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बेंगलुरु में फर्जी कॉल सेंटर्स का भंडाफोड़, अमेरिकी नागरिकों को ठगने वाले साइबर गैंग का पर्दाफाश

बेंगलुरु में स्टेट साइबर कमांड ने चार फर्जी कॉल सेंटरों का खुलासा किया है. आरोपी अमेरिकी अकाउंटिंग फर्म बनकर US नागरिकों से टैक्स सहायता और डिजिटल सेवाओं के नाम पर ठगी कर रहे थे. पढ़ें इन शातिर साइबर अपराधियों की कहानी.

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आरोपी अमेरिकी नागिरकों को शिकार बनाते थे (फोटो-ITG)
आरोपी अमेरिकी नागिरकों को शिकार बनाते थे (फोटो-ITG)

बेंगलुरु में स्टेट साइबर कमांड ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश किया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक यह गिरोह शहर में चल रहे चार फर्जी कॉल सेंटरों के जरिए अमेरिका के नागरिकों को निशाना बना रहा था. आरोपी खुद को एक प्रतिष्ठित अमेरिकी अकाउंटिंग फर्म का प्रतिनिधि बताकर लोगों से ठगी करते थे. इस पूरे नेटवर्क का खुलासा खुफिया जानकारी मिलने के बाद हुआ. इसके बाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन और स्पेशल साइबर सेल ने संयुक्त कार्रवाई शुरू की. शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से ऑनलाइन धोखाधड़ी में शामिल था.

पुलिस अधिकारियों ने कोरमंगला, एचएसआर लेआउट और चूडासांद्रा इलाके में एक साथ छापेमारी की. इन स्थानों पर चल रहे कॉल सेंटरों में बड़ी संख्या में कंप्यूटर सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इस्तेमाल किए जा रहे थे. जांच में पता चला कि आरोपी अमेरिकी टैक्स कंसल्टेंसी कंपनी का कर्मचारी बनकर लोगों को कॉल करते थे. वे टैक्स सहायता, सॉफ्टवेयर लाइसेंस रिन्यूअल और नकली डिजिटल सेवाएं देने के नाम पर पैसे ऐंठते थे. कॉल के दौरान आरोपी अमेरिकी लहजे में बात करते थे ताकि पीड़ितों को शक न हो. पुलिस का कहना है कि कई अमेरिकी नागरिक इस ठगी का शिकार बने हैं.

जांच एजेंसियों के मुताबिक इस साइबर गिरोह में बेरोजगार युवाओं को नौकरी का लालच देकर शामिल किया जाता था. बेंगलुरु समेत दूसरे राज्यों से युवाओं की भर्ती की जाती थी और उन्हें विशेष ट्रेनिंग दी जाती थी. आरोपियों ने कॉल करने के लिए पहले से तैयार स्क्रिप्ट बनाई हुई थी, जिसे पढ़कर कर्मचारी विदेशी ग्राहकों से बातचीत करते थे. युवाओं को अमेरिकी उच्चारण सीखने और ग्राहकों का भरोसा जीतने की ट्रेनिंग भी दी जाती थी. पुलिस को शक है कि इस रैकेट का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है. अब जांच एजेंसियां इससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हैं.

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छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं. इनमें लैपटॉप, CPU, SSD, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस शामिल हैं. अधिकारियों का मानना है कि इन उपकरणों में ठगी से जुड़े कई अहम सबूत मौजूद हो सकते हैं. जांच टीम अब डेटा रिकवरी और डिजिटल फॉरेंसिक जांच कर रही है. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी किस तकनीक के जरिए अमेरिकी नागरिकों तक पहुंच बना रहे थे. साइबर विशेषज्ञों को भी इस जांच में शामिल किया गया है.

इस मामले में अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दिल्ली निवासी प्रशांत और उत्तर प्रदेश निवासी आकाश के रूप में हुई है. पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके. जांच एजेंसियां अब उस मनी ट्रेल की तलाश कर रही हैं जिसके जरिए ठगी की रकम अलग-अलग खातों में भेजी जाती थी. अधिकारियों को शक है कि फर्जी शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर पैसे को इधर-उधर ट्रांसफर किया जाता था. पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.

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