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दिल्ली में फेक वीजा रैकेट का भंडाफोड़, डेढ़ साल में 99 एजेंट्स हुए गिरफ्तार

आर्मेनिया से वापस भारत भेजे  गए 4 लोगों की गिरफ्तारी के बाद एयरपोर्ट पुलिस ने फर्जी वीजा रैकेट के एक गैंग का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने इस मामले में तीन एजेंट को गिरफ्तार किया है.

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फेक वीजा रैकेट का भंडाफोड़
फेक वीजा रैकेट का भंडाफोड़
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली में फेक वीजा रैकेट का भंडाफोड़
  • तीन नए एजेंट्स गिरफ्तार किए गए
  • डेढ़ साल में 99 की हो चुकी है गिरफ्तारी

आर्मेनिया से वापस भारत भेजे  गए 4 लोगों की गिरफ्तारी के बाद एयरपोर्ट पुलिस ने फर्जी वीजा रैकेट के एक गैंग का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने इस मामले में तीन एजेंट को गिरफ्तार किया है. जो वर्क वीजा पर लोगों को विदेश भेजने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम ऐंठ लिया करते थे.  पुलिस ने 2020 और 2021 के बीच उन्होंने एक स्पेशल ड्राई चलाया था जिस ड्राइव के जरिए पुलिस ने अब तक 99 एजेंट्स और गैंग्स के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है जो जाली वीजा लगाकर लोगों को ठगा करते थे.

25 और 26 अगस्त की रात इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर 4 यात्री पहुंचे. जांच में पता लगा कि इन सभी चारों को आर्मीनिया के यरेवन एयरपोर्ट से वापस भारत डिपोर्ट कर दिया है. जो 4 यात्री आर्मेनिया से वापस भेजे गए थे उनके नाम वसीम, मोहम्मद उस्मान, मोहम्मद तनवीर और सलमान था. पुलिस ने जब इनके पासपोर्ट की जांच की तो पता लगा कि इन्हें आर्मीनिया से इसलिए वापस भेज दिया गया क्योंकि वहां पर इमीग्रेशन पर यह पता लगा कि यह लोग किसी और के नाम के वीजा से यात्रा कर रहे थे यानी यह वीजा जाली लगा था. 

इसके बाद पुलिस ने इन चारों से पूछताछ किया तो पता लगा कि यह फर्जी ई-वीजा सैफ नाम के एक एजेंट ने डेढ़ लाख रुपए में दिए थे. पुलिस ने फिर सैफ को गिरफ्तार कर लिया. सैफ ने बताया कि गुड़गांव के रहने वाले महेश नाम की एजेंट ने जाली वीजा दिलाया था. पुलिस ने फिर महेश को भी गिरफ्तार कर लिया. महेश की निशानदेही पर पुलिस महबूब खान नाम के शख्स तक पहुंची. आरोप है कि महबूब खान में ही पहले महेश को जाली ई वीजा दिया, फिर महेश ने सैफ को दिया. फिर सैफ आगे इसे डेढ़ लाख रुपए में लोगो को बेच दिया करता था. 

डीसीपी एयरपोर्ट विक्रम पोरवाल ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि यह लोग पहले उन लोगों के बारे में पता लगाया करता था जो लोग विदेश में जाकर नौकरी करना चाहते थे. उसके बाद यह ऐसे लोगों से बात करते और उन्हें कुछ पैसों में वीजा दिलाने की बात करते. 

पुलिस ने 2020 में ऐसे ही एजेंट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अलग-अलग मामलों में 55 एजेंट की गिरफ्तारी की थी जो फर्जी वीजा और पासपोर्ट के जरिए लोगों को विदेश भेजने के नाम पर उन्हें ठगा करते थे. 2021 में 31 अगस्त तक पुलिस 44 ऐसे एजेंट्स और मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर चुकी है. पुलिस का कहना है कि इन्हें गिरफ्तार करने के लिए उनकी टीम देश के अलग-अलग हिस्सों में कई जगहों पर छापेमारी कर चुकी है.

डीसीपी एयरपोर्ट विक्रमपुर वालों ने आम लोगों से अपील की है कि वह ऐसे एजेंट से सावधान रहें जो फ़ोन या ई-मेल के जरिए पासपोर्ट और वीजा दिलाने का वादा करते हैं और इसके लिए वह पैसों की मांग करते हैं.  

 

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