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दिल्ली में डबल मर्डर की गुत्थी सुलझी, पुलिस ने तीन लोगों को किया गिरफ्तार

12 सितंबर को पुलिस को दयालपुर के मूंगा नगर में फायरिंग की सूचना मिली थी. पुलिस जब मूंगा नगर में एक फ्लैट की पहली मंजिल पर पहुंची तो एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और एक अन्य व्यक्ति बंदूक की गोली से घायल हो गया था. मृतक की पहचान ओल्ड मुस्तफाबाद निवासी फारूक अहमद के रूप में हुई थी.

फाइल फोटो फाइल फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दिल्ली में डबल मर्डर की गुत्थी सुलझी
  • दोहरे हत्याकांड में पुलिस ने तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने तीन लोगों की गिरफ्तारी के साथ एक सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड की गुत्थी को सुलझा लिया है. नॉर्थ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान दिल्ली के न्यू मुस्तफाबाद निवासी जावेद चिकना, साहबजान और जान सैफ अली (22) के रूप में हुई.

12 सितंबर को पुलिस को दयालपुर के मूंगा नगर में फायरिंग की सूचना मिली थी. पुलिस जब मूंगा नगर में एक फ्लैट की पहली मंजिल पर पहुंची तो एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और एक अन्य व्यक्ति बंदूक की गोली से घायल हो गया था. मृतक की पहचान ओल्ड मुस्तफाबाद निवासी फारूक अहमद के रूप में हुई थी.

इस बीच, नेहरू विहार की एक गली से गोलीबारी की एक और कॉल आई. पुलिस मौके पर पहुंची और पाया कि नेहरू विहार निवासी एक अब्दुल हमीद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस संबंध में हत्या की धाराओं और अन्य के तहत दो प्राथमिकी दर्ज की गईं.

जांच के दौरान, सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए गए और गवाहों के बयान दर्ज किए गए. जांच के दौरान पता चला कि जावेद चिकना अपराध में शामिल था. वारदात में शामिल सह आरोपियों की भी पहचान कर ली गई. आरोपियों के ठिकाने के बारे में जानकारी मिलने के बाद टीमों को आरोपियों की तलाश और उन्हें पकड़ने के लिए लगाया गया.

19 सितंबर को, गुप्त सूचना मिली कि तीनों वांछित आरोपी कार से कहीं जा रहे जिसके बाद उन्हें पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया और सभी तीनों अभियुक्तों को पकड़ लिया गया. जिस कार में वे यात्रा कर रहे थे उसे भी जब्त कर लिया गया.

पूछताछ के दौरान, सभी आरोपियों ने अपराध कबूल कर लिया और खुलासा किया कि दोनों मृतक व्यक्तियों के साथ उनकी व्यक्तिगत दुश्मनी थी. जावेद चिकना और साहबजान की मृतक फारूक के साथ एक महिला की शादी के सिलसिले में कुछ दुश्मनी थी जिसमें फारूक दूसरे पक्ष का समर्थन कर रहा था और उन्हें अपमानित किया था. जावेद का अब्दुल हमीद के साथ कुछ संपत्ति और पैसों का विवाद था.

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