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कैसे बंटेगी कोरोना की वैक्सीन? इस रणनीति पर काम कर रही मोदी सरकार

प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने हाल ही में एक बैठक की, जिसमें वैक्सीन ड्राइव के तौर-तरीकों पर चर्चा की गई. वहीं, नीति आयोग एक विस्तृत प्रस्ताव पर काम कर रहा है, जिसमें वैक्सीन की पहचान और वितरण चुनाव आयोग को भेजा जाएगा.

वैक्सीन ट्रायल के दौरान मेडिकल स्टाफ (PTI) वैक्सीन ट्रायल के दौरान मेडिकल स्टाफ (PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • वैक्सीन के वितरण की रणनीति पर काम हो रहा
  • चुनाव आयोग की ओर देख रही है सरकार
  • वैक्सीन वितरण में BLO का काम है अहम

कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में भारत महत्वपूर्ण मोड़ पर है. एक ओर जहां देश में हर रोज कोरोना के केस कम हो रहे हैं तो दूसरी तरफ सरकार कोरोना की वैक्सीन के वितरण की रणनीति पर काम कर रही है. 

प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने हाल ही में एक बैठक की, जिसमें वैक्सीन ड्राइव के तौर-तरीकों पर चर्चा की गई. सरकार वैक्सीन वितरण के लिए चुनाव आयोग की ओर देख रही है. दरअसल, वैक्सीन वितरण में बूथ स्तर के अधिकारी अहम रोल निभाने वाले हैं. उन्हें डोर-टू-डोर वैक्सीन ड्राइव के दौरान जिम्मेदारी दी जाएगी. 

वहीं, नीति आयोग एक विस्तृत प्रस्ताव पर काम कर रहा है, जिसमें वैक्सीन की पहचान और वितरण चुनाव आयोग को भेजा जाएगा. बता दें कि चुनाव आयोग के पास मतदाताओं का डेटा उपलब्ध होता है. इसका उपयोग डोर-टू-डोर वैक्सीन ड्राइव में किया जाएगा. 

सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बॉयोटेक जैसी कंपनियां वैक्सीन को अंतिम रूप देने में जुटी हैं और अब सभी निगाहें भंडारण और वितरण प्रणाली पर हैं. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) और वैज्ञानिकों की ओर से वैक्सीन निर्माताओं को हरी झंडी मिलने के बाद भारत 30 करोड़ नागरिकों के पहले समूह को टीका लगाने के लिए एक विशाल अभ्यास शुरू करेगा. 

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बूथ लेवल ऑफिसर्स की ली जाएगी मदद

वैक्सीन वितरण में बूथ स्तर के अधिकारियों की मदद ली जाएगी. बूथ स्तर के अधिकारी सरकारी/अर्ध-सरकारी कर्मचारी होते हैं, जो स्थानीय निर्वाचकों से परिचित होते हैं. वे स्थानीय जानकारियों का उपयोग करके रोल को अपडेट करने में सहायता करते हैं.

BLO जमीनी स्तर पर चुनाव आयोग का एक प्रतिनिधि होता जो रोल संशोधन की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. नीति आयोग के अधिकारियों का मानना ​​है कि बीएलओ में रोपिंग से टीके का वितरण आसान हो जाएगा, क्योंकि वे गांवों/टोलों के निवासियों की सूचना (नाम, निवास, आयु) से लैस होंगे.

बीएलओ गांव के बुजुर्गों और जमीनी स्तर के चुने हुए प्रतिनिधियों को जानते हैं. वे मृत/स्थानांतरित मतदाताओं के नामों की पहचान करते हैं. ये जानकारी रोल और टीका वितरण में काम आएगी.

प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों के साथ की थी चर्चा

बता दें कि बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वैक्सीन वितरण पर चर्चा की थी, साथ ही सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई थी. पीएम मोदी ने राज्यों से अपील की थी कि वो अपने यहां कोल्ड स्टोरेज समेत अन्य तैयारियों पर काम शुरू कर दें, साथ ही अपनी-अपनी ओर से विस्तृत प्लान केंद्र को भेजें.

इसके अलावा सर्वदलीय बैठक में पीएम मोदी ने संकेत दिए थे कि कुछ हफ्तों में ही वैक्सीन आ सकती है. जिसे सबसे पहले बुजुर्गों, गंभीर बीमारी वाले लोगों और कोरोना वॉरियर्स को दिया जाएगा. उसके बाद अलग-अलग फेज में वैक्सीन को आम लोगों तक पहुंचाया जाएगा.

 

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