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हनीप्रीत से हारा हरियाणा का कानून, सारे नियम एक तरफ हनी की मम्मी एक तरफ?

सरकार की कृपा से सिरसा के डेरे की मालकिन अंबाला जेल में जमकर ऐश काट रही है. सोचिए कि जिस जेल का गेट के भीतर किसी मुलाकाती की गाड़ी नहीं जा सकती. गाड़ी छोड़िए किसी को खुद घुसने के लिए भी कई तरह की औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं, उस जेल की तमाम सेवाएं हनीप्रीत के भैया-भाभी और दीदी-जीजा के चरणों में न्योछावर कर दी गई थीं.

जेल के सारे नियम हनीप्रीत के लिए बेमानी साबित हो रहे हैं जेल के सारे नियम हनीप्रीत के लिए बेमानी साबित हो रहे हैं

राम रहीम की दत्तक पुत्री हनीप्रीत ने हरियाणा पुलिस को घुटनों के बल ला खड़ा किया है. जेल में भी उसका जलवा कम होने का नाम नहीं हो रहा. उसकी हनक के सामने अंबाला की सेंट्रल जेल उसकी मां के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गई. हनीप्रीत का परिवार हनीप्रीत से मिलने अंबाला जेल गया था. जेल मैनुअल की धज्जी उड़ाते हुए उनकी गाड़ी न केवल अंदर तक गई बल्कि न तो किसी की सुरक्षा जांच हुई और न ही किसी से कोई पूछताछ हुई.

प्रियंका तनेजा उर्फ हनीप्रीत इंसा के उर्फ दत्तक पुत्री राम रहीम के मुलाकाती बड़े खास होते हैं. बहुत खास. इतने खास कि भारत का कानून भी उसके सामने पनाह मांगता है. इसीलिए अपने अपराधों के आरोप में लाल दीवारों की कैद काट रही हनीप्रीत से मिलने के लिए उनकी मम्मी हरियाणा के अंबाला जेल पहुंची तो जेल का फाटक खोल दिया गया, संतरी ने सलामी दी और गाड़ी दनदनाती हुई जेल के अंदर दाखिल होती चली गई.

जेल में भी इतनी मौज काटी जा सकती है इसका उदाहरण है मनोहर लाल खट्टर का राज. सरकार की कृपा से सिरसा के डेरे की मालकिन अंबाला जेल में जमकर ऐश काट रही है. सोचिए कि जिस जेल का गेट के भीतर किसी मुलाकाती की गाड़ी नहीं जा सकती. गाड़ी छोड़िए किसी को खुद घुसने के लिए भी कई तरह की औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं, उस जेल की तमाम सेवाएं हनीप्रीत के भैया-भाभी और दीदी-जीजा के चरणों में न्योछावर कर दी गई थीं.

हुआ ये कि हनीप्रीत का परिवार साढ़े चार बजे गुड़गांव नंबर की गाड़ी में सवार होकर अंबाला सेंट्रल जेल पहुंचा. ऐसा लगा जैसे जेल में सबको पता था हनी मैडम की मम्मी अपने खानदान के साथ पधार रही हैं. संतरियों ने देखते ही फाटक खोल दिया. किसी ने कुछ नहीं पूछा. गाड़ी अंदर. गेट बंद. मुबारक हो. हरियाणा में कानून अपना काम कर रहा है.

ऐसा तो हुआ ही नहीं आजतक कि किसी कैदी से मिलने पूरी बारात पहुंच जाए. जेल वाले सलामी ठोकें और कहें कि आइए पधारिए हम धन्य हुए. बताइए क्या लेंगी. ठंडा गरम ठोस तरल सामिष निरामिष. हरियाणा वाली सरकार सच में समाजसेवी है. अपराधी समाझ की इतनी चिंता पुरानी किसी सरकार ने कहां की होगी.

हरियाणा के जेल मंत्री कृष्णलाल पवार कहते हैं कि चाहे कोई वीवीआईपी भी क्यों ना हो जेल में गाड़ी जाना मना है. अगर वहां कोई अंदर गया है, तो हमारे पास जेल में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, ऐसा कुछ होता है, तो कार्यवाही की जाएगी.

मगर अंबाला की जेल वालों ने सोचा था सारा मामला सीक्रेट रहेगा. इंतजाम वैसे ही किया था. सोचिए ना कि हनीप्रीत के परिवार के जेल में पधारने के बाद गाड़ी का ड्राइवर गाड़ी लेकर बाहर आ गया. थोड़ी देर तक खुली हवा में सांस लेने के बाद मीडिया को चकमा देने के इरादे से वो गाड़ी को दूसरे रास्ते से घुमाकर फिर उसी गेट पर पहुंच गया. कमाल की बात तो ये है कि फिर से गाड़ी को नहीं रोका गया. कोई पूछताछ नहीं हुआ. जैसे हनीप्रीत की मम्मी का ड्राइवर नहीं अंबाला सेंट्रल जेल का जेलर हो.

साढ़े चार बजे से लेकर साढ़े छह बजे तक हनीप्रीत के भैया जेल में. हनीप्रीत की दीदी जेल में. हनीप्रीत के जीजा जेल में. सराकर और अफसरों के उम्दा इंतजामों की छत्रछाया में चार घंटे तक परिवार मिलन का कार्यक्रम अंबाला जेल के प्रांगण में निष्कंटक चलता रहा.

अब बाकी के कैदी आहें भर रहे हैं. हम हनीप्रीत क्यों न हुए. कसम से सजा का मजा ही आ जाता. सोचिए हनीप्रीत का ऐसा जलवा है तो राम रहीम का सोच लीजिए. कहने को बेचारा रोहतक जेल में 20 साल की सजा काट रहा है. लेकिन अगर ये सजा है तो मजा किसे कहते हैं. ठीक ही कहते हैं मानस बांचने वाले कि रामराज में कैदियों को भी किसी तरह का कष्ट नहीं होता.

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