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मुख्तार अंसारीः मनपसंद मछली के लिए गाजीपुर जेल में खुदवा दिया था तालाब, अफसर साथ खेलते थे बैडमिंटन

मुख्तार अंसारी 14 घंटे बाद पंजाब की रोपड़ जेल से यूपी की बांदा जेल पहुंच गया. उसने बहुत कोशिश की कि उसे यूपी की जेल में शिफ्ट न किया जाए. उसे अपनी मौत का डर भी सताने लगा था. लेकिन यूपी की इन्हीं जेलों में कभी उसका राज चला करता था.

मुख्तार अंसारी (फाइल फोटो) मुख्तार अंसारी (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अब यूपी की बांदा जेल होगी मुख्तार अंसारी का नया ठिकाना
  • इसी जेल से उसे 21 जनवरी 2019 को रोपड़ जेल भेजा गया था

14 घंटे की कवायद के बाद आखिर मुख्तार अंसारी को भारी सुरक्षा के बीच पंजाब की रोपड़ जेल से बांदा जेल पहुंचा दिया गया. मुख्तार अंसारी का एक बार फिर बांदा जेल नया ठिकाना बनी है. उत्तर प्रदेश की जेल ही कभी मुख्तार अंसारी की पनाहगाह हुआ करती थी. जहां से मुख्तार अपने तमाम कारनामों का ताना-बाना बुनता था. जहां की चारदीवारी उसकी मनमौजी में बाधा नहीं थी. आज वही उत्तर प्रदेश की जेल में आने से मुख्तार अंसारी और उसके परिवार को डर लगने लगा है.

नवंबर 2005 में बीजेपी विधायक कृष्णनंद राय की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई, मुख्तार अंसारी उस वक्त यूपी की फतेहगढ़ जेल में बंद था. वारदात से एक महीने पहले ही मुख्तार अंसारी को गाजीपुर जेल से फतेहगढ़ जेल भेजा गया था. जानकार इसे मुख्तार अंसारी की साजिश का हिस्सा मानते हैं. उस समय उत्तर प्रदेश पुलिस में आईजी लॉ एंड ऑर्डर रहे बृजलाल याद करते हुए बताते हैं कि "गाजीपुर जेल तो मुख्तार अंसारी का घर हुआ करती थी. मनपसंद मछली खाने के लिए उसने जेल में ही तालाब खुदवा दिया था. शाम को जेल के अंदर बाकायदा दरबार लगता था. जिले के बड़े-बड़े अधिकारी मुख्तार अंसारी के साथ बैडमिंटन खेलने आते थे."

मुख्तार पर पोटा लगाया, तो डिप्टी एसपी की ही मुश्किलें बढ़ गईं

इस सब के पीछे राजनैतिक संरक्षण और मुख्तार अंसारी का रसूख ही बड़ा कारण था. मुख्तार अंसारी के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि जब यूपी एसटीएफ के डिप्टी एसपी शैलेंद्र सिंह ने साल 2004 में सेना के भगोड़े के पास से एलएमजी बरामद की और मुख्तार अंसारी पर पोटा लगाया तो डिप्टी एसपी की खिलाफत में सरकार ही उतर आई. खुद शैलेंद्र सिंह कहते हैं कि उस समय के अधिकारी ही उनको इतना भला-बुरा कहते थे जैसे उन्होंने एलएमजी पकड़कर, मुख्तार अंसारी पर पोटा लगाकर बहुत बड़ा गुनाह कर दिया हो.

मुख्तार अंसारी के लिए आगरा की सेंट्रल जेल हो, गाजीपुर जेल हो, लखनऊ जेल हो या फिर बांदा जेल. ये तमाम जेलें कभी उसके मंसूबों को नहीं रोक पाई. लखनऊ में राज भवन के सामने लखनऊ के जेल अधीक्षक आरके तिवारी की हत्या कर दी गई. हत्या में मुख्तार के करीबी शूटरों का नाम आया. साजिश का आरोप लगा. उस समय मुख्तार अंसारी लखनऊ जेल में बंद था. लेकिन आज हालात बदल गए हैं. जिन जेलों में रहना मुख्तार अंसारी के लिए घर में रहने के बराबर होता था, आज वो ना सिर्फ बांदा जेल बल्कि यूपी की किसी जेल में रहना ही नहीं चाहता. यही वजह थी कि पंजाब की रोपड़ जेल में रहते मुख्तार अंसारी ने भरसक कोशिश की कि उसे यूपी ना भेजा जाए.

रोपड़ जेल में रहते कभी जमानत अर्जी नहीं डाली

मुख्तार अंसारी को जिस मामले में रोपड़ जेल में बंद किया गया, उसमें उसने कभी जमानत अर्जी डाली ही नहीं. जब उत्तर प्रदेश सरकार उसको वापस लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने लगी तो उसने पहले खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया, फिर यात्रा न कर पाने का हवाला दिया, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी कराने की गुहार लगाई और आखिर में जिस यूपी की जेलों में उसका साम्राज्य चलता था, वहां जाने से उसे जान का खतरा महसूस होने लगा, मौत का खौफ सताने लगा.

दरअसल, आज हालात बदले हैं. उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार आई तो सत्ता संभालते ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने पुलिस को बदमाशों की गोली का जवाब गोली से देने की खुली छूट दी. मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद खान, मुबारक विजय मिश्रा जैसे दबंग माफियाओं की अवैध संपत्ति पर बुलडोजर चलवा दिया. तो वहीं बागपत जेल में मुख्तार अंसारी के शार्प शूटर मुन्ना बजरंगी की हत्या हो गई. बिकरु कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे की गाड़ी पलटने के बाद एनकाउंटर में मौत हो गई. ये तमाम कार्रवाई ही मुख्तार अंसारी के खौफ का कारण बनी. 21 जनवरी 2019 को बांदा जेल से रोपड़ गए मुख्तार अंसारी को 7 अप्रैल 2021 यानी पूरे 2 साल 2 महीने 17 दिन बाद फिर उसी जेल में आना पड़ा है.

 

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