प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तबलीगी जमात और मरकज के प्रमुख मौलाना साद के खिलाफ धन शोधन रोकथाम कानून के तहत मामला दर्ज किया है. दिल्ली पुलिस ने मौलाना साद और अन्य के खिलाफ लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन के आरोप में एफआईआर दर्ज किया था और अब ईडी ने उसके खिलाफ मामला दर्ज किया है. वित्तीय जांच एजेंसी को संदेह है कि मौलाना साद के संगठन द्वारा विदेशों से बड़ी मात्रा में धन प्राप्त किया गया था और सरकारी अधिकारियों के समक्ष इसका खुलासा नहीं किया गया. ईडी द्वारा मौलाना साद के 8 सहयोगियों को भी बुक किया गया है.
कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...सूत्रों का कहना है कि मरकज ट्रस्ट की बही खाता की जांच की जा रही है. ईडी इस बात पर भी गौर करेगा कि क्या दान द्वारा प्राप्त धन में गड़बड़ी की गई थी और क्या इसके लिए हवाला का उपयोग किया गया था? आयकर विभाग ने भी संभावित आय की घोषणा ना करना, ट्रस्टों द्वारा करों की चोरी और व्यक्तिगत लाभ के लिए धन की चैनलाइजिंग जैसे आरोपों पर अनाधिकारिक तौर पर जांच शुरू कर दी है.
मरकस फंडिंग पर दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की रिपोर्ट केन्द्रीय वित्तीय जांच एजेंसियों- प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग को सौंपी जाएगी. मौलाना साद को क्राइम ब्रांच के सामने पूछताछ के लिए पेश होना है.
आजतक को मिली जानकारी के मुताबिक क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट और साद के बयान का इस्तेमाल वित्तीय जांच एजेंसियों द्वारा किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, प्रारम्भिक जांच में पता चला है कि हाल के दिनों में उनके बैंक खातों में काफी मात्रा में धन आया था.
मरकज ने बैंक अकाउंट्स का विवरण अभी तक क्राइम ब्रांच के साथ साझा नहीं किया था, जबकि दो नोटिस उसके पास भेजे गए थे.
तबलीगी जमात नेता मौलाना साद की क्वारनटीन अवधि समाप्त हो गई है और क्राइम ब्रांच जल्द ही उनका बयान दर्ज करा सकती है. बयान के बाद ही पुलिस इस मामले में गिरफ्तार करने का फैसला करेगी.
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साद ने कथित तौर पर लॉकडाउन के दौरान निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के इकट्ठा सदस्यों को बाहर ना निकलने के लिए प्रोत्साहित किया. जिसके परिणामस्वरुप कई सदस्यों की मृत्यु हो गई, जबकि दो हजार से अधिक लोग COVID19 पॉजीटिव पाए गए हैं.