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कैमरा, कत्ल और नेता: सरेआम रूसी राजदूत को मारी गोली

मौत किसी इंसान की शख्सियत या हैसियत नहीं देखती. ये किसी से वक़्त पूछकर नहीं आती. जब ये आती है तो कोई इसे टाल भी नहीं सकता. भले ही कैमरा ऑन क्यों न हो. आज हम आपको बताएंगे दुनिया की ऐसी सनसनीखेज़ क़त्ल की वारदातें जिन्होंने दुनिया की तस्वीर बदलकर रख दी. खास बात ये कि जब ये क़त्ल हुए तब कैमरा ऑन था.

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सनसनीखेज़ क़त्ल की वारदात सनसनीखेज़ क़त्ल की वारदात

मौत किसी इंसान की शख्सियत या हैसियत नहीं देखती. ये किसी से वक़्त पूछकर नहीं आती. जब ये आती है तो कोई इसे टाल भी नहीं सकता. भले ही कैमरा ऑन क्यों न हो. आज हम आपको बताएंगे दुनिया की ऐसी सनसनीखेज़ क़त्ल की वारदातें जिन्होंने दुनिया की तस्वीर बदलकर रख दी. खास बात ये कि जब ये क़त्ल हुए तब कैमरा ऑन था. कैमरा चल रहा था. तब भी जब रूसी राजदूत आंद्रे कार्लो तुर्की की राजधानी अंकारा में एग्ज़ीबीशन देख रहे थे. तब भी जब जब उनका हमलावर ठीक उनके पीछे खड़ा था और तब भी जब एक के बाद एक उनके जिस्म में ताबड़तोड़ 9 गोलियां पैवस्त कर दी गईं.

ये कैमरा तब भी चल रहा था कि जब 8 साल का वनवास काट कर पाकिस्तान की सबसे कद्दावर नेता अपने वतन पहुंची थी. तब भी जब उनके क़ातिल ने लोग की भीड़ में खड़े होकर उन्हें गोली मार दी. दुनिया के सबसे ताकतवर देश के सबसे ताकतवर राष्ट्रपति को चलती कार में गोली मार दी गई. तभी भी रोल हो रहा था कैमरा. एक राष्ट्रपति को उसकी ही सेना ने भरी परेड में मौत दे दी. कातिलों की पलटन जब राष्ट्रपति पर गोलियां दाग रही थी तब भी कैमरा चल रहा था. कैमरा कभी झूठ नहीं बोलता. इसी कैमरे में कई बार कैद हो जाता है वो खूनी इतिहास जो दुनिया की तस्वीर बदल देता है.

रूसी राजदूत के साथ तुर्की में हुआ वो इस कैमरे के लिए नया नहीं था. कैमरा, नेता और कत्ल की कई वारदात तारीख़ में दर्ज हैं. कैमरे में कत्ल की सबसे दर्दनाक वारदात तुर्की में कैद हुई. कैमरा चल रहा था और रूसी राजदूत दुनियाभर से आई मीडिया के सामने अपनी बात रख रहे थे. इस बात से अनजान की उनके पीछे ही काला कोट पहने उनकी मौत खड़ी है. अचानक ताबड़तोड़ 9 गोलियां चलीं. कैमरा ऑन था. रूसी राजदूत आंद्रे कार्लो औंधे मुंह ज़मीन पर गिरे. तब भी कैमरा ऑन था. और जब क़ातिल ने उनके जिस्म में 10 गोली पैवस्त की तब भी कैमरा चालू था. बमुश्किल 4 सेकेंड भी नहीं लगा 9 गोलियों के चलने में.

टर्की की राजधानी अंकारा में दुनियाभर की मीडिया अपने अपने कैमरों के साथ. सीरिया के अलप्पो में हो रहे रूसी रण के बारे में राजदूत आंद्रे कार्लो का पक्ष रिकॉर्ड कर रही थी कि अचानक ताबड़तोड़ 9 गोलियों से पूरा हाल गूंज उठा. सबकी नज़र पहले इस हमलावर पर गई और फिर जब कैमरे ने रूसी राजदूत को ढूंढने की कोशिश की तो वो ज़मीन पर औंधे मुंह पड़े थे. हमलावर ने उसी हालत में आंद्रे कार्लो पर दसवीं गोली चला दी. सबकी नज़रें अब हमलावर पर आ टिकीं, जो पिस्टल को हवा में लहराते हुए तुर्किश ज़बान में चिल्ला रहा था.
'अलप्पो को मत भूलो...सीरिया को मत भूलो.'
'जिस किसी ने भी इस क्रूरता का साथ दिया वो इसकी कीमत चुकाएगा.'
'अब मौत ही मुझे रोक सकती है.'

सीरिया के अलप्पों में आखिरी रण चल रहा है. रूस के साथ इस रण में तुर्की भी साथ साथ है. लेकिन विद्रोहियों के खिलाफ रूस का ये रण तुर्की के एक तबके को रास नहीं आ रहा है. रूसी राजदूत आंद्रे कार्लो को मारने वाला 22 साल का मेवलुत मेर्त एडिन्टास इसी गुट का बताया जा रहा है. हैरानी इस बात की है कि मौके पर न सिर्फ रूस के राजदूत आंद्रे कार्लो के सुरक्षाबल मौजूद थे बल्कि उस वक्त इमारत में 100 से ज्यादा बंदूकधारी गार्ड भी तैनात थे. गोलियों की आवाज़ से सभी हरकत में तो आए, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी. सवाल ये था कि आखिर हमलावर आंद्रे कार्लो के नज़दीक पहुंचा कैसे.

दरअसल तुर्की में रूसी राजदूत आंद्रे कार्लो पर ये हमला तब हुआ जब वो अंकारा में एक आर्ट एग्ज़ीबीशन को देखने गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक, कार्लो जब भाषण दे रहे थे. तब इस बंदूकधारी ने खुद को पुलिसवाला बताते हुए अपना पहचान पत्र दिखाया. फिर उसी कमरे में दाखिल हो गया और ठीक उनके पीछे खड़ा हो गया. इसके बाद जो हुआ वो सब कुछ कैमरे में कैद हो गया. गोली चलते ही आर्ट गैलेरी में मौजूद लोग बदहवास हो गए. अफरातफरी मच गई. मगर हमलावर पिस्टल ताने वारदात की जगह पर ही खड़ा रहा. हालांकि मौके पर मौजूद सुरक्षाबलों ने फौरन पोजिशन ली. चंद लम्हों में ही हमलावर को मार गिराया गया.

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