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इनसाइड स्टोरीः एंटीलिया केस से मनसुख हिरेन मर्डर तक, ऐसे NIA के रडार पर आए प्रदीप शर्मा

एंटीलिया मामले में फंसे मुंबई पुलिस के पूर्व एपीआई सचिन वाजे का गुरु कोई और नहीं बल्कि पूर्व सीनियर इंस्पेक्टर प्रदीप शर्मा है. मुंबई के पूर्व सुपरकॉप और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा अब एनआईए की हिरासत में है.

पूर्व सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर प्रदीप शर्मा के नाम 113 एनकाउंटर हैं पूर्व सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर प्रदीप शर्मा के नाम 113 एनकाउंटर हैं

एंटीलिया केस अपने अंजाम तक पहुंचने से पहले पता नहीं और क्या-क्या दिखाएगा. इस केस ने सबसे पहले मुंबई के पुलिस कमिश्नर की कुर्सी छीन ली. इसके बाद महाराष्ट्र के गृहमंत्री को विदा कर दिया. फिर चार-चार पुलिस अफसरों को जेल पहुंचा दिया और अब पांचवें पुलिस अफसर की गिरफ्तारी हो गई. कभी मुंबई के सुपरकॉप रहे और 113 एनकाउंटर करने वाले प्रदीप शर्मा को एनआईए ने गिरफ्तार कर लिया. प्रदीप पर इल्जाम है कि उन्होंने ना केवल एंटीलिया मामले की साजिश रची बल्कि मनसुख हिरेन के कत्ल की साजिश में भी वो शामिल थे.  

एंटीलिया मामले में फंसे मुंबई पुलिस के पूर्व एपीआई सचिन वाजे का गुरु कोई और नहीं बल्कि पूर्व सीनियर इंस्पेक्टर प्रदीप शर्मा है. मुंबई के पूर्व सुपरकॉप और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा अब एनआईए की हिरासत में है. प्रदीप शर्मा की गिरफ्तारी एंटीलिया केस की साजिश रचने और मनसुख हिरेन के कत्ल की साजिश में शामिल होने के आरोप में हुई है. प्रदीप शर्मा एंटीलिया केस में गिरफ्तार होने वाले पांचवे पुलिस अफसर हैं. इससे पहले एनआईए सचिन वाजे, रियाजुद्दीन काजी, सुनील माने और सजायाफ्ता पुलिस सिपाही विनायक शिंदे को गिरफ्तार कर चुकी है.

प्रदीप शर्म की गिरफ्तारी के बाद ये सवाल फिर से खड़ा हो गया है कि क्या एंटीलिया की साजिश गुरु और चेले यानि प्रदीप शर्मा और सचिन वाजे के दिमाग की उपज थी या फिर मामला अभी और ऊपर तक जाएगा. क्योंकि इन दोनों गुरु चेले के एक और बॉस हैं परमवीर सिंह. मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह के मातहत प्रदीप शर्मा और सचिन वाजे काम करते थे. सचिन वाजे की मुंबई पुलिस में दोबारा बहाली और सीआईयू में तैनाती परमवीर सिंह के हुक्म से ही हुई थी.

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एंटीलिया केस की जांच सचिन वाजे को परमवीर सिंह ने ही सौंपी थी और सबसे बड़ी बात ये कि एंटीलिया केस की वजह से परमवीर सिंह को कमिश्नर की कुर्सी गंवानी पड़ी. तो अब ऐसे में सवाल है कि सचिन वाजे से प्रदीप शर्मा और अब क्या प्रदीप शर्मा से बात परमवीर सिंह तक जाएगी. दरअसल प्रदीप शर्मा की गिरफ्तारी की जमीन इस महीने की 11 जून को तैयार हो गई थी. एनआईए ने 11 जून को प्रदीप शर्मा के खास मुखबिर संतोष सैलार को गिरफ्तार किया था. संतोष से एनआईए को ना सिर्फ एंटीलिया की साजिश बल्कि मनसुख हिरेन के कत्ल की अहम जानकारी मिली. 

