scorecardresearch
 

अब सबके लिए खुद टीका खरीदेगी मोदी सरकार, वैक्सीनेशन ऐसे पकड़ेगा रफ्तार!

पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश के नाम अपने संदेश में ऐलान किया कि केंद्र सरकार खुद ये वैक्सीन खरीदकर राज्यों को उपलब्ध कराएगी. राज्यों को इसके लिए पैसा खर्च नहीं करना होगा. 

वैक्सीनेशन की रफ्तार होगी तेज (फाइल फोटो) वैक्सीनेशन की रफ्तार होगी तेज (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राज्यों को इसके लिए पैसा खर्च नहीं करना होगा
  • जून के पहले सप्ताह से टीकाकरण ने पकड़ी रफ्तार

मोदी सरकार ने देश के हर नागरिक को कोरोना का टीका मुफ्त लगवाने की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है. अब तक 18 से 45 साल तक की उम्र के लोगों को राज्य सरकारें ये वैक्सीन लगवा रही थीं. लेकिन राज्यों की ओर से लगातार ये शिकायत थी कि उनके पास पर्याप्त वैक्सीन नहीं है और वैश्विक कंपनियों ने उनसे इस बारे में डील करने से इनकार कर दिया है. अब पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश के नाम अपने संदेश में ऐलान किया कि केंद्र सरकार खुद ये वैक्सीन खरीदकर राज्यों को उपलब्ध कराएगी. राज्यों को इसके लिए पैसा खर्च नहीं करना होगा. 

पीएम मोदी के इस ऐलान के बाद पटरी से उतरते दिख रहे भारत के वैक्सीनेशन प्रोग्राम के फिर रफ्तार पकड़ने की उम्मीद बंधी है. देश में जोर-शोर से शुरू किए गए वैक्सीनेशन प्रोग्राम की मई के पहले तीन सप्ताहों में रफ्तार सुस्त रही. हालांकि अच्छी बात यह है कि जून के पहले सप्ताह से टीकाकरण ने रफ्तार पकड़ ली. 31 मई को जहां 28 लाख टीके लगाए गए वहीं 1-2 जून को 24-24 लाख, 3 जून को 29 लाख, 4 जून को 36.5 लाख और 5 जून को 33.5 लाख टीके लगाए गए.

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में साफ कहा कि भारत सरकार ने कोविड-19 से लड़ने के लिए वैक्सीनेशन का प्रोग्राम शुरू किया था लेकिन कुछ राज्य सरकारों ने वैक्सीन खरीदने का जिम्मा राज्यों को देने की मांग रखी. हालांकि दो हफ्ते बाद ही इन्हीं राज्य सरकारों की ओर से पहले की नीति को ही जारी रखने की डिमांड होने लगी. कई मुख्यमंत्रियों ने इस बारे में पत्र लिख कर मांग की.

तीसरी लहर बच्चों के लिए कितनी घातक, इस पर कोई डेटा नहीं: डॉ. गुलेरिया 

गौरतलब है कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ऐसा करने वाले सबसे पहले प्रशासक थे. उन्होंने 15 मई को इस बारे में पत्र लिखा. इसके बाद केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने 24 मई को चिट्ठी लिखी. फिर सिक्किम, मिजोरम, मेघालय, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडीशा, त्रिपुरा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों ने भी ऐसा ही किया. इनमें से कई मुख्यमंत्रियों ने स्पष्ट मांग की कि वैक्सीन खरीद का काम केंद्र सरकार पहले की तरह अपने हाथों में ले ले. इसके बाद एक जून को पीएम नरेंद्र मोदी को प्रजेंटेशन दिया गया और उन्होंने केंद्रीकृत मुफ्त टीका नीति को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी.

