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Kanpur Piyush Jain IT Raid: दो महीने से पीयूष जैन की हो रही थी ट्रैकिंग, जानिए क्या है छापे का गुजरात कनेक्शन?

Kanpur raid: कानपुर-कन्नौज की जिन छापेमारियों में नोटों का अंबार मिला, उससे जुड़े लोगों की ट्रैकिंग और छापे की प्लानिंग बीते कुछ महीनों से की जा रही थी.

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पीयूष जैन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है पीयूष जैन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कानपुर-कन्नौज की छापेमारी में 195 करोड़ रुपये कैश मिला
  • अहमदाबाद की जीएसटी विभाग का इस रेड में अहम रोल

कानपुर में धनकुबेर पीयूष जैन के ठिकानों पर पड़े छापों में अबतक 195 करोड़ रुपये कैश मिल चुका है जो अबतक किसी प्रवर्तन एजेंसी द्वारा जब्त की गई सबसे बड़ी रकम है. जबकि कन्नौज स्थित पीयूष जैन के पैतृक घर से टीम को 19 करोड़ कैश, 10 करोड़ से ज्यादा कीमत का 23 किलो सोना और 6 करोड़ रुपये का चंदन का तेल मिला है.

पीयूष जैन ने यह नोटों का अंबार कैसे खड़ा किया था, इसकी परतें अब धीरे-धीरे खुल रही हैं. पीयूष जैन की कंपनी जब जीएसटी चोरी कर सरकार को चूना लगा रही थी, तब उसने सोचा भी नहीं होगा कि यह खेल जल्द खत्म होने वाला है.

जानकारी मिली है कि पीयूष जैन, उसकी कंपनी की पिछले दो महीनों से ट्रैकिंग हो रही थी. जीएसटी की अहमदाबाद इंटेलिजेंस यूनिट के एडिशनल डायरेक्टर जाकिर हुसैन ने बताया कि यह पूरी रेड बहुत ही चुनौतीपूर्ण थी और इस केस की पिछले दो महीने से ट्रैकिंग हो रही थी.

पीयूष जैन तक कैसे पहुंचे कानून के हाथ

इससे पहले सोमवार शाम वित्त मंत्रालय ने बताया था कि जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई) की अहमदाबाद यूनिट ने 22 दिसंबर को सर्च ऑपरेशन चलाया था. इसमें कानपुर में शिखर ब्रांड पान मसाला और तंबाकू उत्पाद की फैक्ट्री, गणपति रोड कैरियर्स के कानपुर स्थित ऑफिस और गोदाम, ओडोकेम इंडस्ट्रीज (परफ्यूमरी कंपाउंड्स के सप्लायर्स) के कानपुर और कन्नौज स्थित ठिकानों पर छापा मारा गया था. ये पीयूष जैन की कंपनी है.

यहां टीम ने गणपति रोड कैरियर्स के चार ट्रकों की जांच की. ये ट्रक शिखर का पान मसाला और तंबाकू लेकर जाते थे. लेकिन पाया गया कि उन्होंने जीएसटी की पेमेंट नहीं की थी. अफसरों ने जब फैक्ट्री में मौजूद स्टॉक का मिलान किताब में लिखे स्टॉक से किया तो यह पता चला. मिलान में कच्चे माल और तैयार उत्पाद की कमी पाई गई.

कन्नौज वाले घर से मिला 19 करोड़ कैश

आगे जांच में पता चला कि उत्पादक ट्रांसपोर्टर की मदद से जीएसटी बचाने कि लिए उत्पाद को गुपचुप तरीके से फैक्ट्री से निकलवाता था. इसके लिए फर्जी रसीदें बनाई जाती थीं. ये फर्जी रसीदें ट्रांसपोर्टर ही बनाता था. अफसरों को ऐसी 200 फर्जी रसीदें मिली थीं. शिखर पान मसाला बनाने वाली उत्पादक ने इस बात को माना और 3.09 करोड़ की टैक्स देनदारी की. इसके बाद कानपुर में ओडोकेम इंडस्ट्रीज के ठिकानों पर छापेमारी हुई. इसमें 177.45 करोड़ रुपये कैश बरामद करके जब्त किया गया. इसे CBIC अधिकारियों द्वारा की गई अब तक की सबसे बड़ी जब्ती बताया गया है.

कन्नौज वाले घर में मिला तहखाना

पीयूष का बेटा बोला - न्याय पर यकीन

पीयूष जैन के बड़े बेटे प्रत्युष से आज तक ने बातचीत की. उन्होंने कहा कि मुझे देश के न्याय पर यकीन है. कन्नौज और कानपुर रैड के बाद पहली बार जैन परिवार के किसी सदस्य ने बयान दिया था. कन्नौज स्थित पैतृक घर पर छापेमारी खत्म होने के बाद यह बयान आया था. यहां से टीम को 19 करोड़ कैश, 23 किलो सोना और 6 करोड़ रुपये का चंदन का तेल मिला था.

क्या है गुजरात कनेक्शन?

दरअसल, अहमदाबाद में इनकी (शिखर) तानसेन ब्रांड का पान-मसाला आता था. डीजीजीआई अहमदाबाद की निगरानी में करीब 3 महीने पहले ही एक टीम ने कानपुर में कंपनी और इनसे जुड़े फर्मों की निगरानी शुरू कर दी थी. सभी सबूत और ठिकानों की पुख्ता जानकारी के बाद टीम ने छापेमारी की कार्रवाई शुरू की.

फिर ट्रक ड्राइवर की एक गलती ने देश की सबसे बड़ी सीजीएसटी चोरी को अंजाम तक पहुंचा दिया. गुजरात में करीब 3 महीने पहले जीएसटी विभाग ने 1 ट्रक पकड़ा, जिसमें शिखर पान मसाला लेकर जा रहे माल के साथ करीब 200 फर्जी इनवाइस पकड़ी गई. इसके बाद से ही डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआई) की टीम ने कानपुर में डेरा डाल दिया था.

गुजरात में फर्जी इनवाइस और माल के साथ पकड़ा गया ट्रक गणपति ट्रांसपोर्टर प्रवीण जैन का था. प्रवीण, पीयूष जैन के भाई अमरीष जैन का बहनोई है. इनके नाम करीब 40 से ज्यादा फर्म हैं. फर्जी फर्म के नाम से इनवाइस - शिखर गुटखा प्राइवेट लि. पता 51/47 नयागंज, कानपुर की ओर से काटी गई थी.

 

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