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Covid-19: कुछ ही दिनों में तीसरी लहर की पीक पर होगा भारत? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

देशभर में कोरोना की तीसरी लहर में मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है. कई छोटे-बड़े शहरों में पॉजिटिविटी रेट लगातार बढ़ रहा है. दिल्ली के जीटीबी अस्पताल के डायरेक्टर डॉक्टर सुभाष गिरी का कहना है कि पॉजिटिविटी रेट से लगातार कोरोना से संक्रमित मरीजों के मामले भी बढ़ेंगे.

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देश में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं (तस्वीर- PTI) देश में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं (तस्वीर- PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जनवरी या फरवरी में तीसरी लहर की पीक आ सकती है
  • इस पीक में कई सारे लोग संक्रमित होंगे
  • तीसरी लहर का पीक पर जाना बेहद खतरनाक

कोरोना वायरस के मामलों में फिर एक बार बड़ा उछाल देखने को मिला है. देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 2,64,202 नए मरीज सामने आए हैं. यह आंकड़ा कल यानी गुरुवार के मुकाबले 6.7 फीसदी ज्यादा है. भारत में अभी कोरोना की संक्रमण दर 14.78 फीसदी हो गई है. फिलहाल देश में नए वैरिएंट यानी ओमिक्रॉन के मामले 5,753 हैं. 

ऐसे में देशभर में कोरोना की तीसरी लहर में मरीजों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है. कई छोटे-बड़े शहरों में पॉजिटिविटी रेट लगातार बढ़ रहा है. दिल्ली के जीटीबी अस्पताल के डायरेक्टर डॉक्टर सुभाष गिरी का कहना है कि पॉजिटिविटी रेट से लगातार कोरोना से संक्रमित मरीजों के मामले भी बढ़ेंगे. पॉजिटिविटी रेट कई सारे फैक्टर्स पर डिपेंड करता है. पहला तो यह कि आपने टेस्ट कितने किए हैं, दूसरा यह कि आपके पॉजिटिव सैंपल्स के मामले कितने गंभीर हैं और साथ ही साथ लोगों की स्किल कैसी है.

डॉक्टर गिरी ने बताया कि जैसे-जैसे पॉजिटिविटी रेट बढ़ता जाएगा, वैसे-वैसे कोरोना संक्रमित मरीजों के मामले भी बढ़ते जाएंगे. आने वाले समय में इस पॉजिटिविटी रेट से भी डबल पॉजिटिव रेट हमें देखना पड़े. उन्होंने कहा कि तीसरी लहर कि यदि हम बात करें तो जनवरी या फरवरी के पहले सप्ताह में तीसरी लहर की पीक आ सकती है और मार्च तक यह पीक गिर जाएगी. लेकिन इस पीक में कई सारे लोग संक्रमित होंगे.

 

वहीं मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के डायरेक्टर डॉक्टर विवेक नांगिया का कहना है कि तीसरी लहर का पीक पर जाना बेहद खतरनाक है. डॉक्टर नांगिया बताते है कि पिछले कुछ दिनों के मुकाबले अब हॉस्पिटलाइजेशन बढ़ने लगा है. ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि पॉजिटिविटी सीट में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. अब यह बीमारी उन लोगों को ज्यादा हो रही है जिन लोगों में comorbidity की समस्या है. ऐसे में जरूरी है कि हम सब मिलकर एहतियात बरतें और लापरवाही ना करें. क्योंकि जरा सी भी लापरवाही बहुत घातक साबित हो सकती है.
 

वैक्सीन को लेकर लापरवाही पड़ रही है जान पर भारी 

जिस किसी को अभी तक कोरोना का संक्रमण नहीं हुआ है और जिन्होंने वैक्सीन की एक भी डोज़ नहीं ली है या फिर सिर्फ एक ही डोज़ ली है तो ये लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है. देश और दुनिया में कोरोना के टीकों और मौतों को लेकर चला आ रहा ट्रेंड ये बताता है कि वैक्सीन नए वैरिएंट ऑमिक्रॉन को लेकर भले ही उतनी प्रभावी ना हो लेकिन अगर आपको वैक्सीन की दोनों डोज़ लगी हों तो संक्रमण होने पर वैक्सीन गंभीर बीमारी के लिए ना केवल सुरक्षा कवच दे रही है,  बल्कि मौतों को भी रोक रही है. 
 
दिल्ली मेडिकल काउंसिल के प्रेसीडेंट अरुण गुप्ता ने 31 दिसंबर को आए यूके के डेटा का हवाला देते हुए बताया कि यूके में ना केवल सभी को वैक्सीन के दोनों डोज लग चुकी है, बल्कि बूस्टर भी लगा दिया गया है. डेटा विश्लेषण बताता है कि फुली वैक्सीनिटेड लोगों में सीवियर डेथ ऑर हॉस्पीटलाइजेशन 82 फीसदी कम हो गया. मतलब साफ है अनवैक्सीनेटेड के मुकाबले वैक्सीन इफैक्टिव है. 

 

वैक्सीन लगी है, फिर भी संक्रमण हो गया तो वो माइल्ड संक्रमण ही होगा. डॉ. अरुण मानते हैं कि चूंकि जब वैक्सीन बनी तो डेल्टा वेव प्रमुखता से थी और उसके लिहाज से वैक्सीन बनाई गई. ऐसे में डेल्टा के मुकाबले ओमीक्रॉन में वैक्सीन का असर कम पाया गया है. 

दिल्ली सरकार का डेटा कहता है कि दिल्ली में एक ही डोज लेने वाले या फिर वैक्सीन ना लेने वाले लोगों की ही मौत हो रही है. ताजा डेटा कहता है कि 97 में से 89 वो लोग हैं जो या तो वैक्सीनेटेड नहीं थे या फिर पार्शियल थे. ऐसे में जिनकी सेकेंड डोज़ बची है, उनको वैक्सीन तुरंत लगवानी चाहिए. ज्यादातर लोगों के मौत की वजह कुछ और बीमारियां रही है और फिर उनको कोरोना हुआ. ऐसे में दूसरी बीमारियों को नज़र अंदाज़ ना करें. दिल्ली में 5 से 12 जनवरी के बीच 73 फ़ीसदी मौतें बिना वैक्सीन वालों की हुई.
 

 

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