भले ही आईसीएमआर की गाइडलाइन के तहत दिल्ली सरकार ने ज्यादातर प्राइवेट लैब में कोरोना टेस्ट बंद करवा दिया हो, लेकिन आम लोगों के लिए सरकारी अस्पतालों में भी कोरोना टेस्ट आसान नहीं है. तिलक नगर की 66 साल की सुदेश का मामला तो और भी मुश्किल है.
66 साल की सुदेश को मई के आखिरी हफ्ते से ही भूख नहीं लग रही थी. शुगर और ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ने लगी थी. डॉक्टर को दिखाया तो पता लगा हिमोग्लोबिन की कमी है. जब सिर में दर्द की शिकायत हुई तो प्राइवेट नर्सिंग होम ले जाया गया. वहां उन्हें कोरोना टेस्ट के लिए कहा गया.
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इसके बाद उनका 2 जून की रात ही आरएमएल अस्पताल में कोरोना का टेस्ट हो गया. हालांकि, तमाम लैंडलाइन नंबर, हेल्पलाइन नंबर और डॉक्टर को फोन करने के बाद भी टेस्ट की रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है. जब तिलक नगर इलाके में स्थित प्राइवेट लैब का रुख किया तो वहां पहुंचने पर पता लगा कि कोरोना टेस्ट तो 2 दिन से बंद है. अब उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा कि वो क्या करें.
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सुदेश के बेटे गुलशन ने नाराजगी जाहिर करते हुए अस्पतालों में बेड की उपलब्धता को लेकर कई तरह के सवाल खड़े किए और सरकारी मंशा पर ढेरों इल्जाम लगाए.
वहीं, तरुण एन्क्लेव के कंटेनमेंट जोन में रहने वाले और आरडब्लूए के अध्यक्ष राम गोपाल गोयल ने बताया कि सरस्वती विहार में रहने वाले उनके भाई के परिवार वाले कोरोना टेस्ट करवाना चाहते हैं. परिवार में तीन लोगों को 100 प्लस तापमान है. सैंपल के लिए कई अस्पतालों को फोन कर लिया, लेकिन कोई सैंपल लेने को तैयार नहीं है.
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