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आतंक के 'मौलाना' अजहर मसूद पर PAK ने ऐसे कसा शिकंजा

मौलाना मसूद अजहर के पकड़े जाने से चंद घंटे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस्लामाबाद में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी. इसमें पाकिस्तान सेना प्रमुख समेत कई दूसरी एजेंसियों के अधिकारी मौजूद थे.

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नवाज शरीफ और मसूद अजहर
नवाज शरीफ और मसूद अजहर

अपनी नापाक साजिश को अंजाम देने के बाद आतंक का सबसे बड़ा सौदागर शायद इस बार भी चैन की नींद सो रहा था. पठानकोट में आतंकी हमले के बाद आतंक के सबसे बड़े आका को यही उम्मीद थी कि इस बार भी पाकिस्तान का हाथ उसकी पीठ पर बना रहेगा. लेकिन एकदम उल्टा हुआ. पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने जैश-ए-मोहम्मद के इस सरगना मौलाना मसूद अजहर को धर दबोचा.

मौलाना मसूद अजहर के पकड़े जाने से चंद घंटे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस्लामाबाद में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी. इसमें पाकिस्तानी सेना प्रमुख समेत कई दूसरी एजेंसियों के अधिकारी मौजूद थे. उस बैठक के बाद पाकिस्तानी पीएम के दफ्तर ने बयान जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान अपनी जमीन पर आतंकी गतिविधियों को संचालित नहीं होने देने के लिए प्रतिबद्ध है.

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पठानकोट हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को एक और मौका दिया था. इसके लिए भारत ने बाकायदा हमले में जैश और उसके सरगना मौलाना मसूद अजहर के शामिल होने के सबूत पाकिस्तान को दिए थे. इसी बीच बराक ओबामा का पाकिस्तान को लेकर एक तल्ख बयान आ गया. इन दोनों चीजों का असर हुआ और पाकिस्तान ने बुधवार को बहावलपुर में मौलाना मसूद अजहर को हिरासत में ले लिया.


भारत की ओर से दी गई जानकारी और पाकिस्तान में शुरुआती जांच के बाद जैश-ए-मोहम्मद के कुछ संदिग्ध धरे गए. उसके कुछ दफ्तरों का भी पता लगाकर उन्हें सील किया गया. लेकिन इन तमाम कोशिशों के बावजूद सवाल ये कि क्या पाकिस्तान वाकई आतंकवाद के खात्मे को लेकर संजीदा है. क्या पाकिस्तान वाकई अजहर के खिलाफ कार्रवाई करेगा. क्या पठानकोट हमले के गुनहगारों को भारत को सौंपेगा.


काबुल से दिल्ली वाया लाहौर. लाहौर में नवाज शरीफ के साथ रायविंड पैलेस का दौरा. शायद ये मोदी का मास्टर स्ट्रोक था. मोदी के इस कदम से दुनिया समझ गई कि पाकिस्तान से दोस्ती के लिए भारत किसी भी सीमा को तोड़ सकता है. लेकिन मोदी के लाहौर दौरे के चंद दिनों बाद पाकिस्तान से आए आतंकियों ने पठानकोट में हमला कर दिया. इस घटना ने एक बार फिर रिश्तों में दरार डालने की कोशिश की.

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पठानकोट हमले के फौरन बाद भारत ने पाकिस्तान को सारे सबूत सौंपे. सबूत देखकर पाकिस्तान के NSA नासिर खान जंजुआ ने भारत के NSA अजित डोभाल को फोन किया. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भी मोदी को फोन किया और गुनहगारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया. मोदी से बातचीत के बाद नवाज शरीफ भी समझ गए कि इस बार सिर्फ दिखावे से काम नहीं चलेगा, कार्रवाई करनी ही पड़ेगी.


नासिर खान जंजुआ ने अजित डोभाल को 3 दिनों के भीतर 4 बार फोन किया. इसके अलावा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने लगातार दो दिनों में दो बार उच्चस्तरीय बैठक बुलाई. फिर पाकिस्तान सरकार ने पठानकोट हमले में पाक कनेक्शन की जांच के लिए JIT बना दी. इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से पाकिस्तान के सामने डेडलाइन तय कर दिया गया. इससे भी पाकिस्तान कार्रवाई के लिए मजूबर हुआ.


पठानकोट हमले के बाद विश्व समुदाय ने जिस तरह से इस हमले की निंदा की उसने भी पाकिस्तान पर दबाव बनाया. अमेरिका, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी, इटली, कनाडा, ब्राजील, जापान, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और नेपाल सहित कई देशों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है. अमेरिका और ब्रिटेन ने पाकिस्तान पर आतंकवादियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया.

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