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मायानगरी में दिल्ली की प्रीति राठी पर तेजाब फेंकने वाला दोषी करार, फांसी नहीं तो उम्रकैद तय!

सवा तीन साल पहले मई 2013 में दिल्ली से मुंबई तक ट्रेन में पीछा कर दिल्ली की प्रीति राठी पर इकतरफा इश्क में पागल अंकुर पंवार ने तेजाब फेंक दिया था. अंकुर अपने साथ दो किलो सल्फ्यूरिक एसिड लेकर दिल्ली से मुंबई चला था.

अदालत ने अंकुर पवार को दोषी करार दिया अदालत ने अंकुर पवार को दोषी करार दिया

सवा तीन साल पहले दिल्ली से एक लड़की ट्रेन से मुंबई जा रही थी. इस बात से बेखबर कि उसी ट्रेन में उसके साथ-साथ एक लड़का भी उसके साथ सफर कर रहा है. पूरे दो किलो सल्फ्यूरिक एसिड के साथ. इसके बाद मुंबई रेलवे स्टेशन पर वो लड़का उस लड़की पर सारा तेजाब डाल देता है, बाद में लड़की की मौत हो जाती है. वो लड़का ना तो इकतरफा प्यार में पागल था ना ही कोई जुनूनी आशिक, बल्कि तेजाब फेंकने की उसकी वजह कुछ और थी. अब उसी मामले में मुंबई की एक विशेष महिला अदालत ने अपना फैसला सुनाया है. अदालत मुल्जिम अंकुर पंवार को मुजरिम करार देते हुए ताजिरात-ए-हिंद दफा 302 और और 326 (B) के तहत प्रीति राठी पर तेजाब फेंक कर उसकी जान लेने का दोषी करार दिया है. मुंबई की विशेष महिला अदालत ने इस फैसले के साथ ही ये साफ कर दिया है कि मुजरिम अंकुर पंवार को या तो फांसी होगी या फिर उम्र कैद.

सवा तीन साल पहले मई 2013 में दिल्ली से मुंबई तक ट्रेन में पीछा कर दिल्ली की प्रीति राठी पर इकतरफा इश्क में पागल अंकुर पंवार ने तेजाब फेंक दिया था. अंकुर अपने साथ दो किलो सल्फ्यूरिक एसिड लेकर दिल्ली से मुंबई चला था. इस तेजाबी हमले से प्रीति राठी के जिस्म के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था और फिर तीस दिन तक अस्पताल में जिंदगी से जूझते हुए उसने दम तोड़ दिया था. अब सवा तीन साल बाद जाकर उस प्रीति और उसके घर वालों को इंसाफ मिला है.

वारदात को कुछ इस प्रकार अंजाम दिया गया:

1 मई 2013
शाम के 3 बजकर 40 मिनट
हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन, दिल्ली

दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से एक ट्रेन चली. सपनों की नगरी मुंबई के लिए और इसी ट्रेन में सवार होकर अपने सपने सच करने निकली थी दिल्ली की 23 साल की प्रीति राठी . मुंबई के आर्मी हॉस्पीटल में उसे नर्स की नौकरी मिल गई थी.

2 मई 2013
सुबह 7 बजकर 55 मिनट
बांद्रा टर्मिनल रेलवे स्टेशन, मुंबई

तय वक्त पर दिल्ली-मुंबई गरीब रथ स्टेशन पर पहुंच चुकी थी. प्रीति ट्रेन से उतरती है और प्लेटफॉर्म पर सैकड़ों मुसाफिरों के साथ कदम से कदम मिला कर चलने लगती है. लेकिन ठीक तभी अचानक एक गुमनाम नौजवान आता है और प्रीति पर तेजाब फेंक देता है. स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे लगे थे, लेकिन इत्तेफाक से उस जगह कैमरे का एंगल नहीं पहुंच रहा था जहां पर प्रीति के ऊपर तेजाब फेंका गया. अलबत्ता ठीक उसी वक्त कैमरे के एक दूसरे एंगल से एक लड़का घबराया हुआ तेजी से भागता जरूर नजर आया.


ऐन वारदात के वक्त इस तरह उसी जगह से इस नौजवान को भागते देख पुलिस मान लेती है कि इसी ने प्रीति पर तेजाब फेंका है. लिहाजा सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उसका स्केच भी तैयार कर लिया जाता है. लगा चलो तेजाब फेंकने वाला अब बच नहीं पाएगा. मगर तेजाब से बुरी तरह घायल प्रीति पूरे महीने भर अस्पताल में सांसों से लड़ती रहती है, हर पल जीती-मरती रहती है. लेकिन उसका गुनहगार पकड़ा नहीं जाता. और फिर आखिरकार एक जून को वो सांसों की जंग हार जाती है. एक मई को वो दिल्ली से आंखों में हजार सपने लिए मुंबई के लिए निकली थी और एक जून को वो आंखें ही बंद हो गईं जिनमें तमाम सपने थे.

तारीख-15 जनवरी 2014
जगह- दिल्ली का नरेला इलाका
वक्त- दिन के 1 बजे

मुंबई पुलिस की एक टीम दिल्ली के नरेला इलाके में पहुंती जहां प्रीति अपने परिवार के साथ रहती थी और उसके पड़ोस के एक घर से 23 साल के अंकुर पंवार को प्रीति पर जानलेवा हमला करने के आरोप में गिरफ्तार करती है. दरअसल अंकुर ही वो शख्स है जिसने मुंबई के बांद्रा रेलवे टर्मिनस के प्लेटफॉर्म पर प्रीति राठी पर तेजाब फेंका था और फिर वहां से फरार हो गया था. पुलिस के मुताबिक अंकुर प्रीति के करियर की वजह से उससे जलने लगा था बस इसी वजह से उसने प्रीति पर तेजाब फेंकने का प्लान बनाया था. पुलिस को तफ्तीश के दौरान निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन और बांद्रा टर्मिनस से भी अंकुर का सीसीटीवी फुटेज मिला. अपने गुनहगार को जेल की सलाखों के पीछे देख कर प्रीति की रुह को सुकून जरूर मिला होगा.

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