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वारदात: गाजियाबाद के वसुंधरा में ज्वैलरी की दुकान से लूट लिए लाखों

दिल्ली-गजियाबाद बॉर्डर के करीब वसुंधरा इलाके में दिनदहाड़े की लूट की एक ऐसी घटना सामने आई है जिसके बारे आपने कभी सुना नहीं होगा. आपने कभी नहीं सुना होगा कि खुद लुटने वाला ही लुटेरों की मदद कर रहा हो.

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दिल्ली-गजियाबाद बॉर्डर के करीब वसुंधरा इलाके में दिनदहाड़े की लूट की एक ऐसी घटना सामने आई है जिसके बारे आपने कभी सुना नहीं होगा. आपने कभी नहीं सुना होगा कि खुद लुटने वाला ही लुटेरों की मदद कर रहा हो. तीन लोग जौहरी की एक दुकान में घुसते हैं. वहां करीब दस मिनट रुकते हैं. फिर बिना लड़ाई-झगड़ा किए या धमकी दिए जौहरी को लूट कर चले जाते हैं. और कमाल ये है कि इस लूट में खुद जौहरी भी उनकी मदद कर रहा है. जब उसे लुटे जाने का अहसास होता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है. लुटेरे करीब पौने चार लाख रुपए के जेवर और 35 हजार कैश लूट कर फरार हो जाते हैं.

घटना वसुंधरा सेक्टर 11 में ज्योति ज्वैलर्स की है. दिवाली के दिन यानी 23 अक्टूबर को दोपहर एक बजकर 47 मिनट पर एख शख्स दुकान में दाखिल होता है. दिखने में वो पढ़ा-लिखा और अच्छे घर का लग रहा था. तब दुकान में दुकान के मालिक वर्मा और उनका नौकर था. आने वाला ग्राहक सोने के पेंडेंट दिखाने को कहत है. पर अभी दो मिनट भी नहीं गुजरे थे कि तभी एक दसरा शख्स दुकान में दाखिल होता है. वो पहले शख्स का साथी था. अब दोनों एक साथ बैठ जाते हैं और पेंडेंट देखने लगते हैं. मगर उन्हें पेंडेट पसंद नहीं आता. वो और भारी पेंडेंट दिखाने को कहते हैं.

भारी पेंडेंट नहीं था लिहाजा वो हल्के पेंडेट को ही एक तरफ रखने को कह कर अब मंगलसूत्र दिखाने को कहते हैं. इसके बाद वो तीन मंगलसूत्र देखते हैं और उसे भी एकतरफ रखवा देते हैं. फिर बारी-बारी से वो टॉप्स, बुंदे, बाली दिखाने को कहते हैं. इसके बाद हर चीज पहले की तरह ही वो अलग रखवाते जाते हैं. इस दौरान दुकान में एक और शख्स एक बच्चे के साथ आता है. वो शायद जौहरी का पुराना ग्राहक था. वो आते ही मिनट भर रुकता है और फिर चला जाता है. तब तक दोनों लुटेरे शराफत से बैठे रहते हैं.

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अब तक सब कुछ ठीक है. दुकानदार भी होश में नजर आ रहा है. पर तभी एक तीसरा शख्स दुकान में दाखिल होता है. वो भी इन दोनों का साथी था. उसके आने के कुछ देर बाद लुटेरे एक अंगूठी का साइज छोटा करने के लिए जौहरी के नौकर को देते हैं. और इसी बहाने नौकर को काउंटर से दूर कोने में ले जाते हैं. अब नौकर के साथ लुटेरों का एक साथी है जबकि बाकी दो जौहरी के पास बैठे हैं. इसके बाद दोनों लुटेरे जौहरी को वो सारा पैकेट देते हैं जिनमें पेंडेट, टॉप्स, बुंदे, बाली और मंगलसूत्र थे. वो जौहरी से सारे जेवर गल्ले में रखवा देते हैं. ये कह कर कि उनकी बहन आकर अभी पसंद करेगी. इसके बाद वो हजार का नोट निकालते हैं और जौहरी को ये कह कर देते हैं कि वो ये सारा जेवर खरीदेंगे.

अब दोनों लुटेरे जौहरी से कुछ नोट का खुल्ला मांगते हैं. इसके बाद जैसे ही जौहरी खुल्ला देने लगता है खुद लुटेरे भी उसकी आंखों के सामने गल्ला में हाथ डाल देते हैं. पहले एक डालता है और फिर दूसरा. जौहरी सब कुछ अपनी आंखों से देख रहा है. उसके सामने दो अजनबी ग्राहक उसके गल्ले में हाथ डाल रहे हैं और वो कोई विरोध नहीं कर रहा है. कुछ देर पहले जो सारे जेवर लुटेरों ने पसंद किए थे वो भी इसी गल्ले में रखवाए थे. अब जौहरी की आंखों के सामने उसी गल्ले में हाथ डाल कर जेवर के वो पैकेट और गल्ले में रखे 35 हजार कैश निकाल लेते हैं.

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गल्ला साफ करने के बाद अब दूसरा लुटेरा एक पर्ची पर अपना फोन नंबर लिख कर जौहरी को देता है और तेजी से दुकान से बाहर निकल जाता है. जौहरी पर्ची पढ़ता भी है. पर अब भी शायद वो होश में नहीं है क्योंकि उस पर्ची पर कोई फोन नंबर नहीं बल्कि अंग्रेजी के कुछ अक्षर लिखे थे. पर जौहरी को अब भी कोई अहसास नहीं है.

यह पूरी घटना दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो जाती है. गाजियाबाद पुलिस इस सीसीटीवी फुटेज को बारीकी से खंगाल रही है. और अब तक की जांच में उसने जो नतीजा निकाला है वो ये कि लुटेरों के जाने के कुछ मिनट बाद जौहरी अपने आप ठीक हो गया था. और जैसे ही जौहरी को होश आया सबसे पहले उसने गल्ले को ही देखा. यानी उसे अहसास था कि दस मिनट पहले उसने उस गल्ले में लाखों के जेवर रखे हैं.

जब उसे लुटने का अहसास होता है तो कभी वो खुद ही सिर के बाल नोचने लगता है तो कभी रोने लगता है. और फिर सदमे में अचानक गश खा कर गिर पड़ता है. सवाल उठता है कि क्या यह मामला सचमुच सम्मोहन के जरिए लूट का है?

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