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Piyush Jain Raid: 196 करोड़ कैश, 23 KG सोना, 600 KG चंदन का तेल... पीयूष जैन के 'तहखानों' से क्या-क्या मिला

Kanpur Raid: कारोबारी पीयूष जैन (Piyush Jain) के कानपुर और कन्नौज वाले ठिकानों से आंखें चौंधिया देने वाले कैश के साथ-साथ बड़ी मात्रा में सोना और चंदन का तेल मिला है.

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कानपुर वाले ठिकाने से 177.45 करोड़ रुपये कैश मिला था कानपुर वाले ठिकाने से 177.45 करोड़ रुपये कैश मिला था
19:12
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कानपुर वाले ठिकाने से 177.45 करोड़ कैश मिला
  • छापेमारियों में कुल 196 करोड़ से ज्यादा कैश मिला

कारोबारी पीयूष जैन के कानपुर और कन्नौज स्थित ठिकानों पर छापेमारी अब खत्म हो गई है. 120 घंटे की जांच, 50 घंटे की पूछताछ में कुल 195 करोड़ रुपये की नकदी बरामद हुई है. लेकिन बेहद साधारण रहन-सहन वाले पीयूष जैन के ठिकानों पर सिर्फ कैश ही नहीं मिला है. बल्कि वहां से करीब 10 करोड़ का सोना और 6 करोड़ का चंदन का तेल भी मिला है.

मिली जानकारी के मुताबिक, पीयूष जैन के कानपुर वाले ठिकाने से 177.45 करोड़ रुपये कैश मिला. वहीं कन्नौज वाले ठिकाने (पैतृक निवास) से 19 करोड़ रुपये कैश मिले. दोनों को मिलाया जाए तो छापेमारी में कुल 196 करोड़ से ज्यादा कैश मिला. सिर्फ कानपुर छापे की बात करें तो किसी प्रवर्तन एजेंसी को किसी एक रेड में अबतक इतना कैश नहीं मिला था.

कन्नौज में मंगलवार दोपहर खत्म हुई छानबीन

पीयूष जैन के कन्नौज वाले ठिकाने पर छापेमारी मंगलवार दोपहर को खत्म हुई. वहां से पहले 17 करोड़ कैश मिला. फिर दो करोड़ रुपये और मिले. साथ ही साथ वहां से 23 किलो सोना और बहुत सारा बेहिसाब कच्चा माल मिला. इसका इस्तेमाल पान मसाले और गुटखे के सुगंधित कंपाउंड (perfumery compounds) बनाने के लिए होना था. इसमें 600 किलो चंदन का तेल भी शामिल था जिसे तहखाने में छिपाकर रखा गया था. इसकी मार्केट वैल्यू 6 करोड़ रुपये है.

कन्नौज वाले घर में मिला तहखाना

पीयूष ने डिटर्जेंट फैक्ट्री में काम करने से की थी शुरुआत

कानपुर विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में एमएससी करने वाले पीयूष जैन के पिता कैलाश चंद जैन का कन्नौज में ही कपड़ों का छोटा व्यापार था. लेकिन पीयूष जैन ने पिता के धंधे में हाथ बटाने के बजाय मुंबई की डिटर्जेंट फैक्ट्री में नौकरी करने से अपने किस्मत को बदलने की शुरुआत की. साबुन फैक्ट्री में काम करने के दौरान ही पीयूष जैन को केमिकल कंपाउंड के बिजनेस की जानकारी हुई. अपने गृह जनपद कन्नौज लौटने के बाद पीयूष जैन ने इत्र कारोबार के केमिकल कंपाउंड को बनाना शुरू किया. इसके लिए Odochem chemicals के नाम से कंपनी रजिस्टर्ड करवाकर विभिन्न इत्र का केमिकल कंपाउंड बनाना शुरु किया.

केमिकल कंपाउंड के धंधे से मुनाफा हुआ तो उसने अपने कारोबार को कानपुर के गुटखा कारोबारियों तक फैला दिया. जिस गुटखे के कारोबार में खुशबू के लिए इत्र काफी महंगा साबित होता है उसमें पीयूष जैन के केमिकल कंपाउंड ने गुटखे में लागत को कम किया लेकिन खुशबू बढ़ा दी. यही वजह थी कि पीयूष जैन के केमिस्ट्री के ज्ञान से बने केमिकल कंपाउंड ने चंद सालों में ही उसे इन ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया था.

कन्नौज के छीपट्टी मोहल्ले के लोग बताते हैं कि पीयूष की जीवनशैली बहुत आम थी. पीयूष के पास एक स्कूटर था और वे उसी का अधिक उपयोग करता था. पड़ोसी यह तक कहते हैं कि पीयूष जैन एक जमीनी और नेकदिल इंसान है.

 

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