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आतंक की दुनिया का नया फरमान, औरतों के लिए जारी हुआ नया 'ड्रेस कोड'

पुरानी कहावत है. रस्सी जल गई मगर बल नहीं गया! सीरिया और इराक़ में अपनी आख़िरी सांसें गिन रहे बग़दादी और आईएस की हालत इन दिनों कुछ ऐसी ही है. दोनों ही मुल्कों में बेशक उसकी सल्तनत लुट रही हो, लेकिन बग़दादी के जल्लाद हैं कि अपनी हुकूमत में अब भी ऊटपटांग फ़रमान जारी किए जा रहे हैं. बगदादी ने अब एक नया फऱमान जारी किया है. फरमान ये नकाब के पीछे से अब औरतों की आंखें भी नहीं दिखनी चाहिए. यदि गलती से भी आंखें दिख गईं आंखें फोड़ दी जाएंगी.

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बगदादी ने जारी किया नया फरमान बगदादी ने जारी किया नया फरमान

पुरानी कहावत है. रस्सी जल गई मगर बल नहीं गया! सीरिया और इराक़ में अपनी आख़िरी सांसें गिन रहे बग़दादी और आईएस की हालत इन दिनों कुछ ऐसी ही है. दोनों ही मुल्कों में बेशक उसकी सल्तनत लुट रही हो, लेकिन बग़दादी के जल्लाद हैं कि अपनी हुकूमत में अब भी ऊटपटांग फ़रमान जारी किए जा रहे हैं. बगदादी ने अब एक नया फऱमान जारी किया है. फरमान ये नकाब के पीछे से अब औरतों की आंखें भी नहीं दिखनी चाहिए. यदि गलती से भी आंखें दिख गईं आंखें फोड़ दी जाएंगी.

बंदूक की नोक पर खुद को खलीफा घोषित कर चुके अबु बकर अल बगदादी के राज में आतंकी औरतों की बोली तो लगा सकते हैं. उन्हें गुलाम भी बना सकते हैं. मगर औरतों को बग़दादी के राज में खुली आंखों से दुनिया तक देखने की इजाज़त नहीं है. जी हां, आपने सही सुना. बग़दादी के राज में अब औरतों की आंखें दिखना भी हराम यानी गुनाह करार दिया गया है. यहां औरतों पर पहले ही सौ पाबंदियां हैं. मसलन ना तो उन्हें ना तो बग़ैर बुर्के के बाहर निकलने की इजाज़त है और ना ही खुले हाथ पैरों के साथ.

यहां तक कि ऊंगलियां छिपाने के लिए भी उन्हें हमेशा दस्ताने और जुराब पहनने पड़ते हैं. लेकिन अब औरतों के लिए आईएसआईएस ने जो नया फ़रमान जारी किया है, वो कुछ ऐसा ही है. यूं भी चाहे मर्द हो या औरत आईएसआईएस के कब्ज़े वाले इलाके में उसे अपनी मर्ज़ी से जीने की आज़ादी नहीं है. मगर अब औरतों के लिए तो ये जगह जहन्नम से भी बद्तर हो गई है. सिर से पांव तक काले कपड़े से ढंकी औरतों को अब अपनी आंखों को भी एक जाली लगी काली पट्टी से ढंकना होगा. यदि नहीं किया तो बुरा हश्र करेंगे.

बगदादी को खुद के कल का भरोसा नहीं मगर वो यहां की महिलाओं का आज बर्बाद करने पर आमादा है. उनके लिए नए नए फरमान हर रोज़ जारी किए जा रहे हैं. लाउडस्पीकर और पर्चों के ज़रिए आतंकी घर घर में महिलाओं के लिए नए नियम कानून की जानकारी दे रहे हैं. वैसे आंख वाला फ़रमान तो बग़दादी की सनक का सिर्फ़ एक हिस्सा भर है. असल में फरमानों की फेहरिस्त बहुत लंबी है. इसके मुताबिक महिलाएं यहां. बिना बुर्के के बाहर नहीं निकल सकतीं. हाथों में ग्लव्ज़ और पैरों में मोज़े भी ज़रूरी हैं.

यदि कोई महिला बगदादी के इन नियम कायदों को तोड़ती हुई पाई जाती है तो उसकी सज़ा क्या है. जानकारी के मुताबिक अगर बगदादी की पुलिस किसी भी महिला को ड्रेस कोड का उल्लंघन करती पकड़ती है, तो उसके पति या पिता की आईडी पर एक नोटिस आती है. ये नोटिस होती है आतंक की अदालत की, जहां वकील भी बगदादी के होते हैं और दलील भी. कुल मिलाकर सज़ा ऐसी दर्दनाक होती है कि फिर कोई महिला ऐसी गलती करती दिखाई न दे. मोसुल में बगदादी की इस दर्दनाक सज़ाओं की कई कहानियां है, जो दिल दहला देती हैं.

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