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मुंबईः मौत के ढाई साल बाद होगा अंतिम संस्कार, तब से मॉर्चरी में ही रखी है डेड बॉडी, जानें क्या है मामला

धारावी के रहने वाले 17 साल के एक लड़के की जुलाई 2018 में मौत हो गई थी. तब से ही उसकी डेड बॉडी जेजे अस्पताल की मॉर्चरी में रखी थी. परिवार वालों का आरोप था कि पुलिस की पिटाई के बाद मौत हुई है. इसलिए वो उसके दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग पर अड़े थे. दूसरा पोस्टमार्टम होने के बाद ही उसका अंतिम संस्कार होगा.

6 अप्रैल से पहले दोबारा होगा पोस्टमार्टम (सांकेतिक तस्वीर) 6 अप्रैल से पहले दोबारा होगा पोस्टमार्टम (सांकेतिक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जुलाई 2018 में पुलिस की पिटाई के बाद हुई थी मौत
  • परिवार वाले दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग पर अड़े थे
  • कोर्ट के आदेश पर 6 अप्रैल को होगा दोबारा पोस्टमार्टम

मुंबई के धारावी में एक 17 साल के लड़के का उसकी मौत के ढाई साल बाद अंतिम संस्कार होगा. लड़के की मौत जुलाई 2018 में हो गई थी और तब से ही उसकी डेड बॉडी मॉर्चरी में रखी थी. परिवार का आरोप था कि पुलिस की पिटाई की वजह से उनके लड़के की मौत हुई है, इस वजह से परिवार वाले दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग पर अड़े थे. अब कोर्ट ने दोबारा पोस्टमार्टम कर बॉडी घर वालों को सौंपने का आदेश दिया है. 

दरअसल, लड़के की डेड बॉडी ढाई साल से जेजे अस्पताल के मॉर्चरी में रखी हुई है. परिवार वालों का कहना है कि जब तक लड़के का दोबारा पोस्टमार्टम नहीं किया जाता, तब तक उसका अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा. बाद में ये मामला कोर्ट पहुंचा. कोर्ट ने परिवार वालों की मांग पर 6 अप्रैल तक दोबारा पोस्टमार्टम करने का आदेश दिया है. दोबारा पोस्टमार्टम करने के बाद लड़के की डेड बॉडी उसके परिवार वालों को सौंप दी जाएगी और आखिरकार ढाई साल बाद उसका अंतिम संस्कार होगा.

कोर्ट ने पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज देखने और दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोबारा पोस्टमार्टम करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने जेजे अस्पताल के डीन को दोबारा पोस्टमार्टम करने के लिए एक नई टीम बनाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, "जेजे अस्पताल के डीन दोबारा पोस्टमार्टम के लिए एक नई टीम बनाएं. इस टीम में वो डॉक्टर नहीं होंगे, जो पहले पोस्टमार्टम में शामिल थे. 6 अप्रैल से पहले दोबारा पोस्टमार्टम करना होगा. उसके बाद अस्पताल के डीन के सिग्नेचर के साथ रिपोर्ट सब्मिट करनी होगी."

क्या है मामला?
परिवार वालों के मुताबिक, जुलाई 2018 में एक मोबाइल चोरी के मामले में पुलिसवाले उनके लड़के को पकड़ ले गए थे. उस समय भी परिवार वालों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने उनके लड़के को जबरन हिरासत में लिया है, जबकि मामले में एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई थी. पुलिस कस्टडी में ही उसको टॉर्चर किया गया और उसे बुरी तरह पीटा गया. घर वालों ने उसे ले जाने के लिए कई बार मिन्नतें कीं. जब पुलिस ने लड़के को परिवार वालों को सौंपा, तो उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो गई. 

उस लड़के का नाम सचिन जैसवार था और जिस वक्त पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था, उस वक्त उसकी उम्र 17 साल थी. सचिन के पिता पेट पालने के लिए सब्जी बेचते हैं. वो धारावी के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराना चाहते हैं, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सचिन की मौत का कारण निमोनिया को बताया गया है. परिवार वाले इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं थे और इसलिए वो दोबारा पोस्टमार्टम कराना चाहते थे.

 

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