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दिल्ली: फर्जी कागजातों पर मुहैया कराते थे सिमकार्ड, 1099 सिम बरामद, 2 डीलर गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने 2 ऐसे जालसाजों को गिरफ्तार किया है जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड मुहैया करवाते थे. पुलिस ने डीलरों के पास से करीब 1099 सिमकार्ड भी बरामद किया है. पुलिस 15 अगस्त की तैयारियों को देखते हुए अलर्ट पर है.

15 अगस्त को लेकर अलर्ट पर है दिल्ली पुलिस (सांकेतिक तस्वीर) 15 अगस्त को लेकर अलर्ट पर है दिल्ली पुलिस (सांकेतिक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 15 अगस्त को लेकर अलर्ट पर पुलिस
  • फर्जी डीलरों पर पुलिस ने लिया एक्शन
  • लैपटॉप, मोबाइल भी पुलिस ने किया जब्त

दिल्ली पुलिस ने फर्जी कागजातों पर सिमकार्ड मुहैया कराने वाले 2 डीलरों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1,099 सिम कार्ड, क्राइम में इस्तेमाल 8 मोबाइल फोन, 5 लैपटॉप और 11 नए ब्रांड न्यू मोबाइल फोन बरामद जब्त किए हैं. दरअसल दिल्ली पुलिस फर्जी दस्तावेजों के सहारे सिम कार्ड मुहैया कराने वाले डीलरों के खिलाफ एक्शन मोड में है. 

दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने दिल्ली के सभी जिलों के डीएसपी को सख्त निर्देश दिए हैं कि 15 अगस्त की सुरक्षा के मद्देनजर इलाके के सभी मोबाइल शॉप, होटल और धर्मशालाओं की तलाशी ली जाए. जब नॉर्थ वेस्ट की दिल्ली पुलिस ने इलाके में मोबाइल सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले लोगों की पड़ताल शुरू की तो 2 डीलरों के बारे में पता चला. 

पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि कुछ लोग फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड मुहैया करा रहे हैं. इस सूचना पर दिल्ली पुलिस ने हैदरपुर से आयुष वाधवा और अरुण कुमार नाम के दो डीलरों को गिरफ्तार कर लिया है.

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ऑनलाइन शॉपिंग के लिए बनाते थे फर्जी ईमेल

पुलिस की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि उन्होंने जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल कर दिल्ली से बाहर संपर्क कर सिमकार्ड जुटाए हैं. ईमेल आईडी बनाने के लिए इन सिमों का उपयोग किया गया है. इन ईमेल आईडी का उपयोग, Amazon, फ्लिपकार्ट जैसे पोर्टलों पर ऑनलाइन खरीदारी के लिए अकाउंट बनाने में होता था.

साइबर अपराधियों को भी बेचते थे सिम

आरोपी ऑनलाइन शॉपिंग के लिए इनका इस्तेमाल करते थे. एमआई स्टोर, सैमसंग और स्नैपडील जैसे प्लेटफॉर्म से रियायती दरों पर मोबाइल फोन मंगाते, फिर इन्हीं फोन्स को वे महंगे दरों पर बेच देते थे. दोनों ने यह भी माना है कि वे इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड को अन्य साइबर अपराधियों को भी बेच देते थे.


 

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