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सीरियल किलर: मजे के लिए कत्ल करता था ये मासूम बच्चा

उम्र 8 साल. लाल आंखें. बेखौफ चेहरा. जी हां, हम बात कर रहे है भारत के सबसे छोटी उम्र के सीरियल किलर की, जिसने मासूम उम्र में तीन लोगों को मौत की नींद सुला दिया. वजह बताई कि उसे ऐसा करने में मजा आता है. जिस पुलिस से बड़े अपराधी भी खौफ खाते हैं, उनके सामने वह बेखौफ होकर मुस्कराते हुए जवाब देता है. हर जवाब के बदले पुलिस से बिस्किट के रूप में रिश्वत लेता है.

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एक मासूम बच्चे ने तीन लोगों को मौत की नींद सुला दिया एक मासूम बच्चे ने तीन लोगों को मौत की नींद सुला दिया

मानवीय इतिहास में सीरियल किलिंग की घटनाएं काफी पुरानी हैं. 'सीरियल किलर' ठग बहराम से लेकर निठारी के 'नर पिशाच' सुरेंद्र कोली तक अनेकों नाम हमारे सामने हैं. aajtak.in सीरियल किलिंग की घटनाओं पर एक सीरीज पेश कर रहा है. इस कड़ी में आज हम बताने जा रहे हैं भारत के सबसे छोटी उम्र के सीरियल किलर के बारे में, जो महज आठ साल की उम्र में मजे के लिए कत्ल करता था.

उम्र 8 साल. लाल आंखें. बेखौफ चेहरा. जी हां, हम बात कर रहे है भारत के सबसे छोटी उम्र के सीरियल किलर की, जिसने मासूम उम्र में तीन लोगों को मौत की नींद सुला दिया. वजह बताई कि उसे ऐसा करने में मजा आता है. जिस पुलिस से बड़े अपराधी भी खौफ खाते हैं, उनके सामने वह बेखौफ होकर मुस्कराते हुए जवाब देता है. हर जवाब के बदले पुलिस से बिस्किट के रूप में रिश्वत लेता है.

बात सन 2007 की है. बिहार के बगूसराय का मुसहरी गांव एक के बाद एक दो मासूम बच्चों की हत्याओं से दहल उठा. किसी को नहीं पता था कि इन कत्ल को कौन अंजाम दे रहा है. इसी बीच एक जवान शख्स का कत्ल हो जाता है. मामला पुलिस तक पहुंचता है. पुलिसिया छानबीन में जो तथ्य सामने आता है, उसे सुनकर पूरे गांव के लोग दंग रह जाते हैं. एक मासूम बच्चा इस वारदात को अंजाम दे रहा है.

मजे के लिए करता था कत्ल
मिनी सीरियल किलर के रूप में चर्चित इस लड़के अमरजीत सदा के नाम का जिक्र आते ही उसके हमउम्र दोस्त कांप उठते हैं. उसने अपने गांव की छह महीने की बच्ची को पत्थर मार-मार कर उसकी हत्या कर दी. उसके बाद उसकी लाश एक खेत में ले जाकर दफना दिया. वह बताता है कि उसे कत्ल करने में मजा आता है, इसलिए ऐसा करता है. उसने मजे के लिए ही तीनों कत्ल किए हैं.

हरकत देख पुलिस भी थी दंग
पुलिस भी ऐसे बच्चे को देखकर दंग हो गई. जिस वर्दी को देखकर बड़े से बड़े अपराधी कांप उठते हैं, उनके सामने अमरजीत पर कोई फर्क नहीं पड़ता. भगवानपुर थाना प्रभारी ने उस वक्त कहा था कि उनके करियर में पहली बार ऐसे अपराधी से पाला पड़ा है. इसे वर्दी का कोई खौफ नहीं है. इस पर डांट का कोई असर नहीं होता. इसे न तो कोई गम है, न ही पश्चाताप. अमरजीत फिलहाल बाल सुधार गृह में है.

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