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कोरोना से रिकवरी के बाद भी सदमे से उबर नहीं पा रहे लोग, ICMR की स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

एक नई स्टडी में सामने आया है कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी ज्यादातर लोग किसी न किसी सदमे का सामना कर रहे हैं. इसके अलावा बीमारी की जानकारी न होना और संक्रमण फैलने के डर ने लोगों के मन में खुद के लिए भेदभाव भी पैदा कर दिया.

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कोरोना रिकवरी के बाद भी परेशानी झेल रहे हैं लोग. (फाइल फोटो-PTI) कोरोना रिकवरी के बाद भी परेशानी झेल रहे हैं लोग. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोरोना की पहली लहर के दौरान हुई स्टडी
  • 81% ने माना- वो सदमे का सामना कर रहे

कोरोना से ठीक होने के बाद लंबे समय तक इसके लक्षण होने की बातें तो कई स्टडी में सामने आ चुकीं हैं. लेकिन अब एक नई स्टडी में सामने आया है कि कोरोना से रिकवर होने के बाद भी ज्यादातर लोग सदमे से हैं और इससे उबर नहीं पा रहे हैं. चौंकाने वाली ये जानकारी केंद्र सरकार की संस्था इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR की स्टडी में सामने आई है. 

इस स्टडी में सामने आया कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी ज्यादातर लोग ऐसे थे, जो किसी न किसी तरह के सदमे और भेदभाव का सामना कर रहे हैं. ऐसे लोगों में बीमारी के अजीबो-गरीब बर्ताव, उसके ट्रांसमिशन और रोकथाम की जानकारी को लेकर कमी की वजह से डर रहा, जिसने उनके मन में सदमा और खुद को लेकर एक भेदभाव पैदा कर दिया.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल स्टेटिस्टिक्स (NIMS) की सीनियर साइंटिस्ट डॉ. सरिता नायर ने न्यूज एजेंसी को बताया कि कोरोना से ठीक होने के बाद लोगों को किस तरह के सदमे से गुजरना पड़ा? इसका कारण क्या रहा? ये समझने के लिए 7 राज्यों के 18 जिलों में स्टडी की गई थी.

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इस स्टडी में पता चला कि कोविड से ठीक हो चुके 60% लोग ऐसे थे, जिन्हें बीमारी का सही कारण, ट्रांसमिशन का तरीका और इसकी रोकथाम के सारे उपायों के बारे में पता था. ICMR-NIMS के डायरेक्टर डॉ. एम. विष्णु वर्धन राव ने न्यूज एजेंसी को बताया कि स्टडी में शामिल 80.5% लोगों ने बताया कि वो ठीक होने के बाद भी कम से कम किसी एक सदमे का सामना कर रहे हैं. जबकि, 51.3% ऐसे थे, जो किसी गंभीर सदमे का सामना कर रहे थे.

डॉ. सरिता नायर ने बताया कि अलग-अलग जगहों पर लोगों को अलग-अलग तरह के सदमों का सामना करना पड़ा है. उन्होंने बताया कि संक्रमण फैलने का डर और सही जानकारी न होने की कमी ने लोगों में खुद को लेकर भेदभाव पैदा कर दिया. उन्होंने कहा कि जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ, कोरोना के ट्रांसमिशन और उसके उपायों के बारे में सही जानकारी देना जरूरी है, ताकि ऐसे भेदभाव को खत्म किया जा सके.

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ये स्टडी कोरोना की पहली लहर के दौरान की गई थी. स्टडी अगस्त 2020 से फरवरी 2021 के बीच हुई थी. इसमें कोरोना से ठीक हो चुके 18 साल से ऊपर के लोगों को शामिल किया गया था. इसमें 2,281 लोगों को शामिल किया गया था, जिनमें 303 कोरोना से रिकवर हो चुके लोग थे.

डॉ. राव ने कहा कि कोरोना की पहली लहर के बाद से अब तक स्थिति काफी बदल गई है और कोरोना की रोकथाम और इलाज को लेकर पहले से ज्यादा जागरूकता है.

 

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