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दूसरी वैक्सीन से कितनी अलग है रूस की Sputnik-V? क्या हैं इसके साइड इफेक्ट्स? जानें

भारत में कोरोना की अब एक और नई वैक्सीन आ गई है. सोमवार को ड्रग कंट्रोलर ने रूसी वैक्सीन Sputnik-V के इमरजेंसी यूज की मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही कोवैक्सीन और कोविशील्ड के बाद Sputnik-V तीसरी वैक्सीन है, जिसे भारत ने मंजूरी दी है. लेकिन इस वैक्सीन में क्या खास है? इसकी कीमत क्या हो सकती है? आइए जानते हैं....

Sputnik-V को मंजूरी देने वाला 60वां देश है भारत. (फाइल फोटो-PTI) Sputnik-V को मंजूरी देने वाला 60वां देश है भारत. (फाइल फोटो-PTI)
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स्टोरी हाइलाइट्स
  • 92% एफिकेसी है Sputnik-V की
  • करीब 10 डॉलर हो सकती है कीमत

देश में बढ़ते कोरोना के मामलों के बीच एक अच्छी खबर आई है. वो ये कि भारत को कोरोना से लड़ाई के लिए एक और वैक्सीन मिल गई है. सोमवार को सेंट्रल ड्रग्स अथॉरिटी ने रूस की वैक्सीन Sputinik-V के इमरजेंसी यूज की मंजूरी दे दी है. कोवैक्सीन और कोविशील्ड के बाद ये तीसरी वैक्सीन है, जिसे मंजूरी मिली है. भारत दुनिया का 60वां देश है जिसने Sputinik-V को मंजूरी दी है. कोरोना संक्रमण के खिलाफ रूसी वैक्सीन Sputinik-V की एफिकेसी फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्ना की वैक्सीन के बाद सबसे ज्यादा 91.6% है. 

क्या कहता है वैक्सीन का डेटा?
साइंस जर्नल लैंसेट के मुताबिक, 60 साल से ऊपर के लोगों पर जब Sputnik-V का ट्रायल किया गया, तो पहला डोज लगने के 21 दिन बाद तक उन लोगों में कोरोना के गंभीर या मध्यम लक्षण नहीं दिखाई दिए और इस एज ग्रुप में इसकी एफिकेसी रेट 91.8% दर्ज की गई थी. इस तरह से ये नतीजा निकाला गया कि कोरोना के गंभीर या मध्यम मरीजों के खिलाफ वैक्सीन 100% कारगर है. इसके अलावा रूस में 18 साल से ऊपर के 20 हजार से ज्यादा वॉलेंटियर्स पर इसके फेज-3 ट्रायल्स किए गए थे. कुल मिलाकर ये सामने आया था कि कोरोना के खिलाफ वैक्सीन 91.6% प्रभावी है. भारत में 1,300 वॉलेंटियर्स पर इसके फेज-3 ट्रायल किए गए हैं. इसके नतीजे जून 2021 तक सामने आने की बात कही जा रही है.

इसको स्टोर कहां किया जा सकता है?
वैक्सीन को लेकर सबसे बड़ी दिक्कत उसके स्टोरेज को लेकर होती है. लेकिन रूसी वैक्सीन के साथ ऐसी ज्यादा दिक्कत भी नहीं है. Sputnik-V के साथ अच्छी बात ये है कि इसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर स्टोर किया जा सकता है, जो मौजूदा कोल्ड चेन सप्लाई में आसानी से उपलब्ध है. यानी, इसके लिए कोल्ड-चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर में खर्च करने की जरूरत भी नहीं है.

इसकी कीमत क्या हो सकती है?
अभी इसकी कीमत को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है. लेकिन माना जा रहा है कि Sputnik V वैक्सीन की एक डोज की कीमत 10 डॉलर से भी कम हो सकती है. जो मौजूदा वैल्यू के हिसाब से 750 रुपए के आसपास होते हैं. वहीं, हमारे देश में अभी जो कोविशील्ड और कोवैक्सीन मिल रही है, उसकी एक डोज की कीमत 250 रुपए है, जबकि सरकारी अस्पतालों में ये फ्री लगाई जा रही है.

