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Healthgiri: डॉक्टर त्रेहान बोले- जनवरी तक हम प्री-कोविड वाली जिंदगी जीने लगेंगे

आजतक के खास कार्यक्रम 'इंडिया टुडे ग्रुप हेल्थगीरी अवॉर्ड्स' में 'कोविड-तीसरी लहर का खतरा' सेशन में देश के मशहूर डॉक्टरों के पैनल के साथ डिस्कशन में सभी ने माना कि देश में तीसरी लहर का खतरा बरकरार है लेकिन ये कब आएगी किसी को पता नहीं. 

तीसरी लहर को लेकर अलग अलग है एक्सपर्ट्स की राय (फोटो- आजतक) तीसरी लहर को लेकर अलग अलग है एक्सपर्ट्स की राय (फोटो- आजतक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तीसरी लहर को लेकर अलग अलग है एक्सपर्ट्स की राय
  • इस साल या अगले साल भी आ सकती है लहर
  • फेस्टिव सीजन में लहर आने की संभावना ज्यादा

India Today Healthgiri Awards: आजतक के खास कार्यक्रम 'इंडिया टुडे ग्रुप हेल्थगीरी अवॉर्ड्स' में 'कोविड-तीसरी लहर का खतरा' सेशन में कोरोना की तीसरी लहर की संभावना पर चर्चा हुई. इसमें सभी डॉक्टरों ने माना कि तीसरी लहर का खतरा बरकरार है लेकिन ये कब आएगी, किसी को पता नहीं.

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के चेयरमैन डॉ अशोक सेठ ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगनी चाहिए. उन्होंने बूस्टर डोज पर कहा कि बूस्टर डोज कब लगानी है, ये अभी पता नहीं है. ये एक्सपर्ट कमेटी को डिसाइड करना है. अगर अमेरिका में बूस्टर डोज लग रही है तो यह जरूरी नहीं है कि यह सब जगह लागू किया जाए. आज करीब 55-60 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी बन गई है. इसलिए लोगों में डर नहीं होना चाहिए कि थर्ड वेव आएगी तो बहुत खतरा होगा. उन्होंने यह भी कहा कि एक खतरा यह भी है कि बच्चों को वैक्सीन नहीं लगी. अगर वो बाहर जाते हैं तो हो सकता है कि वो परिवार में कोरोना संक्रमण का कारण बन जाए. 

मेंदाता, मेडिसिटी चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर, डॉ नरेश त्रेहान ने कहा कि तीसरी लहर आएगी, ये किसी को पता नहीं. अगर आएगी भी तो खतरा कम होगा. क्योंकि अबतक 75-80 फीसदी एलीजिबल लोगों को वैक्सीन लग चुकी है. अगर 80-90 फीसदी लोगों को वैक्सीन लग जाती है तो तीसरी लहर आती भी है तो उतना खतरा नहीं होगा. डेथ रेट उतना नहीं होगा जितना दूसरी लहर में हुआ. बच्चों को अगर वैक्सीन के बगैर छोड़ेगें तो खतरा है. जब उनसे पूछा गया कि कब तक हम पहले की तरह जीना शुरू कर देंगे जैसे कोरोना के पहले जीते थे. इस पर उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि जनवरी तक हम बिना मास्क वाली जिंदगी जीने लगेंगे.

बूस्टर डोज पर डॉ त्रेहान ने कहा कि पहले सबको पहले वैक्सीन लगे, यह जरूरी है. फिर बूस्टर डोज की बात होनी चाहिए. क्योंकि डोज सीमित है तो पहले यह जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लग जाए. उन्होंने कहा कि एक डेढ़ महीने में बच्चों की वैक्सीन आ जाएगी. फिर वैक्सीनेशन शुरू हो जाएगा. ऐसे में छोटे बच्चों के लिए जनवरी से स्कूल खोला जाए. 

डॉ दांग लैब प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर डॉ नवीन दांग ने कहा कि अब समय बदल गया है. पिछले डेढ़ साल में हमने काफी बुरा वक्त देखा. लेकिन अब वक्त बदल गया है. लोगों में जागरूकता आई है. सभी लोग अब वैक्सीन ले रहे हैं. ऐसे में अगर हम कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते रहे तो तीसरी लहर से डरने की जरूरत नहीं है. 

इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलिरी साइंसेज के डायरेक्टर डॉ एसके सरिन ने कहा कि हमें तीसरी लहर से बचाव के उपाय पर जोर देना चाहिए. हम केरल में और कुंभ मेले में ढील का परिणाम देख चुके हैं. ऐसे में ये सोचना गलत है कि दो डोज लग गईं तो हम कोरोना से सुरक्षित हैं. इस पैनल डिस्कशन में डॉ नरेश त्रेहान, डॉ अशोक सेठ, डॉ एसके सरिन और डॉ नवीन दांग ने शिरकत की.

 

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