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इराक में मचे कत्लेआम से सहमी है दुनिया

इन दिनों इराक में गदर मचा हुआ है. कुछ साल पहले जब इराक़ से अमेरिकी सेना वापस लौटी थी तो उम्मीद यही थी कि एक बेहतर इराक़ उभरकर सामने आएगा. लेकिन तीन साल बाद इराक़ गहरे संकट के बवंडर में घिरा नजर आ रहा है. और आलम ये है कि इस सुलगते हुए इराक को देखकर पूरी दुनिया तपिश महसूस कर रही है.

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इन दिनों इराक में गदर मचा हुआ है. कुछ साल पहले जब इराक़ से अमेरिकी सेना वापस लौटी थी तो उम्मीद यही थी कि एक बेहतर इराक़ उभरकर सामने आएगा. लेकिन तीन साल बाद इराक़ गहरे संकट के बवंडर में घिरा नजर आ रहा है. और आलम ये है कि इस सुलगते हुए इराक को देखकर पूरी दुनिया तपिश महसूस कर रही है.

दो बड़े शहरों पर सुन्नी आतंकियों ने कब्ज़ा जमा लिया है. कुर्द की सेना दावा कर रही है कि किरकुक शहर को खाली करवा लिया गया.लेकिन एक सच ये है कि कत्लेआम करते घूम रहे आतंकियों के डर से इराकी सेना के भी पैर उखड़ गए थे.

कई शहर जेहादियों के कब्जे में
इराक में सुन्नी जेहादियों ने पूरे मुल्क पर अपना कब्जा करने के लिए जंग छेड़ रखी है. और इराकी सेना उन जेहादियों को खदेड़ने के लिए जद्दोजहद कर रही है. जेहादियों की खतरनाक इरादे इतने तेज हैं कि उन लोगों ने इराक के कई शहरों को अपने कब्जे में तो कर ही लिया है.साथ ही कत्लेआम करना भी तेज कर दिया है.

कत्लेआम की तस्वीरों को देखकर दुनिया के कई मुल्कों की नींदें उड़ चुकी है. खासतौर पर हिन्दुस्तान की..क्योंकि ये महज इराकियों पर आतंकियों के जुल्मों सितम की कहानी नहीं बयां कर रही.बल्कि दुनिया के तमाम छोटे बड़े देशों को खून के आंसू रुलाने की दास्तां भी सुना रही है.

दरअसल इराक पर कब्जा करने निकले सुन्नी जेहादियों ने इराक के कई ऐसे शहरों पर कब्जा जमा लिया है.जहां इराक का असली खजाना यानी कच्चा तेल और उसकी रिफाइनरी हैं.इराक का दूसरा सबसे बड़ा शहर मोसूल अब जेहादियों के कब्जे में है.आईएसआईएस के आतंकियों ने सोमवार को सलाहाद्दीन सूबे के शहर बाइजी और टिकरित पर भी कब्जा कर लिया.. और इन शहरों के जेहादियों के कब्जे में जाने के बाद ही पूरी दुनिया सकते में आ गई है क्योंकि बाइजी में इराक की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी है.

.तो दुनिया मंहगाई की चपेट में चली जाएगी
ये बात सभी जानते हैं कि सऊदी अरब के बाद इराक ही वो मुल्क है जहां तेल का उत्पादन दुनिया में सबसे ज्यादा होता है. और सारी दुनिया में परेशानी की वजह भी वही कच्चा तेल है. क्योंकि अगर जेहादियों ने इराक के तमाम तेल पर अपना कब्जा जमा लिया तो पूरी दुनिया मंहगाई की चपेट में चली जाएगी.

इस वक्त इराकी फौज और जेहादियों के बीच बगदाद को बचाने की जंग छिड़ी हुई है.सुन्नी जेहादी अभी बगदाद से करीब 55 मील दूर हैं.