ये वैक्सीन काम कैसे करती है?
इस वैक्सीन का एक डोज 0.5 मिली का है, जो इम्युनिटी बूस्ट करता है. लेकिन रूस की ये वैक्सीन कई मायनों में दूसरी वैक्सीन से अलग है. कोविशील्ड की तरह ही ये वैक्सीन एडेनोवायरस वेक्टर से बनी है, लेकिन इसके दोनों डोज के वेक्टर अलग-अलग हैं. Sputnik-V वैक्सीन का पहला डोज rAD26 पर आधारित है, जबकि दूसरा डोज rAD5 पर आधारित है. लेकिन, ये दोनों ही वेक्टर कोरोनावायरस के खिलाफ पर्याप्त एंटीबॉडी तैयार करते हैं. ये दोनों वेक्टर कोविड-19 के लिए जिम्मेदार 'स्पाइक' प्रोटीन को टारगेट करते हैं और उसे खत्म करते हैं. दोनों डोज में अलग-अलग वेक्टर इस्तेमाल करने के पीछे तर्क है कि इससे ज्यादा लंबे वक्त के लिए एंटीबॉडी तैयार हो सकती है.

क्या इसके कोई साइड इफेक्ट भी हैं?
इस वैक्सीन को लेकर अभी तक कोई गंभीर साइड इफेक्ट सामने नहीं आए हैं. हालांकि, वैक्सीन लगने के बाद सामान्य बुखार, दर्द, थकान जैसे आम साइड इफेक्ट दिख सकते हैं. लेकिन इससे कोई गंभीर बीमारी या मौत का मामला सामने नहीं आया है. लैंसेट में छपे डेटा की मानें तो जिन 19,866 वॉलेंटियर्स को Sputnik-V के दोनों डोज दिए गए थे, उनमें से सिर्फ 70 लोगों को ही गंभीर साइड इफेक्ट दिखे थे. इनमें से भी 23 ऐसे थे जो प्लेसिबो ग्रुप से थे, यानी ये लोग ट्रायल में थे, लेकिन इन्हें वैक्सीन नहीं लगी थी. ट्रायल के दौरान 4 वॉलेंटियर्स की मौत भी हुई थी, लेकिन ये वो लोग थे जिन्हें पहले से ही कोई गंभीर बीमारी थी. 

भारत में कौन बनाएगा ये वैक्सीन?
जिस तरह से ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजैनेका की वैक्सीन को सीरम इंस्टीट्यूट बना रहा है, उसी तरह रूसी वैक्सीन को भी भारत की डॉ. रेड्डी लैब बनाएगी. Sputnik-V को रूस के गामालेया इंस्टीट्यूट ने रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) की फंडिंग से बनाया है. भारत में Sputnik-V ने हैदराबाद की ड़ॉ. रेड्डी लैब्स के साथ मिलकर ट्रायल किया है और इसके प्रोडक्शन का काम भी डॉ. रेड्डी लैब्स ही कर रही है. डॉ. रेड्डी लैब के अलावा RDIF ने 5 भारतीय कंपनियों के साथ वैक्सीन के प्रोडक्शन को लेकर टाई-अप किया है. इसके तहत सालभर में Sputnik-V के 40 से 50 करोड़ डोज बनाए जाएंगे. वहीं, दुनिया की बात करें तो वैक्सीन के प्रोडक्शन को लेकर RDIF ने 10 से ज्यादा देशों की कंपनियों के साथ करार किया है, ताकि सालभर में 70 करोड़ से ज्यादा डोज तैयार किए जा सकें.

किन देशों में इस्तेमाल हो रही है Sputnik-V?
Sputnik-V दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन है, जिसे पिछले साल 12 अगस्त को रूसी सरकार ने इमरजेंसी यूज की मंजूरी दी थी. अब तक इस वैक्सीन का इस्तेमाल 59 देशों में हो रहा है. भारत 60वां देश है, जिसने Sputnik-V के इस्तेमाल को मंजूरी दी है. Sputnik-V वैक्सीन का इस्तेमाल करने वाले देशों में अर्जेंटिना, बोलीविया, सर्बिया, अल्जीरिया, फिलीस्तीन, म्यांमार, पाकिस्तान, मंगोलिया, बहरीन, उज्बेकिस्तान, सैन-मरीनो, सीरिया, किर्गीस्तान, इजिप्ट, होंडुरस, ग्वाटेमाला, मालडोवा, स्लोवाकिया, अंगोला, श्रीलंका, इराक, केन्या, मोरक्को, जॉर्डन, सेशेल्स, मॉरीशस, वियतनाम, माली और पनामा समेत 59 देश शामिल हैं.

 

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