कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे डॉक्टर कल यानी बुधवार को अपने अधिकार के लिए सांकेतिक रूप से विरोध प्रदर्शन करेंगे. दरअसल, डॉक्टर अपने खिलाफ होने वाली हिंसा पर केंद्रीय कानून की मांग कर रहे हैं. अभी तक अलग से कानून नहीं बनाया गया है. इसके खिलाफ आज देशभर के डॉक्टर मोमबत्ती जलाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने व्हाइट अलर्ट जारी करते हुए कहा कि बुधवार को देश भर के डॉक्टर और अस्पतालों में मोमबत्ती जलाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे. इसके साथ ही आईएमए ने 23 अप्रैल को काला दिवस घोषित किया है. उनकी मांग है कि डॉक्टरों पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए विशेष केंद्रीय कानून बनाया जाए.
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क्या है पूरा मामला
कई सालों से डॉक्टर और मेडिकल अपने लिए एक अलग कानून की मांग कर रहे हैं. उनकी मांग को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने हेल्थकेयर सर्विस पर्सनल एंड क्लिनिकल एस्टेबलिस्मेंट (प्रोबीजन ऑफ वायलेंस एंड डेमेज प्रॉपर्टी) एक्ट- 2019 का ड्राफ्ट जारी किया था.
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इसके तहत मेडिकल स्टाफ पर हमले आरोपी को 10 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये का जुर्माने का प्रावधान था. स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्राफ्ट किए गए विधेयक को कानून मंत्रालय के पास सत्यापन के लिए भेजा गया था, जहां से विधेयक को स्वीकृति मिल गई थी.
वित्त मंत्रालय ने भी बिना किसी बदलाव के विधेयक को मंजूरी दे दी थी. जब यह विधेयक गृह मंत्रालय के पास भेजा गया तो गृह मंत्रालय ने इस पर आपत्ति लगा दी. गृह मंत्रालय ने कहा था कि किसी एक व्यवसाय के लिए अलग से कानून बनाना युक्तिसंगत नहीं है.