बेशक जेहादियों की तादाद इराकी फौज के मुकाबले बेहद कम बताई जा रही है. बावजूद इसके इराकी फौज मुश्किल से उनका मुकाबला कर रही है. क्योंकि खुलासा ये है कि इस वक्त खून खराबे पर उतारू सुन्नी जेहादियों को सद्दाम हुसैन की बाथ पार्टी के वो नेता भी भीतर ही भीतर मदद कर रहे हैं जो अमेरिकी फौज की पकड़ से दूर रहे.

इसी बीच एक और खुलासे ने दुनिया की नींद उड़ा दी है.जेहादियों के साथ वो ब्रिटिश नागरिक भी दे रहे हैं. जो पिछले काफी अरसे से इराक में रह रहे थे. ये खुलासा किसी और ने नहीं . बल्कि ब्रिटेन के विदेश सचिव विलियम हेग ने अपनी पार्लियामेंट में किया. इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद अब दुनिया की नज़रें इराक पर लग गई हैं. क्योंकि सुन्नी जेहादियों ने इराक में जबरदस्त तरीके से खून खराबा करना शुरू कर दिया है.आलम ये है कि चंद मुट्ठी भर जेहादियों ने कई हजार नागरिकों को शहर से बाहर खदेड़ दिया है.

पूरे इराक में रॉकेट लांचरों से हमला करते, टैंकों से रौंदते और ताबड़तोड़ गोलियां बरसाते इस संगठन के आतंकवादी दिखने लगे हैं. साथ ही दिखने लगा है इराक की सड़कों पर मौत का तांडव.और वीराने में बिछी बेकसूरों की लाशें.

क्या अमेरिका और इरान इराक में चल रहे गृहयुद्ध की वजह से हाथ मिलाएंगे. क्या दोनों एक-दूसरे से कंधे से कंधा मिला कर जंग-ए-मैदान में उतरेंगे. हालांकि दोनों की दोस्ती वक्तिया और हालात की वजह से हो सकती हैं. लेकिन फिर भी खबर यही है कि अमेरिका और इरान. इराक से आईएसआईएस के आतंकवादियों को खदेड़ने के लिए एक दूसरे से हाथ मिला सकते हैं.

अमेरिका और इरान आए साथ
इराक में तेज़ी से बदलते हालात ने दो दुश्मन देशों अमेरिका और इरान को साथ ला दिया है. अगर ब्रिटेन के विदेश सचिव ने ये चौंकाने वाला खुलासा किया कि द इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवेंट के आतंकवादियों का साथ कुछ ब्रिटेन मूल के नागरिक दे रहे है तो ये भी एक चौंकाने वाला सच है कि जो दुश्मन मुल्क कभी एक दूसरे से सीधे मुंह बात नहीं करते थे.वो अब इराक को आईएसआईएस के आतंकवादियों की गिरफ्त से छुड़ाने के लिए जंग के मैदान में इक्कठे नज़र आएंगे.

अमेरिका के गृह सचिव जॉन कैरी के मुताबिक अगर इरान इस लड़ाई में अमेरिका का साथ देता है तो ये एक वाजिब कदम होगा. वैसे आपको बता दें कि साल 1979 के बाद से ही दोनों मुल्कों के संबंध अच्छे नहीं रहे है. जॉन कैरी के मुताबिक फिलहाल आईएसआईएस ही इराक में सबसे बड़ा खतरा है. और वो उस खतरे को खत्म करने के लिए हर ज़रुरी कदम उठाएंगे. वैसे उन्होंने कहा कि अमेरिका आईएसआईएस के आतंकवादियों के खिलाफ हवाई हमले के अलावा भी दूसरे विकल्पों पर भी सोच रहा है.