दिसंबर तक कितनी वैक्सीन?
अगर वैक्सीन के हिसाब से गणना करें तो कोवीशील्ड की 50 करोड़ खुराक, कोवैक्सीन की 38.6 करोड़ खुराक, बायो ई सब यूनिट वैक्सीन की 30 करोड़ खुराक, ज़ायडस कैडिला डीएनए वैक्सीन की पांच करोड़ खुराक और स्पूतनिक-वी की 5 करोड़ खुराक मिला कर दिसंबर तक 133.6 करोड़ खुराक का इंतजाम होगा. अगर जनवरी से अभी तक की खुराक मिला दें तो इस तरह दिसंबर 2021 तक भारत में अलग-अलग टीकों की 187.2 करोड़ खुराक उपलब्ध होंगी.

वैक्सीन की बर्बादी
वैक्सीन की कमी के बीच इसकी बर्बादी का मसला भी उठा. स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक कुछ राज्यों में यह बर्बादी दस प्रतिशत से भी अधिक है. कोविन प्लेटफॉर्म पर डाले गए राज्य सरकारों के ही आंकड़े बताते हैं कि एक मई से 31 मई के बीच झारखंड में 33.95% और छत्तीसगढ़ में 15.79% टीकों की बर्बादी हुई. हालांकि दोनों ही राज्य इससे इनकार करते हुए वैक्सीन की बर्बादी काफी कम होने की बात कहते रहे हैं और कोविन प्लेटफॉर्म की तकनीकी गड़बड़ी के चलते आंकड़े अपडेट नहीं होने का दावा कर रहे हैं. इनके अलावा मध्य प्रदेश, पंजाब में सात प्रतिशत से अधिक बर्बादी हुई. आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में यह आंकड़ा तीन प्रतिशत से अधिक है.

कितना खर्च?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक मई, जून और जुलाई में 16 करोड़ खुराक के लिए 2,520 करोड़ रुपये दिए गए. इसके लिए पांच मई को ऑर्डर दिया गया. यह रकम घरेलू बजट सपोर्ट (डीबीएस) से आवंटित की गई है. इसमें प्रति खुराक के लिए 150 रुपये और जीएसटी अतिरिक्त चुकाया गया है. इसमें कोविशील्ड और कोवैक्सीन दोनों शामिल हैं. जबकि मार्च से मई तक के लिए 12 करोड़ खुराक का ऑर्डर 12 मार्च को दिया गया था. यह ऑर्डर 1,890 करोड़ रुपये का था और रकम डीबीएस से आवंटित की गई. इनमें दस करोड़ कोविशील्ड और दो करोड़ कोवैक्सीन शामिल है जो प्रति खुराक 150 रुपये और जीएसटी अतिरिक्त में खरीदी गई. इस ऑर्डर में से 96.83% की आपूर्ति हो चुकी है. जबकि पीएम केयर्स फंड से 6.6 करोड़ खुराक खरीदी गईं. इनमें कोविशील्ड 5.6 करोड़ और कोवैक्सीन की एक करोड़ खुराक है. इसके लिए 1,392.82 करोड़ रुपये चुकाए गए. 

इसमें कोवीशील्ड की एक खुराक 200+ जीएसटी और कोवैक्सीन 295+ जीएसटी (30% मुफ्त) ली गई. ये सभी खुराक मिल चुकी हैं और इन्हें प्रयोग में लाया जा चुका है. इसके अलावा गावी कोवैक्स फैसिलिटी से कोविशील्ड की एक करोड़ खुराक मिलीं जिन्हें इस्तेमाल में लाया जा चुका है. साथ ही, राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों ने भी वैक्सीन की सीधी खरीद की. इसके जरिए कोविशील्ड की 11 करोड़, कोवैक्सीन की पांच करोड़ और स्पूतनिक-वी की दो करोड़ खुराक खरीदी गईं. इसमें स्पूतनिक वी के पहले कंपोनेंट की 31.5 लाख और दूसरे कंपोनेंट की 60 हजार खुराक मिल चुकी हैं. इस तरह अब तक 53.6 करोड़ खुराक ली गई हैं.

ये भी पढ़ें

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें