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Patna Crime: पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली पुलिस के दावे की पोल, ऐसे उलझी NEET छात्रा की डेथ मिस्ट्री

पटना में 18 साल की नीट छात्रा की संदिग्ध मौत ने बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले ASP का विरोधाभासी बयान और फिर जांच में भारी लापरवाही. इन बातों ने इस मामले को पेचीदा बना दिया. पढ़ें इस वारदात की पूरी कहानी.

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इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं (फोटो-ITG)
इस मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं (फोटो-ITG)

Patna NEET Student Death Case: पटना की सड़कों पर एक पुलिस अफसर कैमरों से भागता दिखता है. क्योंकि मामला सिर्फ एक मौत का नहीं, बल्कि सिस्टम के अंदर छिपे सच का है. 18 साल की एक नीट छात्रा, डॉक्टर बनने का सपना लिए राजधानी आई थी, लेकिन कुछ ही दिनों में उसका सपना एक हॉस्टल के बंद कमरे में दम तोड़ देता है. लड़की बेहोश मिलती है, जिस्म पर चोटों के निशान होते हैं, परिवार चीखता है कि उसकी बेटी के साथ दरिंदगी हुई है और पुलिस? पुलिस चार दिन बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फैसला सुना देती है कि ये खुदकुशी है. लेकिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आती है, तो पुलिस की थ्योरी जमीन पर गिर जाती है. यह कहानी पर्दे के पीछे छिपे हर सवाल, हर झूठ और हर चूक की परत-दर-परत पड़ताल है.

बिहार की राजधानी पटना से 18 जनवरी को मीडिया की पूरी एक भीड़ एक शख्स को घेर रही थी और वो शख्स कोई और नहीं बल्कि एक पुलिस अफसर था. नाम है अभिनव. अभिनव पटना के एएसपी हैं. एएसपी बोले तो असिस्टेंट सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस. एएसपी साहब भीड़ को चीरते हुए किसी तरह अपनी सरकारी गाड़ी तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. इसी बीच किसी रिपोर्टर की आवाज आती है सवालों से मत भागिए सर. जवाब तो दे दीजिए

अब सवाल ये है कि वो कौन सा सवाल है. जिसके जवाब से एएसपी साहब भाग रहे थे. असल में 6 दिन पहले यानि 12 जनवरी को वही एएसपी साहब पटना में 18 साल की नीट की एक स्टूडेंट की गर्ल्स हॉस्टल में हुई मौत के बारे में बोल रहे थे. 

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हुआ यूं कि पटना के चित्रगुप्त नगर में मौजूद शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली 18 साल की वो स्टूडेंट अपने कमरे में बेहोश मिली थी. बाद में उसे पटना के ही तीन अलग अलग अस्पतालों में भर्ती किया गया. लेकिन आखिरकार 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई. एएसपी साहब उसी स्टूडेंट की मौत के चार दिन बाद 12जनवरी को बाकायदा प्रेस कांफ्रेस कर ये बता रहे थे कि उसकी मौत एक खुदकुशी है. नींद की ज्यादा गोलियां खाकर उसने अपनी जान दे दी. उसके साथ कोई रेप या सेक्सुअल असॉल्ट नहीं हुआ था.

अब यहां तक तो सब ठीक था, पर एएसपी साहब के इस दावे के दो दिन बाद ही 14 जनवरी को नीट स्टूडेंट की पोस्टामार्टम रिपोर्ट सामने आई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस की पूरी थ्योरी ही बदल दी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लिखा था कि स्टूडेंट के साथ यौन हिंसा यानि सेक्सुअल असॉल्ट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इस रिपोर्ट में लड़की के जिस्म पर चोट के अनगिनत निशान, खरोंच, बल प्रयोग और जबरदस्ती किए जाने की भी आशंका जताई गई. 

इसी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद 18 जनवरी को एएसपी अभिनव मीडिया के घेरे में आ गए. और मीडिया उन्हें घेर कर कहने लगी कि सवालों से मत भागिए सर. जवाब तो देते जाइए. जवाब इस बात का कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले ही आपने ये कैसे कह दिया कि उस लड़की ने खुदकुशी की है और उसके साथ कोई जोर जबरदस्ती नहीं की गई.

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वाकई कमाल है बिहार पुलिस. जिस प्रेस कांफ्रेंस में एएसपी अभिनव ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देखे बिना एक एक्सपर्ट के तौर पर फैसला सुना दिया कि लड़की के साथ कोई यौन शोषण नहीं हुआ, उसी प्रेस कांफ्रेस ने उसी एएसपी साहब ने रिपोर्टर के आगे के हर सवाल के जवाब में यही रटते रहे कि जांच का विषय है. जांच चल रही है. जांच करेंगे. पता लगाएंगे.

पुलिस का काम होता है, ऐसे केस में पूरे मामले की गहराई से जांच करना. पर एएसपी साहब ने किया ये कि फकत एक डॉक्टर के बयान को सच मानकर उसी वक्त केस लगभग निपटा दिया. ये सोचा ही नहीं कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए. हद तो ये है कि ये तक झूठ बोल डाला कि जिस हॉस्टल में वो लड़की रहती थी उसके बाहर कई सीसीटीवी कैमरे हैं और उन कैमरों में ऐसी कोई चीज नहीं मिली जिससे कोई शक हो.

सीसीटीवी कैमरे तक तो एएसपी साहब की बात सही है. पर झूठ ये है कि जिन कैमरों की बात वो कर रहे हैं उन कैमरों की रिकॉर्डिंग यानि डीवीआर पटना पुलिस ने हादसे के तीन दिन बाद 9 जनवरी को जब्त की. आप शायद यकीन नहीं करेंगे कि ये डीवीआर भी पटना पुलिस ने हॉस्टल जाकर अपने कब्जे में नहीं लिया बल्कि ये हॉस्टल जिस चित्रगुप्त नगर थाने के तहत आता है, उस थाने की एसएचओ रौशनी कुमारी के प्राइवेट ड्राइवर ने हॉस्टल जाकर डीवीआर उठाया था. अब तीन दिन में सीसीटीवी कैमरे में क्या खेल होगा ये कोई कैसे बता सकता है.

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वैसे एएसपी साहब की एक मामले में तारीफ करनी होगी. और वो ये कि सबकुछ होने के बावजूद उन्होंने बड़ी मासूमियत से कम से कम ये तो माना कि नीट छात्रा 6 जनवरी को हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली थी. और पुलिस पहली बार 9 जनवरी को यानि हादसे के तीन दिन बाद लड़की के पास पहुंचती है. और तीन दिन बाद ही एफआईआर लिखी जाती है.

हालांकि इस दौरान खबर सुनकर लड़की के मां बाप जहानाबाद से पटना पहुंच चुके थे. बेटी की हालत देखते ही पिता ने पहले ही दिन ये कह दिया था कि उनकी बेटी के साथ कुछ गलत हुआ है. पुलिस ने तब भी उनकी नहीं सुनी. जब 9 जनवरी को मेदांता में लड़की की तबीयत ज्यादा बिगड़ी तब पहली बार पटना पुलिस ने शिकायत दर्ज की. लेकिन किया कुछ नहीं. पर 11 जनवरी को जैसे ही लड़की की मौत की खबर पुलिस को मिली, पुलिस समझ गई कि अब उसके निकम्मेपन की कहानी मीडिया में आएगी. 

अब पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश शुरु कर दी. उस कोशिश का पहला सबूत ये था कि एएसपी अभिनव ने लड़की की मौत के अगले दिन यानि 12 जनवरी को प्रेस कांफ्रेस कर ये बताने की कोशिश की कि उसकी मौत के पीछे कोई साजिश नहीं. मामला खुदकुशी का है. लड़की के साथ जैसा कि उनके पिता कह रहे हैं कोई सेक्सुल असॉल्ट नहीं किया गया. पटना पुलिस ने अपने दावे में ये भी कहा कि हॉस्टल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज हॉस्टल स्टाफ के बयान और शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट से भी ये जाहिर होता है कि छात्रा के साथ किसी तरह का यौन शोषण नहीं हुआ.

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उधर, लड़की के मामा का दावा है कि खुद उनके सामने अस्पताल के दो डॉक्टरों ने उनसे दो बाते कहीं. एक ने कहा कि लड़की के साथ जबरदस्ती हुई है जबकि दूसरा डॉक्टर ये कह रहा था कि कुछ नहीं हुआ है. नीट छात्रा के मामा ने संगीन इल्जाम भी लगाया है कि जब 9 जनवरी को चित्रगुप्तनगर थाने में उन्होंने पहली बार एफआईआर लिखाई, जब हॉस्टल की मालकिन ने एफआईआर ना लिखाने के एवज में उन्हें पैसों के ऑफर दिए थे.

परिवार ने ये सनसनीखेज इल्जाम भी लगाया कि जिस हॉस्टल में वो रहती थी वो हॉस्टल दागदार रहा है. हॉस्टल के मालिक और संचालक इस हॉस्टल की आड़ में जिस्मफरोशी का धंधा करते हैं. वैसे छोटे मियां तो छोटे मियां बड़े मियां भी कम सुभान अल्लाह नहीं हैं. एएसपी साहब के बॉस पटना के एसएसपी यानि सीनियर सुप्रिटेंडेंट ऑफ पुलिस कार्तिकेय शर्मा हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट इनके सामने है. नीट छात्रा के साथ जोर जबरदस्ती किए जाने की बात पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ साफ लिखी है. मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी गई है. फिर भी बिना जांच शुरु हुए कप्तान साहब नीट छात्रा की मौत को सीधे-सीधे खुदकुशी का मामला बता रहे हैं.