दरअसल दोनों मुल्क इराक के एक और शहर तल अफार पर आतंकवादिय़ों के कब्ज़े के बाद एक दूसरे का साथ देने का मन बना रहे हैं. उधर इरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी के करीबी हामिद अबोतालेबी के मुताबिक अमेरिका और इरान एक दूसरे का साथ देकर इराक की समस्या को सुलझाने की स्थिति में हैं.

वैसे जानकारों की माने तो उनके मुताबिक अमेरिका को आईएसआईएस के आतंकवादियों को इराक से बाहर खदेड़ने के लिए हवाई हमले करने ही पड़ेगे. फिलहाल अमेरिका ने बगदाद में अपने दूतावास की सुरक्षा के लिए 275 सैनिकों की एक टुकड़ी भेज रहा है. इस वक्त बगदाद में अमेरिका के 170 सैनिक ही मौजूद हैं. इसके अलावा अमेरिका ने फारस की खाड़ी में अपनी नेवी के युद्धपोत यूएसएस जॉर्ज डब्ल्यू एच बुश के साथ साथ यूएसएस मीसा वर्डे, यूएसएस आरले ब्यूर्क, यूएसएस टक्स्टन, यूएसएस ओ, केन और यूएसएस फिलीपीन सी को भी तैनात कर दिया है.

वैसे भारतीय सरकार ने भी इराक बिगड़ते हालात पर चिंता जताई है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक भारत इराक में आतंकी हमलों की कड़ी आलोचना करता है. इसके साथ भारतीय विदेश मंत्रालय पहले ही इराक में सभी भारतीयों से कह चुका है कि कि वो जल्द से जल्द इराक छोड़ दें. इसके लिए बगदाद में भारतीय एंबैसी वतन लौटने में उनकी मदद करेगी. लेकिन सूत्रों के मुताबिक इराक के मोसुल और तिकरित में 50 भारतीय नर्सें फंसी हुई हैं. और इन दोनों ही शहरों पर आईएसआईएस के आतंकवादियों का कब्ज़ा है.

लेकिन क्या अमेरिका इराक से आतंकवादियों को खदेड़ने के लिए इरान की मदद लेगा ये तो आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा. पर तब तक आईएसआईएस के आतंकवादी इराक की सरज़मीं पर और भी ज़्यादा क़त्लोगारत मचा चुके होंगे. क्योंकि इराक में हर बीतते दिन के साथ हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं.

तीस सालों से इराक जंग की आग में झुलस रहा है
इराक में गृहयुद्ध की आग ना जाने कब बुझेगी. इराक का हर बाशिंदा यही सोच रहा है. क्योंकि अगर इराक के इतिहास पर नज़र डाले तो पिछले तीस सालों से इराक जंग की ही आग में झुलस रहा है. इराकियों ने पहले इरान से जंग देखी. फिर देश को सद्दाम के हाथों से निजात दिलाने की जंग देखी और अब इराकी सेना और आईएसआईएस के आतंकवादियों के बीच चली जंग के बीच पिस रहे हैं.

दुनिया के नक्शे पर इराक पिछले 24 साल से सुलग रहा है, शहर के शहर तबाह हो गए. हज़ारों लोग मौत के मुंह में समा गए, लेकिन गदर का सिलसिला फिर भी जारी है..और अब इसकी आंच दुनिया तक पहुंचने लगी है.

2 अगस्त 1990 से जो इराक में जंग का जो सिलसिला शुरु हुआ, उसकी आग में 20 मार्च 2003 में इराक फिर से जग उठा. जी हां अमेरिका ने अपने सहयोगियों के साथ इराक पर ये कहकर हमला बोला कि उसके पास जैविक हथियार है. इराक और अमेरिका के बीच पूरे 8 साल तक ये जंग चलती रही. जैसे पूरा इराक उजड़ गया. अमेरिका ने सद्दाम के तमाम ठिकानों को नेस्तानाबूद कर दिया. सद्दाम हुसैन को फांसी दे दी गई.

