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रेप केसः अब पूरी उम्र जेल में गुजारेंगे ये गुरू घंटाल बाप-बेटे

कभी आलीशान आश्रमों में आसाराम और नारायण साईं भक्तों को नैतिकता के लंबे-लंबे प्रवचन दिया करते थे. आसाराम मंच पर नाचता था तो उसके साथ उसका बेटा नारायण साईं भी नाच नाचकर भक्तों के सामने अपनी लीला का पाखंड रचता था.

हाल ही में नारायण साईं को अदालत ने रेप का दोषी करार दिया था (फाइल फोटो) हाल ही में नारायण साईं को अदालत ने रेप का दोषी करार दिया था (फाइल फोटो)

ना ये ढोंग काम आया. ना ये डांस चल पाया. ना खुद को भगवान बताकर छलने की ये माया काम आई. आखिरकार वही हुआ. जिसे कानून की भाषा में इंसाफ कहते हैं. अदालत ने अपने पिता आसाराम की तरह बेटे नारायण साईं को सूरत की दो बहनों से रेप के मामले में दोषी करार दे दिया. इस मामले में अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है. साथ ही उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. यानी बाप बेटे दोनों की पूरी उम्र कैद कर ली गई है.

कभी आलीशान आश्रमों में आसाराम और नारायण साईं भक्तों को नैतिकता के लंबे लंबे प्रवचन दिया करते थे. आसाराम मंच पर नाचता था तो उसके साथ उसका बेटा नारायण साईं भी नाच नाचकर भक्तों के सामने अपनी लीला का पाखंड रचता था. लेकिन किसी को क्या पता था कि जिस आश्रम को भक्त मंदिर समझते हैं और जिस आसाराम और नारायण साईं को वो भगवान समझते हैं. वो गुरू नहीं गुरू घंटाल हैं.

करीब 11 साल पुराने मामले में सूरत की सेशंस कोर्ट ने दो बहनों से रेप के मामले में नारायण साईं का हिसाब किताब कर दिया. जिस मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है. वो सूरत की रहने वाली दो बहनों से जुड़ा हुआ है. इन बहनों ने नारायण साईं पर बलात्कार का आरोप लगाया था. पुलिस ने पीड़ित बहनों के बयान और लोकेशन से मिले सबूतों के आधार पर नारायण साईं और आसाराम के खिलाफ केस दर्ज किया था.

पुलिस को नारायण साईं को सजा दिलाने के लिए काफी मशक्कत करनी बड़ी. रेप पीड़ित छोटी बहन ने अपने बयान में नारायण साईं के खिलाफ ठोस सबूत होने की बात कही थी. पुलिस ने हर उस लोकेशन की पड़ताल की. जिसका जिक्र पीड़ित लडकी ने अपनी शिकायत में किया था. जबकि बड़ी बहन ने आसाराम के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था.

दो बहनों से रेप को लेकर आसाराम के खिलाफ गांधीनगर के कोर्ट में मामला चल रहा है. नारायण साईं के खिलाफ कोर्ट अब तक 53 गवाहों के बयान दर्ज कर चुकी है, जिसमें कई अहम गवाह भी हैं. जिन्होंने नारायण साईं को लड़कियों को अपने हवस का शिकार बनाते हुए देखा था. या फिर इस घिनौने काम में आरोपियों की मदद की थी. लेकिन बाद में ये सभी गवाह बन गए.

भक्तों की आंखों में धूल झोंकने के मामले में अगर बाप आसाराम एक नंबरी था. तो उसका बेटा दस नंबरी था. नारायण साईं पर जैसे ही रेप के मामले में एफआईआर दर्ज हुई. वैसे ही वो अंडरग्राउंड हो गया था. पुलिस को वो लंबे वक्त तक चकमा देता रहा. इस दौरान वो लगातार अपने ठिकाने बदलकर पुलिस को गुमराह करता रहा. उस वक्त सूरत के पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने नारायण साईं को गिरफ्तार करने के लिए 58 अलग-अलग टीमें बनाई थी और नारायण साईं को खोजने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी.

रेप का मामला दर्ज होने के करीब दो महीने बाद नारायण साईं दिसंबर, 2013 में नारायण साईं हरियाणा-दिल्ली सीमा के पास से गिरफ्तार कर लिया गया था. गिरफ्तारी के वक्त नारायण साईं ने सिख व्यक्ति का भेष धर रखा था. नारायण साईं ने भी बाप की तरह पाखंड का मायाजाल बुन रखा था. वो आसाराम के फैलाए मायाजाल में लोगों को फंसाकर उन्हें अपनी हवस का शिकार बनाता था. आसाराम की करतूत नाराय़ण साईं को पता थी. और आसाराम भी जानता था कि उसका बेटा उसके आश्रम में क्या गुल खिला रहा है.

कानून के शिकंजे में आने के बाद भी नारायण साईं अपनी हरकतों से कभी बाज नहीं आया. जेल में रहते हुए उसने पुलिस कर्मचारी को 13 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की भी कथित कोशिश की थी. हालांकि इस मामले में नारायण साईं जमानत पर है. लेकिन रेप के मामले में कोर्ट में साबित हो गया कि आसाराम की तरह नारायण साईं भी बलात्कारी है और अपने पिता की तरह ही शातिर भी है.

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