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आखिर बेटी ने क्‍यों ली अपने ही पिता की जान?

दिल्ली की एक खबर ने हर एक को सन्न करके रख दिया है. हर किसी के जेहन में बस एक ही बात कौंध रही है कि आखिर कोई बेटी अपने बाप का कत्ल इस बेरहमी से कैसे कर सकती है?

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पूरी तरह नहीं सुलझ सकी है कत्‍ल की गुत्‍थी
पूरी तरह नहीं सुलझ सकी है कत्‍ल की गुत्‍थी

दिल्ली की एक खबर ने हर एक को सन्न करके रख दिया है. हर किसी के जेहन में बस एक ही बात कौंध रही है कि आखिर कोई बेटी अपने बाप का कत्ल इस बेरहमी से कैसे कर सकती है? कोई बेटी कत्ल के बाद सिर्फ मौत की तस्दीक करने के लिए अपने बाप के सीने को चीर कर उसके दिल में लगा पेसमेकर कैसे निकाल सकती है? मगर अब इस सनसनीखेज कत्ल के बाद जो सच सामने आ रहा है, वो और भी चौंकाने वाला है.

कत्ल की ना मालूम कितनी वारदातें हुई होंगी. रिश्तों के भी ना जाने कितने कत्ल हुए होंगे. मगर इस एक कत्ल ने इस कत्ल की कहानी सुनने वाले हर शख्स को झकझोर कर रख दिया है. सीने में खंजर उतारकर कइयों को मौत के घाट उतारा गया. मगर यहां एक बेटी बाप के सीने में पहले खंजर उतारती है, फिर सीना चाक करती है. इसके बाद उस सीने के अंदर दिल को धड़का रहे पेस मेकर को बाहर निकाल लेती है, ताकि बाप खंजर के वार से बच भी जाए, तो भी ज़िंदा बचने की कोई गुंजाइश ना रहे.

दिल्ली के ख्याला इलाके में पुलिस ने जब 56 साल के दलजीत के क़त्ल की मिस्ट्री को सुलझाया तो उसके होश ही उड़ गए. दरअसल ये क़त्ल किसी और ने नहीं, बल्कि घर की छोटी बेटी ने किया था. अपने ही हाथों अपने पिता की क़त्ल करने की साज़िश में उसका साथ उसके दो दोस्तों ने दिया था.

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पुलिस तफ्तीश में इस बात का खुलासा हुआ कि कुलविंदर ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर अपने पिता की हत्या की है और उसने हत्या की साज़िश एक क्राइम शो देख कर बनाई. बकौल पुलिस अपने पिता के साथ राजौरी गार्डन इलाके में अकेली रहती थी. उसकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी है, जबकि मां की मौत तीन साल पहले हो चुकी है. मां की मौत के बाद वो घर में अकेली रह गई थी. उसके इसी अकेलेपन का फायदा उसके पिता ने उठाया. कुलविंदर के मुताबिक, उसका पिता उसका यौन शोषण करने लगा, जिसकी वजह से वो बेहद परेशान थी. उसने ये बात अपने दोस्तों को बताई. कुलविंदर का एक दोस्त प्रिंस संधु टैटू बनाने का काम करता था, जबकि उसका दूसरा दोस्त अशोक राजौरी गार्डन इलाके के ही एक मॉल में काम करता था. तीनों ने मिलकर कत्ल की साजिश रची.

साजिश के तहत 29 अप्रैल की रात को कुलविंदर का इशारा मिलते ही दोनों लड़के उसके घर पहुंच गए. इसके बाद तीनों ने मिलकर कुलविंदर के पिता का क्रिकेट के विकेट से पीट-पीटकर कत्ल कर दिया. फिर तसल्ली करने के लिए कि बाप सचमुच मर चुका है, कुलविंदर ने धारदार हथियार से अपने पिता के सीने पर कई वार किए और सीने में लगा पेसमेकर बाहर निकाल दिया.

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पुलिस तफ्तीश में तीनों ने अपना गुनाह भी कबूल कर लिया है. लेकिन क़ातिलों के इकबाल-ए-जुर्म के बाद एक सवाल खड़ा होता है कि कुलजीत सिंह के क़त्ल की जो कहानी कुलविंदर और उसके दोस्तों ने बताई है, क्या वो सच है या फिर इसके पीछे की कहानी कुछ और है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं. दरअसल ये बात मकतूल की बड़ी बेटी और कुलविदंर की बड़ी बहन कह रही है. उसके मुताबिक उसके पिता ऐसा घिनौना काम नहीं कर सकते हैं और उसकी बहन झूठ बोल रही है. उसके मुताबिक पिता महीनों घर से बाहर रहा करते थे.

