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एक कत्ल, चार मौतः हरियाणा पुलिस की लापरवाही का फसाना बन गई जींद की ये वारदात

सूरज की किरणों के धरती पर पहुंचने से पहले ही इस धरती से दूर जा चुका था. सुबह घर के अंदर तीनों की लाशें फंदे से लटकती हुई मिली. मरनेवालों में 48 साल का ओमप्रकाश, उसकी 45 साल की बीवी कमलेश और 20 साल का बेटा सोनू शामिल थे.

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मृतक परिवार ने मरने से पहले पूरे गांव को नाश का श्राप भी दे दिया मृतक परिवार ने मरने से पहले पूरे गांव को नाश का श्राप भी दे दिया
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हरियाणा में एक कत्ल की वजह से चार लोगों की जान चली गई
  • माना जा रहा कि स्थानीय पुलिस की लापरवाही से ऐसा हुआ

एक कत्ल की वजह से चार लोगों की जान चली गई और ये सबकुछ इसलिए हुआ, क्योंकि हरियाणा पुलिस ने अपना काम ईमानदारी से नहीं किया. जींद जिले के एक गांव में एक नौजवान का कत्ल हुआ. शक गांव में रहने वाले दो भाइयों पर गया. फिर उनमें से एक भाई का अचानक रहस्यमयी तरीके से मर्डर हो जाता है. अब बचता है दूसरा भाई. जो अपनी पत्नी और बेटे के साथ खुदकुशी कर लेता है. लेकिन मरने से पहले वो वीडियो मैसेज और सुसाइड नोट में ये लिख देते हैं कि उस नौजवान के कत्ल से इनका कोई लेना-देना नहीं है. फिर भी पुलिस और गांववाले उनके ऊपर झूठा इल्जाम लगा रहे हैं.
 
वो 21 और 22 दिसंबर की दरम्यानी रात थी. वक़्त कोई 3.30 बजे का था. सर्द रात में जब पूरी दुनिया गहरी नींद में डूबी थी, तो जींद जिले के धनौरी गांव में एक परिवार जाग रहा था. आधी रात को इसी परिवार के 20 साल के बेटे सोनू ने एक के बाद एक सात वीडियोज़ अपने फ़ेसबुक पेज पर अपलोड किए और इससे पहले कि कोई उन वीडियोज़ को देख कर उन्हें रोकने-टोकने की कोशिश करता, पूरा का पूरा परिवार सूरज की किरणों के धरती पर पहुंचने से पहले ही इस धरती से दूर जा चुका था. सुबह घर के अंदर तीनों की लाशें फंदे से लटकती हुई मिली. मरनेवालों में 48 साल का ओमप्रकाश, उसकी 45 साल की बीवी कमलेश और 20 साल का बेटा सोनू शामिल थे.

बुधवार की सुबह जब देर तक ओमप्रकाश का परिवार घर से बाहर नहीं निकला और ना ही बाहर से आवाज़ लगाने पर घरवालों ने कोई जवाब दिया, तो गांव वालों को अनहोनी का शक होने लगा. तब तक गांव के ही कुछ लोगों की नज़र में ओमप्रकाश के बेटे सोनू के फेसबुक पर पड़ी, जिसमें सोनू और ओम प्रकाश ने रो-रो कर कई वीडियोज़ अपलोड किए थे. दोनों ने खुद को और अपने पूरे परिवार को क़त्ल के एक मामले में बेगुनाह बताते हुए पुलिस और गांव वालों पर सताए जाने का इल्ज़ाम लगाया था और खुदकुशी कर लेने की बात कही थी. 

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सुबह जब तक गांववालों की मदद से पुलिस ओमप्रकाश के घर के अंदर दाखिल हुई, तब तक देर हो चुकी थी. मां-बाप और बेटा तीनों घर के अंदर अलग-अलग फंदों से लटके हुए पाए गए. सुसाइड वीडियोज़ में सोनू ने कहा कि वो अपना बयान पूरे होशो-हवास में देने के बाद अब शराब पी चुका है, क्योंकि इतना बड़ा क़दम वो बिना शराब पिए नहीं उठा सकता. 

एक ही परिवार के तीन लोगों की इस रहस्यमयी मौत के मामले की बुनियाद उसी रोज़ पड़ गई थी, जब 26 नवंबर को गांव का ही एक नौजवान नन्हू अचानक अपने घर से गायब हो गया था. नन्हू ओमप्रकाश के पड़ोस में ही रहता था. लेकिन इससे पहले कि घरवाले नन्हू को ढूंढ पाते या फिर पुलिस उसका कोई पता लगा पाती, नन्हू की मौत की दहलानेवाली खबर आ गई. 29 को नन्हू की लाश गांव के पास ही बोरे में बंद बरसाती नाले में पड़ी मिली. 

यकीनन मामला क़त्ल का था. क्योंकि लाश को जिस तरह से बोरी में बंद कर नाले में निपटाया गया था, वो खुदकुशी या सामान्य मौत के मामले में मुमकिन नहीं था. लेकिन मामले में तब एक बड़ा ट्विस्ट आ गया, जब नन्हू की मौत के मामले में गांव के ही रहनेवाले दो भाइयों बलराज और ओमप्रकाश पर शक किया जाने लगा.

