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कोरोना संकट: भारत चीन से नहीं खरीदेगा पीपीई, क्वालिटी को लेकर उठे सवाल!

कोरोना वायरस की जांच में इस्तेमाल होने वाले उपकरण या स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा किट पर उठे सवाल को लेकर चीन ने कहा है कि ऐसे सामान उन्हीं कंपनियों से आयात किए जाएं जिन्हें चीन सरकार की ओर से इजाजत मिली हो.

पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट से जांच करते स्वास्थ्यकर्मी (फोटो-PTI) पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट से जांच करते स्वास्थ्यकर्मी (फोटो-PTI)

  • 650,000 टेस्टिंग किट्स चीन से भारत आए
  • 55 देशों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की आपूर्ति

भारत दुनिया के तमाम देशों से चिकित्सा उपकरण, टेस्टिंग किट और पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) खरीदकर कोरोना वायरस महामारी से लड़ने के विभिन्न विकल्पों पर काम कर रहा है.

सूत्रों ने बताया कि चीन के गोंगझाउ एयरपोर्ट से गुरुवार को कोरोना वायरस के इलाज में इस्तेमाल होने वाली किट्स की खेप भारत पुहंची. इस खेप में 650,000 टेस्टिंग किट्स शामिल हैं. चीन से भारत के लिए आई इस खेप में रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट और आरएनए एक्सट्रैक्शन किट्स भी शामिल हैं.

सूत्र ने बताया, 'इन प्रयासों के तहत, रैपिड एंटीबॉडी टेस्टिंग किट्स (गुआंगझोउ वोंडफो से पहली बार 3 लाख और झुहाई लिवज़ोन से 2.5 लाख) और आरएनए एक्सट्रैक्शन किट (एमजीआई शेन्ज़ेन से 1 लाख), भारत आया है. यानी कुल 6.5 लाख किट गुरुवार को भारत पहुंचा. बीजिंग में हमारे दूतावास और गुआंगझोउ में वाणिज्य दूतावास ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.'

इन देशों से मिलेंगे टेस्टिंग किट्स

सूत्र ने बताया कि दक्षिण कोरिया से भी टेस्टिंग किट आ रहा है. सूत्रों के मुताबिक इस सिलसिले में ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा, अमेरिका, मलेशिया, जर्मनी और जापान से भी कोटेशन मिले हैं. अन्य देशों को महामारी से लड़ने में मदद करने के लिए, भारत ने उन देशों की तीन सूचियों का एक सेट तैयार किया जिन्हें मलेरिया-रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की आपूर्ति की जानी है.

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भारत इन देशों की कर रहा मदद

भारत भी कोरोना की महामारी से निपटने में दुनिया के कई देशों की मदद कर रहा है. भारत 55 देशों को को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की आपूर्ति कर रहा है. इनमें अफगानिस्तान, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल, मालदीव, मॉरीशस, सेशेल्स, श्रीलंका, डोमिनिकन गणराज्य, मेडागास्कर, म्यांमार, जाम्बिया, युगांडा, बुर्किना फासो, नाइजर, माली, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक कांगो, मिस्र, आर्मेनिया, कजाकिस्तान, इक्वाडोर, जमैका, जमैका मार्शल आइलैंड्स, सीरिया, यूक्रेन, इस्वातिनी, चाड, रिपब्लिक ऑफ कांगो, सेनेगल, सिएरा लियोन, जिम्बाब्वे, फ्रांस, जॉर्डन, केन्या, नीदरलैंड्स, नाइजीरिया, ओमान, पेरू, फिलीपींस, रूस, स्लोवेनिया, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, संयुक्त अरब अमीरात, उजबेकिस्तान , उरुग्वे, कोलंबिया, अल्जीरिया, बहामास, बोलीविया, गुयाना, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश शामिल हैं.

पीपीई की खरीद नहीं की जाएगी

दिलचस्प बात यह है कि सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया है कि चीन से भले ही टेस्टिंग किट आ रहे हैं, लेकिन उससे पीपीई की खरीद नहीं की जाएगी. बताया जा रहा है कि चीन के कई PPE खराब निकले हैं और मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं. हालांकि एक अन्य सू्त्र ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि पीपीई की बड़ी खेप भारत आ रही है. यह टेस्टिंग किट के बराबर ही बताए जा रहे हैं.

खराब गुणवत्ता की रिपोर्ट की खारिज

वहीं नई दिल्ली में चीनी दूतावास ने इन रिपोर्टों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वे मेडिकल उत्पादों के निर्यात को बहुत महत्व देते हैं. चीनी दूतावास की तरफ से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक चीन ने हाल ही में इस संबंध में कड़े नियम बनाए हैं. इस तरह के उत्पादों के निर्यात से पहले कंपनी को स्टेट फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से सर्टिफिकेट लेना होता है. गुणवत्ता मानक को लेकर निर्यात किए जाने वाले देश से अनुमति मिलने के बाद ही सामान को भेजा जाता है. कुछ अन्य देशों के साथ ही भारत ने भी राजनयिक चैनल के जरिये अपनी मांग रखी है और हमने योग्य कंपनियों को इसके लिए रिकमंड किया है.

बयान में कहा गया है, 'हमें उम्मीद है कि विदेशी खरीदार चीनी नियामक प्राधिकरणों द्वारा प्रमाणित उत्पादों का चयन करेंगे और संबंधित उत्पादों का आयात करते समय उत्पादन की गुणवत्ता को परखेंगे.'

बता दें कि इस बीच दुनिया भर के कई देशों ने चीन से मंगाए जाने वाले सामान पर घटिया क्वालिटी के होने का आरोप लगाया है. हालांकि भारत की तरफ से ऐसी कोई शिकायत सामने नहीं आई है लेकिन यूरोप के कई देशों ने इस पर चिंता जताई है. कोरोना वायरस की जांच में लगने वाले उपकरण या स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा किट पर उठे सवाल को लेकर चीन ने कहा है कि ऐसे सामान उन्हीं कंपनियों से आयात किए जाएं जिन्हें चीन सरकार की ओर से इजाजत मिली हो. इन कंपनियों में घटिया सामान होने की संभावना कम है. चीन ने यह भी कहा है कि जिन कंपनियों पर आरोप सही पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

(मिलन शर्मा के इनपुट के साथ)

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