अब सवाल उठता है कि जो अमरजीत का कहना है, अगर वो सच है तो फिर कुलविंदर ने अपने पिता के बारे में पुलिस को झूठ क्यों बताया? दूसरा सवाल, क्या पकड़े जाने के बाद कुलविंदर और उसके दोनों दोस्तों ने सज़ा से बचने के लिए यौन शोषण की कहानी बनाई? तीसरा सवाल, अगर दलजीत सिंह कुलविंदर का यौन शोषण कर रहा था तो फिर उसने ये बात अपनी बड़ी बहन को क्यों नहीं बताई? चौथा सवाल, अगर कुलविंदर का आरोप सही है और किसी वजह से वो यौन शोषण की बात अपनी बहन से नहीं कर सकती थी तो फिर उसने इस मामले में पुलिस की मदद क्यों नहीं ली? पांचवा सवाल ये कि तफ्तीश के दौरान कुलविंदर ने आखिर क्यों पुलिस को हर कदम पर गुमराह करने की कोशिश की या फिर कुछ ऐसी तो बात नहीं थी जिसकी वजह से दलजीत सिंह कुलविंदर को रोकते-टोकते थे और कुलविंदर को अपने पिता का ऐसा करना पसंद नहीं था और इसके चलते उसने अपने दोनों दोस्तों के साथ मिलकर अपने पिता का क़त्ल कर दिया?

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पुलिस भले ही इस केस को सुलझाने का दावा करे, लेकिन अगर कुलविंदर की की बड़ी बहन का कहना सही है तो फिर पुलिस को दलजीत सिंह के क़त्ल की असली वजह का सच तलाशने के लिए एक बार फिर से इस केस की तफ्तीश करनी पड़ेगी.

देखने में ये मामला जितना आसान दिखता है, असलियत में ये उतना था नहीं. पुलिस को शुरुआत से ही क़ातिलों ने उलझाने और गुमराह करने की पूरी कोशिश की थी. लेकिन वो ये भूल गए कि क़ातिल कितना भी चालाक क्यों ना हो वो एक ग़लती कर बैठता है जो उसे क़ानून की गिरफ्त में पहुंचा देती है. इस केस में भी क़ातिल कदम-कदम पर गलतियां करते चले गए और आखिर में अपने ही बुने जाल में उलझ गए.

तारीख़: 30 अप्रैल 2014, दिन: बुधवार, वक़्त: सुबह के 6.35 बजे. दिल्ली के ख्याला पुलिस स्टेशन में एक कॉल आती है. ये कॉल पुलिस कंट्रोल रूम हैडक्वार्टर से थी. कॉल रिसीव करनेवाला एक कांस्टेबल फ़ौरन थाना इंचार्ज को बताता है कि इलाके में एक बुजुर्ग की लाश मिली है लेकिन उसकी पहचान नहीं हो पा रही है.

मामला क़त्ल का था. लिहाज़ा थाने से एक पुलिस टीम फ़ौरन मौका-ए-वारदात की तरफ रवाना हो जाती है. मौके पर फॉरेंसिक टीम भी बुलाई जाती है. पुलिस लाश के कपड़ों की तलाशी लेती है. लेकिन उसके हाथ कुछ भी नहीं लगता. इसके अलावा पुलिस को ना तो मकतूल का मोबाइल मिलता है, ना ही पर्स या फिर कोई और ऐसा कागज़ात, जिससे की उसकी पहचान हो पाती. पहली नज़र में पुलिस को ये मामला लूट के लिए क़त्ल का लगता है.

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मामला संगीन था. और पुलिस की जांच लाश की पहचान पर टिकी हुई थी, इसीलिए पुलिस ने मकतूल के चेहरे का फोटो इलाके के हर थाने में लगवा दी.

दो दिन बीत जाने के बाद ख्याला पुलिस स्टेशन में राजौरी गार्डन थाने से फोन आता है और उन्हें बताया जाता है कि मरने वाले की पहचान हो गई है. ख्याला पुलिस की एक टीम राजौरी गार्डन थाने पहुंचती है. वो वहां थाने में मौजूद दो रोती हुई बहनों बताती हैं कि ये उनके पिता दलजीत की तस्वीर है और वो 29 अप्रैल से लापता है. दोनों बहनें उन्ही की गुमशदगी की इत्तिला थाने में देने आई थी.

दरअसल ये दोनों बहने अमरजीत और कुलविंदर ही थीं. पुलिस को पता चलाता है की दलजीत पेशे से ड्राइवर था और अपनी छोटी बेटी कुलविंद के साथ रहता था. कुलविंदर ने ही ने पुलिस को बताया कि उसके पिता को 29 तारीख की सुबह 5.00 बजे किसी का फोन आया था जिसके बाद वो घर से निकल गए थे. उसी ने पुलिस को ये भी बताया कि दलजीत काम के सिलसिले में अक्सर हफ्तों तक घर से बाहर रहते थे.

पुलिस दोनों बहनों के बयान के आधार पर अपनी तफ्तीश आगे बढ़ाती है. लेकिन अपनी जांच के दौरान उसे ये पता चलता है कि मकतूल का क़त्ल रात 3:30 बजे से 4 बजे के बीच हुआ है. लेकिन जब पुलिस दलजीत के कॉल डिटेल निकल वाती है, तो उसे ये पता चलता है कि मकतूल को सुबह 5 बजे कोई फोन नहीं आया था. अलबत्ता दलजीत का फोन तो सुबह 4 बजे के बाद से ही स्विच ऑफ हो गया था. इतना ही नहीं तफ्तीश के दौरान पुलिस को दलजीत के मालिक ने बताया कि दलजीत को उस रोज़ कहीं नहीं जाना था.

