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धर्मांतरण मामले में गुजरात भी अछूता नहीं, सूरत का संतोष पंढारे कैसे बन गया अब्दुल्ला

सूरत का संतोष पंढारे अब अब्दुल्ला बनकर दिल्ली और यूपी के सहारनपुर में कहीं रह रहा है. संतोष जहां रह रहा है वहां एक वीडियो भी उसने अपने भाई राजेश और दिनेश को भेजा, जिसमें वो उस जगह के बारे में भी सब बता रहा है.

संतोष उर्फ अब्दुल्ला की तस्वीर दिखाता भाई (फोटो-आजतक) संतोष उर्फ अब्दुल्ला की तस्वीर दिखाता भाई (फोटो-आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 2013 में 16 साल की उम्र में काम के लिए निकला तो फिर नहीं लौटा
  • संतोष ने 7-8 साल बाद बड़े भाई को फोन किया, कहा- वो यहां खुश है
  • संतोष उर्फ अब्दुल्ला दिल्ली या यूपी के सहारनपुर में कहीं रह रहा

देश के कई राज्यों से धर्मांतरण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. खासकर उत्तर प्रदेश से सामने आ रहे धर्मांतरण के मामलों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार एक्शन में है. धर्मांतरण के मामलों से गुजरात भी अछूता नहीं है. राज्य के सूरत शहर में अपने दो भाइयों के साथ रहने वाला संतोष धर्मांतरण का शिकार हो गया.

संतोष अब अब्दुल्ला बन गया है. गरीब घर से ताल्लुक रखने वाला संतोष आखिर कैसे अब्दुल्ला बना. संतोष के बड़े भाइयों को जब उसके बारे में पता चला तो उसे वापस लाने की काफी कोशिश भी की. उन्होंने हिंदू संगठन और सूरत पुलिस से मदद भी ली लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली. जानते हैं संतोष पंढारे की पूरी कहानी.

सूरत के आजाद नगर इलाके में रहने वाले ये हैं दिनेश पंढारे और राजेश पंढारे. रिश्ते में ये दोनों सगे भाई हैं. इनका सबसे छोटा भाई संतोष पंढारे भी है मगर वो अब अब्दुल्ला बन गया है.

माता-पिता बचपन में ही गुजर गए
पंढारे बंधुओं के माता-पिता बचपन में ही गुजर गए थे. तीनों भाइयों ने गरीबी और माता-पिता के बिना जिंदगी जीनी शुरू की थी. मजबूरी कर के किसी तरह अपना पेट पालते थे. तीनो भाइयों में गुलाबी शर्ट पहने हुए सबसे बड़े भाई का नाम राजेश है जबकि पीली शर्ट पहने दूसरे भाई का नाम दिनेश है और तीसरे नंबर का सबसे छोटा भाई संतोष है जो अब अब्दुल्ला बन गया है.

संतोष अब अब्दुल्ला बन गया
संतोष अब अब्दुल्ला बन गया

सबसे छोटे भाई संतोष के अब्दुल्ला बनने की तस्वीर राजेश और दिनेश दिखा रहे हैं. बात सन 2013 की है जब संतोष की उम्र तकरीबन 16 साल रही होगी. एक दिन अचानक उनका सबसे छोटा भाई संतोष घर से नौकरी के लिए निकला था, फिर वो वापस नहीं आया.

दोनों भाइयों ने उसे खोजने की बहुत कोशिश की थी लेकिन उसका कोई अता-पता नहीं चल सका. राजेश और दिनेश अपने छोटे भाई के मिलने की आस छोड़कर अपनी-अपनी जिंदगी में बिजी हो गए थे.

सालों बाद आया फोन
धीरे-धीरे समय बीतता गया और फिर 7-8 साल बाद राजेश के मोबाइल पर एक फोन आता है. फोन करने वाला कोई और नहीं बल्कि उसका छोटा भाई संतोष था. वर्षों बाद छोटे भाई की खबर मिलने पर दोनों भाई बहुत खुश हुए. उन्हें लगा कि अब उनका भाई का फोन आया है तो वो भी आ जाएगा. मगर ऐसा हुआ नहीं क्योंकि संतोष अब धर्मांतरण कर अब्दुल्ला बन गया था और वो जहां रहता था वो खुद को खुश बता रहा था.

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फोन पर संपर्क होने के बाद संतोष के दोनों भाई राजेश और दिनेश ने अपने छोटे भाई को वापस सूरत लाने की कोशिश की थी. इसके लिए उन्होंने हिंदू संगठन के माध्यम से सूरत पुलिस का सहयोग लिया और दिल्ली से सूरत भी लेकर आए थे लेकिन संतोष चुपके से सूरत छोड़कर जहां से आया था वहां चला गया था.

संतोष के धर्मांतरण के बीज उसी इलाके से बोए गए जहां वो रहता था. संतोष सूरत आने के बाद अपने भाइयों के खिलाफ ही खड़ा हो गया था.

सहारनपुर में रह रहा अब्दुल्ला? 
सूरत का संतोष पंढरे अब अब्दुल्ला बनकर दिल्ली और यूपी के सहारनपुर में कहीं रह रहा है. संतोष जहां रह रहा है वहां एक वीडियो भी उसने अपने भाई राजेश और दिनेश को भेजा, जिसमें वो उस जगह के बारे में भी सब बता रहा है.

संतोष के भाई राजेश के मुताबिक उसका भाई छोटा नाबालिग था और उसे लोभ-लालच देकर धर्मांतरण करवाया गया है. दो साल पहले उसे सूरत भी लेकर भी आए थे. उस वक्त उसने मुझे ही मारने के लिए लड़के बुलाए थे मगर वो फिर एक दिन बिना बताए वहीं चला गया जहां से उसे लेकर आए थे.

सूरत के भटार इलाके में स्थित आजाद नगर की झुग्गी में रहने वाले संतोष को सूरत लाने के लिए बजरंगदल के देवीप्रसाद दुबे से उस वक्त मदद मांगी थी. राजेश पंढारे और दिनेश पंढारे के छोटे भाई संतोष पंढारे की कुछ मोबाइल रिकोर्डिंग उस वक्त उनके पास थी जिसमें वो कश्मीर जाने की बात कर रहा था है.

मामला सूरत के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर सतीश शर्मा के संज्ञान लाया गया था और फिर उस समय क्राइम ब्रांच की टीम संतोष को सूरत लेकर आई थी. बजरंगदल के संयोजक देवी प्रसाद की मानें तो धर्मांतरण को लेकर सूरत में भी काफी लोग सक्रिय हैं जिस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है.

इस पूरे मामले में दो साल पहले सूरत पुलिस संतोष उर्फ अब्दुल्ला को संभवतः यूपी या दिल्ली से सूरत तो लेकर आई थी मगर उस वक्त सूरत पुलिस ने कोई ऐसी कार्रवाई नहीं की थी जिससे ये पता चल सके कि धर्मांतरण कर संतोष को आखिर अब्दुल्ला किसने बनाया? और ना अब सूरत पुलिस को इस मामले को कोई दिलचस्पी नजर आती है.

 

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