इसस पहले इसी साल अप्रैल में प्रदीप शर्मा के साथ काम कर चुके एक और सिपाही विनायक शिंदे से एनआईए को प्रदीप शर्मा के साजिश में शामिल होने की अहम जानकारी मिल चुकी थी. फर्जी एनकाउंटर मामले में विनायक शिंदे उम्रकैद की सजा काट रहा था और 2020 में ही फर्लो पर जेल से बाहर आया था. मनसुख हिरेन के कत्ल की साजिश में शामिल विनायक शिंदे को एनआईए पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. विनायक शिंदे के बयान के बाद अप्रैल में एनआईए ने लगातार दो दिनों तक प्रदीप शर्मा से घंटों पूछताछ की थी. लेकिन उस पूछताछ के सवा दो महीने बाद अब जाकर प्रदीप शर्मा को गिरफ्तार किया गया है.

एनआईए सूत्रों के मुताबिक वो पहले प्रदीप शर्मा के खिलाफ पुख्ता सबूत इकट्ठा करना चाहती थी. संतोष की गिरफ्तारी ने एनआईए को ये मौका दे दिया. इसी के बाद एनआईए की टीम बड़ी खामोशी से गुरुवार की सुबह करीब पौने सात बजे जेबी नगर अंधेरी वेस्ट में प्रदीप शर्मा के घर जा पहुंची. एनआईए के करीब आठ अधिकारी सीआरपीएफ जवानों के साथ प्रदीप शर्मा के घर पहुंचे थे. तब प्रदीप शर्मा घर में मौजूद थे. एनआईए की टीम ने करीब चार घंटे तक प्रदीप शर्मा के घर की तलाशी ली. इस दौरान वहां से कुछ प्रिंटर, प्रिंट आउट और दूसरी चीजें जब्त कीं. प्रदीप शर्मा के घर इस रेड की ख़बर तब तक मुंबई पुलिस को भी नहीं थी.

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बाद में जब मुंबई पुलिस को सूचना मिली तो मुंबई पुलिस की एक टीम भी प्रदीप शर्मा के घर के बाहर पहुंच गई. घर के आसपास के ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया गया. इसके बाद सुबह करीब दस बजे एनआईए की टीम सीआरपीएफ की सुरक्षा में प्रदीप शर्मा को अपने साथ एनआईए दफ्तर ले गई. फिर दोपहर होते-होते एनआईए ने जानकारी दी कि एंटीलिया साजिश और मनसुख हिरेन के कत्ल की साजिश में शामिल होने के इल्जाम में प्रदीप शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है.

एनआईए सूत्रों के मुताबिक उनके पास इस बात की पुख्ता जानकारी है कि एंटीलिया के बाहर स्कॉर्पियो में जिलेटिन की जो 20 छड़ें रखी हुई थीं. जिलेटिन की वो छड़ें सचिन वाज़े ने प्रदीप शर्मा की मदद से ही हासिल की थी. पर सवाल ये है कि प्रदीप शर्मा ने ऐसा क्यों किया. क्या उन्हें सचिन वाज़े की साज़िश के बारे में पहले से पता था या इस साज़िश के साथ वो पहले दिन से खुद भी जुड़े हुए थे. एनआईए सूत्रों का कहना है कि अब तक की जांच में ये तो साफ हो चुका है कि जिलेटिन की छड़ें नागपुर से आई थी. लेकिन किसके ज़रिए ये जिलेटिन सचिन वाज़े तक पहुंची. इसी की जांच चल रही है. और इस जांच में फिलहाल प्रदीप शर्मा का नाम सामने आ रहा है.

