इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी करेंगी, जबकि कई अन्य पार्टियों के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे. जिसमें शरद पवार, उद्धव ठाकरे, हेमंत सोरेन, ममता बनर्जी, सीताराम येचुरी, एमके स्टालिन जैसे बड़े नाम शामिल हैं.
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बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान मोदी सरकार को घेरने की जिम्मेदारी सीपीएम के सीताराम येचुरी को सौंपी गई है. येचुरी बाकी सभी विपक्षी दलों की ओर से जो साझा मांग मोदी सरकार के सामने रखने वाले हैं, उनमें ये शामिल हो सकती हैं...
• गरीबों के खाते में हर महीने 7500 रुपये जमा किए जाएं.
• गरीबों को हर महीने 10 किलो अनाज अगले 6 महीने तक दिया जाए.
• श्रम कानून से जुड़े सभी बदलाव वापस लिए जाएं.
• फसल खरीदी, खाद बीज का तुरंत इंतज़ाम हो.
• कोरोना से अधिक प्रभावित राज्यों को फंड दिया जाए.
• सरकार का विरोध करने वालों को टारगेट करना बंद हो.
• जम्मू-कश्मीर में गिरफ्तार किए गए लोगों की रिहाई हो.
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दिलचस्प ये है कि अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी इस विपक्षी बैठक से दूर रहेंगे. जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के भी शामिल होने के बारे में कोई जानकारी नहीं है. ऐसे में एक बार फिर विपक्ष की एकजुटता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा लगातार अलग-अलग मोर्चों पर मोदी सरकार को घेरते आए हैं. कोरोना संकट के वक्त भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिख कई मांगें रखी थीं.