एसएसपी साहब की बातें भी हैरान करती हैं. जब उनसे पूछा गया कि अभी भी आप इसे खुदकुशी मान रहे हैं? तो उन्होंने भी सीधा जवाब नहीं दिया. कमाल ये कि अपने डिपार्टमेंट की गलती मानने की बजाय एसएसपी साहब सारा ठीकरा डॉक्टरों पर फोड़ रहे हैं. उनका कहना है कि शुरु में एक डॉक्टर ने कुछ और रिपोर्ट दी और पोस्टमार्टम में कुछ और रिपोर्ट आई. तो हम क्या करें?

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एक लड़की एक हॉस्टल में बेहोश मिलती है. जिस्म पर अनगिनत चोट और नोंचने खसोटने के निशान मिलते हैं. जिसके साथ जबरदस्ती की जाती है. ऐसे आलम में भी पटना पुलिस पहली बार उस लड़की तक तीन दिन बाद पहुंचती है. जबकि चित्रगुप्त नगर पुलिस को 6 जनवरी को ही लड़की की हालत के बारे में सूचना दे दी गई थी. एसएसपी साहब से जब इस लापरवाही के बारे में पूछा गया तो उनका वही फेवरेट जवाब सामने आया.

तो एएसपी साहब और एसएसपी साहब की तारीफें तो हो चुकी. अब इस कहानी के तीसरे किरदार से मिलते हैं. वो है चित्रगुप्त नगर थाने की एसएचओ रौशनी कुमारी. नीट की छात्रा को अस्पताल में भर्ती हुए तीन दिन हो चुके थे. 6 जनवरी को ही थाने में छात्रा की रिपोर्ट तक पहुंच चुकी थी. लेकिन अगले तीन दिनों तक मैडम एसएचओ ने जांच के लिए हॉस्टल के उस कमरे तक जाने की जहमत भी नहीं उठाई. जिस कमरे में वो छात्रा बेहोश पड़ी मिली थी. यहां तक की जांच के लिए जो जरूरी सबूत हासिल करने थे, उसे भी हासिल करने के लिए खुद तो छोड़िए अपने थाने के किसी पुलिस वाले को भी कमरे तक नहीं भेजा. बल्कि भेजा तो अपने प्राइवेट ड्राइवर को. अंदाजा लगाइए जिस थाने का ये केस है उस थाने की एसएचओ इस केस को लेकर कितनी गंभीर रही होंगी. 

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अब इन तीनों किरदारों के पार पूरी कहानी समझिए. जहानाबाद की रहने वाली एक लड़की डॉक्टर बनने का सपना लिए पटना पहुंचती है. पटना के एक कोचिंग सेंटर में वो नीट की तैयारी कर रही थी. पटना के चित्रगुप्तनगर में ही वो शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने लगी. नए साल की छुट्टी थी इसलिए वो दिसंबर के आखिरी हफ्ते में अपने घर जहानाबाद चली गई थी. जहानाबाद से वो 5 जनवरी को पटना अपने हॉस्टल में वापस लौटी. लेकिन इसके अगले ही दिन 6 जनवरी को जब वो ब्रेकफास्ट और लंच के लिए कमरे के बाहर नहीं आई तब हॉस्टल के स्टाफ को फिक्र हुई. इसके बाद जब वो कमरे में दाखिल हुए तो लड़की बेहोश मिली.

सबसे पहले बेहोश छात्रा को पटना के सहजानंद अस्पताल ले जाया गया. लेकिन हालत गंभीर थी लिहाजा वहां से उसे प्रभात मेमोरियल प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया गया. लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ. तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर फिर उसे तीसरे अस्पताल मेंदाता भेज दिया गया. जहां 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई. 6 जनवरी को जब लड़की को सहजानंद अस्पताल लाया गया था, तब उसी दिन चित्रगुप्तनगर पुलिस स्टेशन को इसकी खबर दी गई थी. लेकिन पुलिस अस्पताल नहीं पहुंची.

इन्हीं इल्जामों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद बिहार के डीजीपी ने अब मामले की जांच के लिए एक एसआईटी बनाई है. हालांकि मजाक ये है कि इस स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम में एएसपी अभिनव भी है और एसएसपी कार्तिकेय शर्मा भी. यानि एसआईटी की रिपोर्ट क्या होगी? ये अभी से समझा जा सकता है.

(पटना से सुजीत कुमार और शशिभूषण के साथ रोहित कुमार सिंह का इनपुट) 

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