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इस बात पर पुलिस का माथा ठनका कि आखिर कुलविंदर झूठ क्यों बोल रही है. बस पुलिस ने कुलविंद की कॉल डिटेल्स निकलवाई तो उसके दो दोस्तों के नंबर आए, जिनसे उसकी रोज़ाना बात हो रही थी. इतना ही नहीं जब पुलिस ने कुलविंदर और उसके दोस्तों के मोबाइल नंबरों की लोकेशन मैपिंग करवाई तो उसके सामने कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. मसलन 29 अप्रैल की रात कुलविंदर और उसके दोनों दोस्तों- प्रिंस और अशोक की लोकेशन दलजीत के घर पर दिखाई दी. इतना ही नहीं जिस जगह से दलजीत सिंह की लाश मिली थी, इन तीनों के मोबाइल लोकेशन भी वहां दिखाई दी.

इसके बाद पुलिस ने कुलविंदर से पूछताछ करनी शुरू की. पहले-पहल तो कुलविंदर ने पुलिस को भटकाने की काफी कोशिश की. लेकिन जब उसने कुलविंदर से सख्ती से पूछताछ की, तो वो टूट गई और उसने इकबाल-ए-जुर्म कर लिया. लेकिन उसने क़त्ल की जो कहानी पुलिस को बताई, उसे सुनकर वो भी चौंक गई.

कातिल पुलिस के सामने था और उसने जो कहानी पुलिस को बताई उसे सुनकर वो भी चौंक गई. लेकिन अब उसे ये पता लगाना है कि क़ातिल ने क़त्ल की जो वजह उसे बताई है, वो सच है या फिर इस क़त्ल के पीछे का मकसद कुछ और ही है.

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कुलविंदर ने पुलिस को बताया कि वो अपने पिता के साथ राजौरी गार्डन के मकान में अकेली रहती थी. उसकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी थी और तीन साल पहले उसकी मां की मौत हो गई थी. कुलविंदर ने पुलिस को बताया कि उसका पिता उसका यौन शोषण करने लगा, जिसकी वजह से वो बेहद परेशान रहा करती थी. जब एक दिन उसके सब्र का बांध टूट गया, तो उसने अपनी कहानी अपने दो दोस्तों- प्रिंस और अशोक को बताई. इसके बाद तीनों ने मिलकर दलजीत के क़त्ल का प्लान बनाया और अपने मौके को अंजाम तक पहुंचाने के लिए सही वक्त का इंतजार करने लगे.

कुलविंदर और उसके दोस्त दलजीत के क़त्ल के लिए सही मौके का इंतजार कर रहे थे और उन्हें ये मौका मिला 29 अप्रैल की रात 3.00 बजे. कुलविंदर का इशारा मिलते ही प्रिंस और अशोक घर के अंदर पहुंच गए. तीनों ने घर में घुसते ही पहले सोते हुए दलजीत पर किक्रेट की विकेट से करीब बीस बार वार किया. इसी दौरान उनसे पास में रखे टीवी के स्टैंड का शीशा भी टूट गया. कुलविंदर को पता था उसके पिता के सीने में पेसमेकर लगा हुआ है और इसीलिए कुलविंदर ने अपने पिता की मौत की तस्दीक करने के लिए टूटे हुए शीशे को हथियार बनाकर बड़ी ही बेहरमी से अपने पिता के सीने को काट उसके दिल में लगे पेसमेकर को बाहर खींच लिया.

तीनों का प्लान कामयाब हो चुका था. अब बारी थी गुनाह के निशानों को मिटाने की. पुलिस को उन पर शक ना हो इसलिए उन्होंने दलजीत की लाश को गाड़ी में रखा और ख्याला इलाके के एक नाले के पास ले जाकर फेंक दिया. पुलिस को गुमराह करने के इरादे से मकतूल के पेसमेकर को टैगौर गार्डन के पास फेंक दिया.

पुलिस ने आरोपियों के पास से हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार के अलावा आरोपियों के खून से सने कपड़े और वो भी गाड़ी भी बरामद कर ली है, जिसका इस्तेमाल उन्होंने शव को ठिकाने लगाने के लिए किया था.

लेकिन रिश्तों के क़त्ल में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वाकई दलजीत अपनी बेटी का यौन शोषण करता था, जिसकी वजह से कुलविंदर ने अपने पिता का क़त्ल कर दिया या फिर वो पकड़े जाने के बाद बचने के लिए झूठ बोल रही है? पुलिस की तफ्तीश में इतना तो साफ हो गया है कि क़त्ल कुलविंदर और उसके दोस्तों ने मिलकर किया है, लेकिन क़त्ल का के पीछे की असल मकसद क्या है, ये साफ नहीं हो पाया है.

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