की जासूसी
जांचकर्ताओं को संदेह है कि पेंग उर्फ लुओ ने तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा की जासूसी की हो सकती है. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, उन्हें संदेह है कि धर्मशाला स्थित तिब्बती आध्यात्मिक गुरु के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए संदिग्ध ने दिल्ली में तिब्बतियों की रिहाइश वाले इलाके में कुछ लोगों को रिश्वत दी हो सकती है. सूत्र बताते हैं कि I-T विभाग ने पाया कि पूरा कम्युनिकेशन चीनी मोबाइल एप्लिकेशन, WeChat के जरिए किया गया था.