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9 साल की उम्र में झारखंड से दिल्ली बेची गई लड़की, किया गया सामूहिक दुष्कर्म

टीम लड़की के पिता को लेकर बताए गए पते पर पहुंची तो नीलम ने बताया कि कुछ दिन पहले वो लड़की को रोहिणी सेक्टर-11 से लेकर आई थी लेकिन उसने अब उसे एक NGO में सुरक्षित रखवा दिया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नीलम उस NGO का पता बताने में झिझक रही थी
  • लड़की को उस घर से रेस्क्यू कर राजेंद्र नगर पुलिस स्टेशन ले जाया गया
  • लड़की की पुलिस स्टेशन में काउंसलिंग की गई

दिल्ली महिला आयोग ने झारखंड से 9 साल की उम्र में दिल्ली बेची गई लड़की का रेस्क्यू करवाया है. आयोग की 181 हेल्पलाइन पर खुद को लड़की का पिता बता रहे व्यक्ति का कॉल आया, जिन्होंने बताया कि उनकी बेटी को 9 वर्ष की उम्र में कोई एक मेले से अगवा कर दिल्ली ले गया. कॉल पर दी गई जानकारी पर दिल्ली महिला आयोग की टीम पहुंची और वहां पहुंचकर लड़की के पिता से मुलाकात की. उन्होंने बताया कि उनके पास जानकारी है कि उनकी बेटी नीलम नाम की महिला के पास है और वो उसका घर जानते हैं.

टीम लड़की के पिता को लेकर बताए गए पते पर पहुंची तो नीलम ने बताया कि कुछ दिन पहले वो लड़की को रोहिणी सेक्टर-11 से लेकर आई थी लेकिन उसने अब उसे एक NGO में सुरक्षित रखवा दिया है. शुरू में नीलम उस NGO का पता बताने में झिझक रही थी लेकिन टीम द्वारा दबाव बनाए जाने पर नीलम ने मोती नगर स्थित NGO का पता बताया. दिए गए पते पर पहुंचने पर टीम ने पाया कि वो पता किसी NGO का नहीं बल्कि किसी वकील के घर का पता था. टीम ने उस पते पर पहुंच उस वकील से बात की तो उसने कबूल किया कि लड़की उसके पास लाई गई थी लेकिन उसने साथ में ये भी कहा कि उसने लड़की को न्यू राजेन्द्र नगर में एक जगह पर रखवाया है. 

वकील ने कहा कि उसने लड़की की काउंसलिंग की है और उसके लिखित बयान भी लिए हैं. उसके अनुसार लड़की ने अपने बयान में दुष्कर्म की बात बताई थी. जब टीम ने उससे पूछा कि उसने ये जानकारी पुलिस या महिला आयोग को क्यों नहीं दी तो वो जवाब नहीं दे पाई. वकील से पूछा गया कि लड़की को कहां भेजा है तो उसने पता बताने में झिझक दिखाई और कहा कि नीलम बच्ची को अपने आप वापस लेकर आ जाएगी. जद्दोजहद के बाद वकील ने न्यू राजेंद्र नगर का एक पता बताया. वहां पहुंचकर टीम ने पाया कि वो कोई NGO या शेल्टर होम नहीं बल्कि एक घर था जहां लड़की से घरेलू सहायिका का कार्य करवाया जा रहा था. 

लड़की को उस घर से रेस्क्यू कर राजेंद्र नगर पुलिस स्टेशन ले जाया गया. लड़की की पुलिस स्टेशन में काउंसलिंग की गई और लड़की ने काउंसलिंग के दौरान बताया कि उसे बहुत छोटी उम्र में उसके गांव का ही एक व्यक्ति बहला फुसलाकर दिल्ली ले आया था और दिल्ली में चंपा नाम की महिला के यहां रखवा दिया. पीड़िता ने बताया कि चंपा के यहां उसके साथ कई लड़कों ने दुष्कर्म किया जिनमें से कुछ के नाम उसने अपने बयान में भी बताए हैं. 

लड़की ने बताया कि उसे कुछ ही दिनों में पंजाबी बाग के एक घर में काम पर रखवाया गया, जहां उसने कुछ साल काम किया और उसके बाद उसे वहां से रोहिणी के एक घर में रखवा दिया गया. पीड़िता के अनुसार, रोहिणी सेक्टर-11 में भी 1 साल पहले उसके साथ शुभम नाम के व्यक्ति ने दुष्कर्म किया और उस घर में उसे रखवाने वाले व्यक्ति जोसेफ ने भी उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया. 

लड़की को अपनी उम्र भी ठीक से नहीं पता और उसने अपने पिता को भी पहचानने से इनकार कर दिया. लड़की सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाहती थी और उसने साथ ही अपने पिता के साथ वापस जाने से भी इनकार कर दिया. लड़की को आजतक अपने काम के लिए कोई पैसे भी नहीं मिले.

पीड़िता की मेडिकल जांच करवाई गई जिसके बाद उसे सुरक्षित शेल्टर होम में रखवा दिया गया है. राजेंद्र नगर थाने में सेक्शन 376, 376D, POCSO सेक्शन 6 के तहत FIR दर्ज कर ली है और पुलिस द्वारा आगे की जांच की जा रही है. 

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा, 'हम हर दूसरे दिन झारखंड से दिल्ली बेची हुई बच्ची को बचाते हैं पर अभी भी ऐसे बहुत बच्चे हैं जो की तस्करी के जाल में फंसे हुए है! मेरी केंद्र सरकार से अपील है कि तस्करी और प्लेसमेंट एजेंसी के खिलाफ कानून सख्त करें. इस बच्ची के गुनहगारों को सजा मिलनी चाहिए. हम इस बच्ची के पुनर्वास पे भी काम करेंगे.'

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