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POCSO केस में नाबालिग की मां का भावुक बयान, बोलीं- इंसाफ के लिए दर-दर भटकना पड़ा

हैदराबाद के चर्चित POCSO केस में नाबालिग लड़की की मां ने भावुक प्रेस रिलीज जारी कर निष्पक्ष जांच की मांग की है. परिवार ने मानसिक दबाव, धमकी और राजनीतिक प्रभाव के आरोप लगाए हैं. पढ़ें पूरी कहानी.

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पीड़ित परिवार ने इस मामले में प्रेस नोट जारी किया है (फोटो-ITG)
पीड़ित परिवार ने इस मामले में प्रेस नोट जारी किया है (फोटो-ITG)

हैदराबाद में दर्ज चर्चित POCSO केस में केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी भागीरथ के खिलाफ आरोप लगाने वाली नाबालिग लड़की की मां ने एक भावुक प्रेस रिलीज जारी की है. पांच पन्नों के इस बयान में परिवार ने मानसिक दबाव, धमकी, भावनात्मक शोषण और जांच प्रक्रिया में परेशान किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. परिवार ने कहा है कि वे सिर्फ निष्पक्ष जांच और अपनी बेटी के लिए इंसाफ चाहते हैं.

14 मई को हैदराबाद में जारी इस प्रेस रिलीज में नाबालिग की मां ने कहा कि उनका परिवार एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार है. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें अपनी बच्ची की सुरक्षा और न्याय के लिए संस्थाओं के सामने गुहार लगानी पड़ेगी. मां ने कहा कि यह बयान किसी बदले या प्रचार के लिए नहीं, बल्कि इसलिए जारी किया गया क्योंकि 'चुप रहना अब बोलने से ज्यादा दर्दनाक हो गया था.'

बयान के मुताबिक, नाबालिग लड़की की मुलाकात साल 2025 के दौरान बंदी भागीरथ से हुई थी. शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत थी, लेकिन बाद में यह रिश्ता कथित तौर पर भावनात्मक निर्भरता में बदल गया. मां का आरोप है कि उनकी बेटी पर बार-बार शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला गया और कई बार विरोध करने के बावजूद उसे मानसिक रूप से प्रभावित किया गया.

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प्रेस रिलीज में 31 दिसंबर 2025 और 1 जनवरी 2026 की रात की घटना का भी जिक्र किया गया है. परिवार का आरोप है कि मोइनाबाद इलाके में लड़की पर शराब पीने का दबाव बनाया गया. इसके बाद कथित तौर पर उसकी कमजोर स्थिति का फायदा उठाकर अनुचित शारीरिक व्यवहार किया गया. परिवार ने कहा कि इन आरोपों की जांच जारी है और उन्हें कानून पर पूरा भरोसा है.

मां ने दावा किया कि परिवार के पास इलेक्ट्रॉनिक चैट, मैसेज और डिजिटल बातचीत के रिकॉर्ड मौजूद हैं. इन संदेशों में कथित तौर पर आरोपी की तरफ से माफी मांगने, भावनात्मक टूटन और माफ करने की अपील जैसी बातें सामने आती हैं. परिवार ने जांच एजेंसियों से सभी डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने और उनकी फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है.

परिवार का कहना है कि जनवरी 2026 में रिश्ता खत्म होने के बाद लड़की की मानसिक हालत काफी खराब हो गई थी. इसके बाद परिवार पर कानूनी कार्रवाई आगे न बढ़ाने के लिए अप्रत्यक्ष दबाव और समझाने-बुझाने की कोशिशें शुरू हुईं. मां ने आरोप लगाया कि 23 अप्रैल 2026 को वे केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार से सुरक्षा और भरोसे की उम्मीद लेकर मिले थे, लेकिन वहां से वे खुद को डरा और असहज महसूस करते हुए लौटे.

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प्रेस रिलीज में पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं. परिवार का आरोप है कि नाबालिग से जुड़े गंभीर आरोप बताने के बावजूद उन्हें घंटों इंतजार कराया गया. काफी देर बाद शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई. परिवार ने कहा कि इस दौरान वे मानसिक तनाव और डर के माहौल में रहे.

बयान में कहा गया कि बाद में जब विस्तृत बयान दर्ज किए गए तो POCSO एक्ट की और गंभीर गैर-जमानती धाराएं भी जोड़ी गईं. परिवार ने इसे सही दिशा में उठाया गया कदम बताया. हालांकि उनका कहना है कि आरोपी अब भी बाहर है, जिससे परिवार लगातार डर, सामाजिक दबाव और मानसिक आघात के बीच जी रहा है.

नाबालिग की मां ने मीडिया और आम लोगों से अपील की है कि बच्ची की पहचान उजागर न करें और मामले से जुड़ी निजी सामग्री सोशल मीडिया पर साझा न करें. उन्होंने कहा कि ऐसा करने से पीड़ित बच्ची का मानसिक आघात और बढ़ता है. परिवार ने कहा कि उन्हें अब भी न्यायपालिका, संविधान और कानून के शासन पर पूरा भरोसा है.

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