इतना ही नहीं एनआईए सूत्रों का ये भी कहना है कि 2 मार्च को प्रदीप शर्मा मनसुख हिरेन से मिले थे. इस मुलाकात के दौरान सचिन वाज़े भी साथ थे. सूत्रों का ये भी कहना है कि 4 मार्च की रात भी मनसुख हिरेन की प्रदीप शर्मा से मुलाकात हुई थी. 4 मार्च की रात को ही मनसुख हिरेन का क़त्ल हुआ था. इनता ही नहीं मनसुख हिरन का मोबाइल 4 मार्च की रात जिस जगह बंद हुआ वो आखिरी लोकेशन अंधेरी ईस्ट की थी. और इत्तेफाक से प्रदीप शर्मा का घर भी अंधेरी ईस्ट में ही है. एनआईए सूत्रों के मुताबिक दो मार्च दोपहर बाद प्रदीप शर्मा सचिन वाज़े से सीआईयू के उसके दफ्तर में भी मिले थे. ये मुलाकात करीब घंटे भर चली थी.

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यहां गौर करने वाली बात ये है कि दो मार्च की शाम को ही मनसुख हिरेन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, ठाणें और मुंबई के पुलिस कमिश्नर को एक खत भेजा था. जिसमें उन्होंने लिखा था कि एंटीलिया केस की जांच के नाम पर कुछ पुलिसवाले और कुछ मीडिया के लोग उन्हें परेशान कर रहे हैं. यानी कुल मिलाकर एनआईए को ये शक है कि एंटीलिया की साज़िश और मनसुख हिरेन की मौत के बारे में कई ऐसे राज़ हैं, जिसका सच प्रदीप शर्मा जानते हैं. यही वजह है कि एनआईए ने लगातार दो दिनों तक प्रदीप शर्मा से पूछताछ की.

महाराष्ट्र पुलिस में प्रदीप शर्मा का करियर
1983 में सब इंस्पेक्टर के तौर पर प्रदीप शर्मा ने महाराष्ट्र पुलिस सेवा ज्वाइन की की. मुंबई में 92 के दंगे और 93 के धमाकों के बाद प्रदीप शर्मा अचानक तब सुर्खियों में आए जब उन्होंने मुंबई की सड़कों पर दनादन एनकाउंटर करने शुरु कर दिए. इसके बाद देखते ही देखते वो मुंबई पुलिस के सुपरकॉप बन चुके थे. प्रदीप शर्मा के नाम 113 एनकाउंटर हैं. ये वही प्रदीप शर्मा हैं, जिनकी टीम में कभी दया नायक और सचिन वाज़े जैसे एनकाउंटर स्पेशियलिस्ट काम किया करते थे. सचिन वाज़े तो प्रदीप शर्मा को अपना गुरु ही मानता है. हालांकि 2008 में डी कंपनी से संबंध रखने के इल्ज़ाम में प्रदीप शर्मा को सस्पेंड कर दिया गया था. लेकिन एक साल बाद ही वो दोबारा बहाल हो गए थे. 

जनवरी 2010 में छोटा राजन गैंग के करीबी मेंबर राम नरायण गुप्ता उर्फ लखन भैय्या के फर्ज़ी एनकाउंटर के मामले में प्रदीप शर्मा को गिरफ्तार किया गया था. लेकिन 2013 में सबूतों के अभाव में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया. 2017 में प्रदीप शर्मा ने फिर से पुलिस फोर्स ज्वाइन कर लिया. लेकिन सिर्फ दो साल बाद 2019 में करीब 30 साल की अपनी पुलिस की नौकरी के बाद उन्होंने स्वैच्छा से रिटायरमेंट ले लिया. 2019 में प्रदीप शर्मा ने शिव सेना ज्वाइन कर ली. शिवसेना के टिकट पर ही 2019 में उन्होंने नाला सुपारा से चुनाव भी लड़ा. लेकिन वो चुनाव हार गए. अब 2021 में एंटीलिया केस के चक्कर में प्रदीप शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं. 

 

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