इराक को सद्दाम हुसैन की तानाशाही से निजात तो मिली, लेकिन सुकून नहीं. पिछली जंग में इराक के अंदर अमेरिका का साढ़े चार हज़ार सैनिक मारे गए, 32 हज़ार विक्लांग हो गए.

अब अबू बकरअल बगदादी का कोहराम
एक बार फिर इराक में गदर मचा है, ओसामा बिन लादेन को गुरु मानने वाला अबू बकरअल बगदादी, इस्लामिक कानून लागू कराने के नाम पर आतंक मचा रहा है. दुनिया इराक के इस गृह युद्ध पर चिंता जता रही है. अब सवाल ये है कि इराक को नए लादेन के आतंक से कौन और कैसे निजात दिलाएगा. निगाहें अमेरिका की तरफ टिकी हैं.

इराक में हर जगह खून-खराबा
इराक की सरज़मीं जंग-ए-मैदान में तब्दील हो चुकी है. चारों तरफ अगर कुछ नज़र आता है तो तबाही और बर्बादी के निशान. इराक की फिज़ाओं में गोलियों और बमों के फटने की आवाज़ गूंज रही है. हर तरफ क़त्लोगारत का ही मंज़र है. और इस तबाही के बीच में भारत के कुछ लोग भी वहां फंसे है जो रोजी कमाने के लिए इराक गए थे. उनके परिवार वालों का आरोप है कि जिन कपंनियों में वो लोग काम कर रहे थे वो उन्हें वहां छोड़ कर भाग गईं हैं और अब उनको वहां पूछने वाला कोई नहीं है.

इराक में फंसे हिंदुस्तानी
इराक के शहरों में कत्लेआम और खूनखराबे से पंजाब के इन लोगों का दिल कांप रहा है. किसी का बेटा, किसी के पिता. किसी का शौहर इराक में बम बारूद के बीच फंसे पड़े हैं . अमृतसर की रहने वाली गुरपिंदर कौर के भाई अपने दोस्तों के साथ इराक की एक कंपनी में काम कर रहे थे लेकिन आतंकी हमलों के बीच 41 लोगों की कोई खबर नहीं है . कंपनी ने इन लोगों को कत्लेआम के बीच छोड दिया और खुद कामधंधा समेट कर भाग खड़ी हुई.

तिकरिट और करीबी इलाकों में काम कर रही 46 नर्सों में से ज्यादातर चाहकर भी वतन वापस नही लौट सकतीं . ढाई लाख तक का लोन लेकर वो इराक पहुंची हैं और इसी बोझ ने उन्हें खतरों के बीच रहने को मजबूर कर दिया है . यहां तक कि रेड क्रास ने भी उनकी हिफाजत से हाथ खडे कर दिए हैं . कोट्टयम की रहने वाली मेरिना इस वक्त टिकरित के हॉस्पिटल में जख्मियों को जिंदगी देने का काम कर रही हैं लेकिन आज खुद उनकी जिंदगी खतरे में हैं और यहां उनका परिवार परेशान.

फंसे हैं 2 हजार से ज्यादा हिन्दुस्तानी
इराक में इस वक्त 2 हजार से ज्यादा हिन्दुस्तानी जहां तहां फंसे हुए हैं. कुछ खुशकिस्मत तो वक्त रहते वतन लौट आए लेकिन बाकियों का कोई ठिकाना नहीं . तिकरित, मोसूल, बगदाद, बसरा जैसे शहरों में हिन्दुस्तान से गए ज्यादातर लोग या तो अस्पतालों में काम कर रहे हैं या फिर कंस्ट्रक्शन कंपनियों में. जहां तहां मुठभेड़ों और हमलों के चलते सडक के रास्ते बंद हो चुके हैं और एयरपोर्ट तक जाना भी नामुमकिन . डर तो इस बात का है कि अगर अमेरिका ने आतंकियों पर अटैक किया तो हालात हाथ से निकल जाएंगे.

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