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कोरोना को कंट्रोल करने में दूसरे नंबर पर भारत, अमेरिका-जापान को भी पछाड़ा

भारत में मेडिकल नियामक इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की ओर से जारी लैब टेस्ट डेटा के मुताबिक औसतन 23 लोगों का टेस्ट किए जाने पर एक व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया.

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कोरोना के लक्षण के लिए थर्मल स्क्रीनिंग (फाइल फोटो-PTI) कोरोना के लक्षण के लिए थर्मल स्क्रीनिंग (फाइल फोटो-PTI)

  • भारत में कोरोना मरीजों का आंकड़ा 17 हजार के पार
  • देश में कोरोना से अब तक 559 लोगों की गई जान

भारत में 20 अप्रैल तक 17 हजार से अधिक कोरोना वायरस संक्रमण के केस सामने आ चुके हैं. बीते दो महीने में 4 लाख से अधिक लोगों की टेस्टिंग हुई है. हालांकि, टेस्ट पॉजिटिविटी रेट यानी TPR से पता चलता है कि भारत ने Covid-19 के फैलाव को काबू में रखा है. TPR से पता चलता है कि संक्रमण फैलने की रफ्तार क्या रही है.

भारत में मेडिकल नियामक इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की ओर से जारी लैब टेस्ट डेटा के मुताबिक औसतन 23 लोगों का टेस्ट किए जाने पर एक व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया. दूसरे शब्दों में कहें तो भारत में 19 अप्रैल तक TPR करीब 4 फीसदी था. ये दुनिया के कुछ सर्वाधिक प्रभावित देशों से कम है. इस मामले में दक्षिण कोरिया का प्रदर्शन बेहतर है जिसका TPR 1.9 फीसदी है.

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ब्राजील का TPR 6.4 फीसदी है. इसके बाद जर्मनी (7.7 फीसदी), जापान (8.8 फीसदी), इटली (13.2 फीसदी), स्पेन (18.2 फीसदी) और अमेरिका (19.3 फीसदी) हैं.

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TPR ऐसे में बहुत अहम पैमाना हो जाता है, जब किए गए टेस्ट्स की संख्या आबादी को देखते हुए कम हो. ये पैमाना कम टेस्ट किए जाने पर भी COVID-19 के संक्रमण के स्तर को दिखाता है.

हालांकि, एक पैमाने के तौर पर, TPR प्रीवेलेंस रेट (प्रसार दर) के बराबर नहीं होता, जो पैथोजन के सही संक्रमण-मृत्यु दर या संक्रमण के बाद कितने लोगों की मृत्यु हुई, दिखाता है,

ICMR टेस्टिंग डेटा हर दिन होने वाले टेस्ट की संख्या में बढ़ोतरी और नए केस में मजबूत को-रिलेशन (0.98) दिखाता है. ये बताता है कि अगर टेस्ट की संख्या बढ़ाई जाए तो केस की संख्या भी बढ़ सकती है.

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भारत में पहला केस जनवरी के आखिरी हफ्ते में सामने आया था. उसके बाद 4 लाख लोगों (कुल आबादी का 0.02 फीसदी) के टेस्ट किए जा चुके हैं और 20 अप्रैल तक 17,000 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं.

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टेस्टिंग के अन्य पैमाने जैसे कि ‘टेस्ट्स पर मिलियन’ (TPM) दिखाते हैं कि भारत अधिक लोगों का टेस्ट नहीं कर रहा है. ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ, ऐसे संक्रमित लोगों जिनमें लक्षण नहीं दिख रहे हैं, को चुनिंदा टेस्टिंग प्रक्रिया से बाहर रखे जाने पर चिंता जाहिर कर रहे हैं.

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भारत ने टेस्टिंग के ट्रेसिंग और टारगेटेड सिस्टम को अपनाया है. इसमें बिना लक्षण वाले लोग करीब करीब टेस्टिंग प्रक्रिया से बाहर हैं. ये लोग मेडिकल सिस्टम में आए बिना ही COVID-19 की वजह से दम तोड़ सकते हैं. इसका मतलब ये है कि उनका कभी टेस्ट ही नहीं हुआ.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल टेडरोस अधानोम गेबरिएसस ने चेताया है, “आप वायरस से नहीं लड़ सकते अगर आप को ये न पता हो कि वो है कहां.’’

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