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ब्रिटेन: परीक्षा न होने पर सॉफ्टवेयर से हुई छात्रों की ग्रेडिंग, परीक्षा नियंत्रक को देना पड़ा इस्तीफा

इस साल जब मार्च में ब्रिटेन कोरोना की जद में था तो परीक्षाएं रद्द कर दी गईं थीं. लेकिन छात्रों को रिजल्ट दिया जा सके इसके लिए एक ग्रेडिंग सिस्टम विकसित किया गया. इसके लिए स्कूल और शिक्षकों को छात्र-छात्राओं को ग्रेड देने के लिए कहा गया.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ब्रिटेन की परीक्षा नियंत्रक का इस्तीफा
  • एल्गोरिदम से मार्किंग में हुई गड़बड़ी
  • भारत में NEET, JEE परीक्षा रोकने की मांग

भारत में जहां NEET और JEE परीक्षा आयोजित करने को लेकर बहस चल रही है. वहीं ब्रिटेन से इससे ही जुड़ी एक खबर सामने आई है. ब्रिटेन में कोरोना वायरस महामारी के कारण हजारों छात्र परीक्षा में नहीं बैठ पाएं. 

इसके बाद यहां पर छात्रों को विवादास्पद एल्गोरिदम के जरिए नंबर दिया गया. इसकी वजह से छात्रों के GCSE और ए लेवल नंबर कम हो गए. 

छात्रों का दाखिला रुका, कॉलेज खाली रहे

इसकी वजह से कई छात्रों का विश्वविद्यालयों में दाखिला रुक गया और डिग्री के लिए कई दाखिले खाली रह गए. ये विवाद इतना बढ़ा कि इंग्लैंड की परीक्षा नियंत्रक सैली कॉलियर को इस्तीफा देना पड़ा. 

पढ़ें- JEE-NEET 2020: एग्जाम सेंटर्स हुए ज्यादा, कई शिफ्ट में होंगी परीक्षाएं, पढ़ें डिटेल्स

बता दें कि भारत में भी कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से NEET और JEE की परीक्षाएं आयोजित करवाने पर दो राय है. कई राज्य सरकारें इस परीक्षा को रद्द करवाने की मांग कर रही हैं. लेकिन केंद्र सरकार सितंबर में इस परीक्षा को करवाने पर अड़ी है. 

कोरोना की वजह से नहीं हुई परीक्षाएं

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बता दें कि इस साल जब मार्च में ब्रिटेन कोरोना की जद में था तो परीक्षाएं रद्द कर दी गईं थीं. लेकिन छात्रों को रिजल्ट दिया जा सके इसके लिए एक ग्रेडिंग सिस्टम विकसित किया गया. इसके लिए स्कूल और शिक्षकों को छात्र-छात्राओं को ग्रेड देने के लिए कहा गया. 

JEE-NEET को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने कहा- सितंबर में ही होगी परीक्षा

इस ग्रेडिंग की वजह से कई छात्रों के नंबर कम आ गए. दरअसल छात्रों का कहना है कि छात्रों की ग्रेडिंग के लिए जिस एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया गया उसने गलत ग्रेडिंगग की. इस वजह से बच्चों को भारी नुकसान हुआ. छात्रों ने कहा कि शिक्षा विभाग की गडबड़ी की वजह से उनके करियर पर असर पड़ा है. शिक्षा विभाग को इस बाबत कदम उठाना चाहिए. 

 

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