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ब्राजील और साउथ अफ्रीकी कोरोना वेरिएंट की भारत में एंट्री, जानिए कितना खतरनाक?

जिन 4 लोगों में कोरोना का दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन पाया गया है उनमें से दो लोग अंगोला और तंजानिया से लौटे थे, जबकि बाकी दो दक्षिण अफ्रीका से आए थे. ये चारों लोग जनवरी में भारत लौटे थे. 

5 यात्रियों में मिला दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील का स्ट्रेन (फाइल फोटो-PTI) 5 यात्रियों में मिला दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील का स्ट्रेन (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 4 यात्रियों में मिला दक्षिण अफ्रीका का कोरोना स्ट्रेन
  • ब्राजील से लौटा एक यात्री नए कोरोना स्ट्रेन से संक्रमित
  • युवा लोग भी हो चुके हैं नए कोरोना स्ट्रेन से संक्रमित

कोरोना वायरस पर काबू की स्थिति के बीच देश में इस वायरस का नया रूप पाया गया है. कोरोना का ये नया स्ट्रेन दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील से आए लोगों में पाया गया है. 4 लोगों में दक्षिण अफ्रीकी और एक शख्स में ब्राजील वेरिएंट पाया गया है. कोरोना के ये नए वेरिएंट सामने आने के बाद सरकारें भी अलर्ट हो गई हैं. 

क्या है दक्षिण अफ्रीकी वेरिएंट?

जिन 4 लोगों में कोरोना का दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन पाया गया है उनमें से दो लोग अंगोला और तंजानिया से लौटे थे, जबकि बाकी दो दक्षिण अफ्रीका से आए थे. ये चारों लोग जनवरी में भारत लौटे थे. 
ICMR के डायरेक्टर जनरल बलराम भार्गव ने नए कोरोना वायरस की जानकारी देते हुए बताया है कि SARS-CoV-2 के दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन को 20H/501Y.V2 या B.1.351 भी कहा जाता है. कोरोना का ये स्ट्रेन सिर्फ दक्षिण अफ्रीका में पैदा हुआ है और इससे जुड़ा पहला केस दिसंबर (2020) के मध्य में आया था. 

कितना खतरनाक: यूके स्ट्रेन की तरह ही दक्षिण अफ्रीका का स्ट्रेन भी तेजी से फैलने वाला बताया जा रहा है. ये कोरोना का ऐसा स्ट्रेन है जो युवाओं को भी अपनी गिरफ्त में लेता है. दक्षिण अफ्रीका में ऐसे केस सामने आए हैं जहां वायरस के नए स्ट्रेन से कम उम्र के लोग भी संक्रमित हुए हैं. हालांकि, अब तक इस वेरिएंट को लेकर ऐसे तथ्य सामने नहीं आए हैं कि ज्यादा घातक है. 
हालांकि, इस स्ट्रेन को लेकर दक्षिण अफ्रीकी सरकार का एक बयान काफी चिंताजनक माना जा रहा है. दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने कहा है कि एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन की इस स्ट्रेन से लड़ने की क्षमता लिमिटेड है. यही वजह है कि अफ्रीका की सरकार ने भारत से ली गई वैक्सीन के इस्तेमाल को भी रोक दिया है. ऐसे में इस स्ट्रेन को लेकर सावधानी ज्यादा जरूरी मानी जा रही है. बता दें कि ऑक्सफोर्ड की कोरोना वैक्सीन भारत में सीरम इंस्टिट्यूट ने तैयार की है, जिसे कोविशील्ड नाम दिया गया है. 

ब्राजील का कोरोना स्ट्रेन

कोरोना का जो स्ट्रेन ब्राजील का बताया जा रहा है कि उसे 20J/501Y.V3 या P.1 के तौर भी जाना जाता है. इसी साल जनवरी की शुरुआत में ये स्ट्रेन पहली बार ब्राजील में ही पाया गया. ब्राजील में इस स्ट्रेन के काफी केस सामने आए हैं. खासकर, ब्राजील शहर में इससे जुड़े काफी केस सामने आए हैं. ब्राजील का ये स्ट्रेन करीब 15 देशों तक फैल चुका है. 

कितना खतरनाक: जापान के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इंफेक्शियस डिजीज (NIID) ने बताया था कि 2 जनवरी को ब्राजील से आए यात्रियों में कोरोना का नया स्ट्रेन पाया गया है. जिन लोगों में ये स्ट्रेन पाया गया था उनकी 10 साल से लेकर 40 तक की थी.  NIID ने बताया था कि इस वायरस से 12 म्यूटेशंस हैं. 

यानी कोरोना के ये दोनों नये स्ट्रेन ऐसे हैं जो न सिर्फ तेजी से फैलते हैं बल्कि कम उम्र के लोग भी इससे संक्रमित हो चुके हैं. यही वजह है कि भारत में इन दो नए स्ट्रेन के केस आने के बाद चिंता बढ़ गई है. क्योंकि अब तक देश में ज्यादा उम्र के लोगों में ही कोरोना संक्रमण के अधिकतम केस पाए गए हैं. यही वजह है कि सरकार अलर्ट हो गई हैं. 

जिन पांच लोगों में ये नया स्ट्रेन पाया गया है, उनके साथ सफर करने वाले और संपर्क में आए सभी लोगों को क्ववारनटीन कर दिया गया है. इसके अलावा दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन से संक्रमित लोगों के सैंपल लेकर लैब में इस स्ट्रेन को आइसोलेट करने की कोशिश की जा रही है. जबकि ब्राजील के स्ट्रेन को अलग कर लिया गया है. इसके अलावा अब इन नए स्ट्रेन पर कोरोना वैक्सीन के असर को मापा जा रहा है. 

जब तक नए स्ट्रेन को लेकर ठोस नतीजे सामने नहीं आ जाते हैं तब तक एहतियात बरतने की सलाह दी गई है. दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील से आने वाले यात्रियों के लिए RT-PCR टेस्ट कराने की रणनीति अपनाई जा रही है. कर्नाटक सरकार ने तो इन दोनों देशों से आने वाले यात्रियों का आरटी-पीसीआर टेस्ट और 14 दिन का क्वारनटीन पीरियड जरूरी कर दिया है. 


 

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