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काला टॉप पर भारत के कब्जे से बौखलाया चीन, घुसपैठ की कोशिशें भी नाकाम

एक तरफ बातचीत का ढोंग तो दूसरी ओर तनाव बढ़ाने की कोशिश. यही चीन की नीति है. चीन मानता नहीं. तभी तो वो लगातार घुसपैठ की फिराक में रहता है. वो उकसावे की रणनीति अपना रहा है. 29 अगस्त से अब तक चीन ने 3-3 बार LAC पर घुसपैट की कोशिश की है.

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चीन की नापाक साजिश को भारतीय जवानों ने कई बार नाकाम किया है चीन की नापाक साजिश को भारतीय जवानों ने कई बार नाकाम किया है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चीन की नापाक साजिश फिर नाकाम
  • 4 दिन में 3 बार की घुसपैठ की कोशिश
  • भारतीय सेना के जवानों ने दिया मुंहतोड़ जवाब

चीन की साजिश लगातार जारी है. एक तरफ वो बातचीत का नाटक करता है तो दूसरी तरफ घुसपैठ की कोशिश करता है. 4 दिनों में तीन बार चीन ने भारत में घुसपैठ करने की कोशिश की है. लेकिन हर बार उसे मुंह की खानी पड़ी है. मंगलवार को जिस वक्त भारतीय सेना और चीनी सेना में बात हो रही थी, उस वक्त भी चीन ने दुस्साहस दिखाया. लेकिन भारत के तेवर देख चीनी सैनिकों को दबे पांव लौटना पड़ा. 

एक तरफ बातचीत का ढोंग तो दूसरी ओर तनाव बढ़ाने की कोशिश. यही चीन की नीति है. चीन मानता नहीं. तभी तो वो लगातार घुसपैठ की फिराक में रहता है. वो उकसावे की रणनीति अपना रहा है. 29 अगस्त से अब तक चीन ने 3-3 बार LAC पर घुसपैठ की कोशिश की है. 

पहली बार चीन के जवानों ने 29-30 अगस्त की रात पैंगोंग इलाके में हिमाकत की. उन्हें करारा जवाब मिला. दूसरी बार 31 अगस्त की रात भी चीनी सेना ने गुस्ताखी दिखाई लेकिन फिर उन्हें भारतीय सेना के जवानों ने उनकी औकात दिखा दी. और अब तीसरी बार 1 सितंबर को भी चीन की फौज ने ऐसी ही कोशिश की लेकिन इस बार भी उनके हाथ नाकामी ही लगी. 

जिस वक्त चुसूल में चीन और भारतीय सेना की बात चल रही थी. हिन्दुस्तान अमन शांति की कोशिशों में जुटा था. लेकिन उसी वक्त चीन अपनी विस्तारवादी फितरत को अंजाम देना चाहता था. चीनी सेना की 7-8 गाड़ियों ने मंगलवार को LAC की तरफ बढ़ने की कोशिश की. PLA के जवान अपने चेपुजी कैंप से आगे बढ़ना चाहते थे. तभी भारतीय खेमे को इसकी भनक लग गई.

सूत्रों से आजतक को मिली जानकारी के मुताबिक भारतीय सेना ने भी चीन को करारा जवाब दिया. उसी के अंदाज में सेना ने जवानों को तैनात कर दिया. अपने साजो सामान भी अलर्ट कर दिए. जैसे ही चीन की नजर हिन्दुस्तान की तैयारियों पर पड़ी, उसे बैकफुट पर जाना पड़ा. सेना की मुस्तैदी की वजह से चीनी सैनिक अपने कैंप में लौट गए.

दुनिया जानती है कि चीन दोमुंहा है. इसके सबूत 31 अगस्त की रात को भी मिले. दिन के उजाले में चीन ने बातचीत का नाटक किया और रात के अंधेरे में एक बार फिर से उसके जवान घुसपैठ की कोशिश के लिए निकल पड़े. खबरों की मानें तो 31 अगस्त की रात चीनी जवानों ने काला टॉप और हेलमेट टॉप पर घुसपैठ की कोशिश की. लेकिन हमारे जवान अलर्ट थे, उन्होंने चीनी जवानों को फौरन चेतावनी दी. हिंदुस्तानी जवानों ने मेगाफोन का इस्तेमाल करके चीनी सैनिकों को चेताया कि वो आगे बढ़ने की हिमाकत ना करें. भारतीय जवानों की चेतावनी के बाद चीनी फौज की घुसपैठ की कोशिश नाकाम हो गई.

29-30 अगस्त की रात को भी घुसपैठ की कोशिश का अंजाम भुगत चुका है चीन. यानि उसकी हर चाल पर हिन्दुस्तान की नजर है. चीन की हरकत पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान दिया है कि 31 अगस्त की रात जब दोनों देशों के कमांडर तनाव कम करने के लिए बातचीत कर रहे थे, चीनी फौज ने एक बार फिर उकसाने वाली हरकत की. भारत की ओर से सही वक्त पर कदम उठाया गया और यथास्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिश नाकाम कर दी गई. 

दरअसल, पैंगोंग झील के दक्षिण में स्थित काला टॉप पर भारत के कब्जे के बाद चीन बौखलाया हुआ है. उससे ये बर्दाश्त नहीं हो रहा है कि सामरिक दृष्टि से काफी अहम माने जाने वाले काला टॉप पर भारत ने कैसे कब्जा जमा लिया. इसी बौखलाहट में उसने दोबारा घुसपैठ की कोशिश की. लेकिन चीन ये भूल गया कि ये न्यू इंडिया है और वो जितनी बार नापाक कोशिश करेगा उतनी बार मुंह की खाएगा.

 

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