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असल में बलराज का नन्हू के घर आना-जाना था और नन्हू को आख़िरी बार बलराज की मोटरसाइकिल पर बैठा देखा गया था. इसके बाद से नन्हू के घरवालों के साथ गांव के लोगों ने भी बलराज और ओम प्रकाश को शक की निगाह से देखना शुरू कर दिया. नन्हू के घरवालों ने बाकायदा बलराज और ओम प्रकाश के खिलाफ़ थाने में रिपोर्ट तक लिखवा दी. लेकिन इससे पहले कि पुलिस नन्हू की मौत की सच्चाई पता लगा पाती, ओमप्रकाश के भाई बलराज की भी रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई. 

2 दिसंबर को रहस्यमयी तरीक़े से बलराज की लाश खेतों में पड़ी मिली. शक है कि उसने पुलिस और गांव वालों के दबाव के चलते ज़हर खा कर जान दे दी. हालांकि हैरानी की बात ये है कि इतना संगीन और रहस्यमयी मामला होने के बावजूद पुलिस ने बलराज की लाश का पोस्टमार्टम तक करवाने की ज़रूरत नहीं समझी. लेकिन इन दो मौतों के बाद सिर्फ शक की बिनाह पर पुलिस ने बलराज के भाई ओमप्रकाश और उसके परिवार पर तफ्तीश का शिकंजा ऐसा कसा कि एकाएक ओमप्रकाश ने पूरे परिवार के साथ खुदकुशी कर ली.

खुदकुशी से पहले अपने एक वीडियो में ओम प्रकाश ने खुद को अपने परिवार को नन्हू की मौत के मामले में बेगुनाह बताया और कहा कि पुलिस के टॉर्चर करने और गांववालों के उनसे दूरी बना लेने के बाद अब उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा है. रिश्तेदारों की मानें तो पुलिस ओम प्रकाश और उसके परिवार के साथ थर्ड डिग्री टॉर्चर कर रही थी और तो और ओमप्रकाश की पत्नी को भी थाने में लाकर बुरी तरह टॉर्चर किया गया था. 

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एक तरफ तो सोनू और उसके पिता ओमप्रकाश ने इस खुदकुशी के लिए पुलिस के साथ-साथ अपने ही गांववालों को ज़िम्मेदार बताया, वहीं दूसरी तरफ जान देने से पहले सोनू ने गांव वालों से अपनी गाय का ख्याल रखने की अपील की. सोनू ने कहा "आज में भगवान के घर जा रहा हूं, उनसे पूछूंगा कि मेरा न्याय क्यों नहीं किया? मेरा नन्हू के मर्डर में कोई हाथ नहीं है. मेरे को बेइज्जती सहन नहीं हुई. मेरी गौ माता को दाना-पानी देते रहना."

खुदकुशी से पहले सुसाइड वीडियो बनाने के साथ-साथ ओम प्रकाश के बेटे सोनू ने एक लंबा चौड़ा-सुसाइड नोट भी लिखा, जिसमें उसने पुलिस, नन्हू के परिवार और गांववालों पर संगीन इल्ज़ाम लगाए. उसने लिखा "मैं, मेरे माता-पिता कातिल नहीं हैं. और न ही हमें पता है कि पड़ोसी नन्हू का मर्डर किसने किया है. हम नन्हू के घर वालों के डर से मर रहे हैं. घर वाले नन्हू की बहु मेवा, काला, मुनी, मुनी का लड़का, काला का लड़का, भीम के दोनों लड़के, अंकित के मारपीट का वीडियो घर पर कैमरे में रिकॉर्ड है. मेरी मौत का जिम्मेदार गली वाले हैं क्योंकि उन्होंने सच की गवाही नहीं दी. पूरी गली नन्हू के पक्ष में है. मुझे अपनी जिंदगी बहुत प्यारी थी, लेकिन गांव वालों का एक तरफा होने के कारण मैं जिंदगी खो रहा हूं. मैंने जो एसएचओ को बयान दिया वो सब सच है. हमारा नन्हू की हत्या में कोई हाथ नहीं है. हम आत्महत्या कर रहे हैं. क्योंकि पूरा गांव हमें अपराधी मान रहा है. भगवान करे इस गली का और गांव का नाश हो."

रातों-रात एक परिवार के यूं खुदकुशी करने और सुसाइड नोट में पुलिस का नाम लेने से जींद की पुलिस खास कर गढ़ी थाने की पुलिस के काम करने के तौर-तरीक़े पर सवाल उठने लगे हैं. सवाल ये कि पिछले क़रीब महीने भर से तीन किश्तों में पांच लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन तफ्तीश के नाम पर जींद पुलिस के साथ खाली हैं. हां, इतना ज़रूर है कि पुलिस ने अब तक हर मौत के बाद शक के घेरे में आए लोगों को कुछ इस तरह से टॉर्चर किया है कि वो एक-एक कर और एक साथ मरने को मजबूर हो रहे हैं. 

यही वजह है कि बुधवार की सुबह जब ओमप्रकाश के पूरे परिवार ने एकाएक खुदकुशी कर ली, तो गांव वालों ने गढ़ी थाने के एसएचओ को इस मामले में नामज़द करने से पहले लाशों का अंतिम संस्कार तक करने से मना कर दिया. अब पुलिस के जांच का भरोसा देने के बाद बेशक गांवालों ने लाशों का अंतिम संस्कार कर दिया है, लेकिन पुलिस पर सवाल जस के तस हैं.

( जींद से विजेंदर कुमार का इनपुट)

 

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