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हर दिन 5 लाख तक आ सकते हैं कोरोना केस, एक्सपर्ट से समझें...कब नीचे आएगा ग्राफ

देश में कोरोना की दूसरी लहर बेकाबू हो चुकी है. पिछले कुछ दिनों से हर दिन डेढ़ लाख से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. ऐसे में दो टॉप एक्सपर्ट ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर कितनी खतरनाक हो सकती है और इसका ग्राफ नीचे कब और कैसे आ सकता है?

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दूसरी लहर में हर दिन 5 लाख तक केस जा सकते हैं. (फाइल फोटो-PTI) दूसरी लहर में हर दिन 5 लाख तक केस जा सकते हैं. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'दूसरी लहर जितनी तेजी से उठी, उतनी तेजी से गिरी भी'
  • 'कई देशों में कोरोना की तीसरी लहर, वैक्सीन हमें इससे बचाएगी'

देश में अब रोज कोरोना के डराने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं. इन आंकड़ों के बीच जगह-जगह ऑक्सीजन की किल्लत, बेड की कमी और रेमडेसिविर जैसी जरूरी दवा का न मिल पाना इस डर को और भी बढ़ा देता है. कोरोना की दूसरी लहर पहली लहर से ज्यादा खतरनाक दिख रही है. ये कितनी खतरनाक है? इसको लेकर इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई से दो टॉप एक्सपर्ट ने अपनी राय जाहिर की. क्या कहा उन्होंने, आइए जानते हैं...

1. प्रोफेसर भ्रमर मुखर्जी, एपिडेमियोलॉजी और बायोस्टेटिक्स की हेड, स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन
पूरे देश से इस तरह की आने वाली रिपोर्ट्स को देखना बहुत मुश्किल है. मुझे लगता है कि हम में से कई लोगों का पूरा एक साल बर्बाद हो गया. मुझे ऐसा लगता है कि आने वाले 4 हफ्ते भारत के लिए बहुत मुश्किल हैं. अप्रैल का महीना बहुत क्रूशियल है. आने वाले दिनों में हर दिन 5 लाख मामले और 3 से 4 हजार मौतें होने का अनुमान लगाया जा रहा है. ये बहुत चिंतित करने वाला है. लेकिन मुझे उम्मीद है कि लोगों की मदद, सरकार की नीतियों से इस अनुमान को गलत साबित किया जा सकेगा. 

ये वायरस किसी भी तरह की सीमाओं को नहीं मानता. इसलिए ये मान लेना कि महाराष्ट्र में कोई दूसरा म्यूटेंट नहीं फैलेगा, गलत होगा. ये वायरस जितना ज्यादा फैलता है, उतना ज्यादा बदलता है. लेकिन हमने साउथ अफ्रीका, ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई देशों में देखा है कि वहां दूसरी लहर जितनी तेजी से उठी, उतनी ही तेजी से नीचे भी गिरी है. अभी सारे मॉडल इस और इशारा कर रहे हैं कि महाराष्ट्र में कोरोना के मामले अप्रैल के आखिर या मई की शुरुआत में नीचे आएंगे. इसलिए मुझे कोई चमत्कार होने की उम्मीद है. 

2. डॉ. वी. रवि, वायरोलॉजिस्ट और स्पुतनिक वैक्सीन की इंटरनेशनल एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य
वैक्सीन के दोनों डोज लगने के बाद वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनने में दो हफ्ते का वक्त लगता है. क्योंकि वायरस अब तेजी से फैल रहा है, इसलिए जिन लोगों को वैक्सीन की पहली डोज लगी थी, वो भी अब कोरोना पॉजिटिव हो रहे हैं. ये मिथक है कि आज आपने वैक्सीन लगवाई और कल आप वायरस से सुरक्षित हो गए. यहां ये भी ध्यान रखने की जरूरत है कि वैक्सीन किसी गंभीर बीमारी और उससे होने वाली मौत से बचाती है, न कि संक्रमण से. दुनिया की कोई भी वैक्सीन आपको वायरस से 100% सुरक्षा नहीं दे सकती.

वायरस म्यूटेंट हो रहा है या नहीं हो रहा, वैक्सीन है या नहीं है. इससे बचने का सिर्फ यही तरीका है कि आप मास्क पहनें, दूरी बनाए रखें, बार-बार हाथ सैनिटाइज करें और सबसे जरूरी कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें. लॉकडाउन भी समाधान नहीं है, लेकिन हो सकता है कि सरकारें इसे लागू कर दें. लेकिन मैं काम पर जाना चाहूंगा, वापस लौटकर घर में ही बंद हो जाऊंगा. अपने आप को लॉक करना ज्यादा अच्छा है और लोग ऐसा कर सकते हैं. 

कोरोना का ग्राफ तभी नीचे आएगा, जब ये अपने पीक पर पहुंच जाएगा. कई देशों में कोरोना की तीसरी लहर भी आ गई है. और हम अभी जो वैक्सीन ले रहे हैं, वो हमें कोरोना की तीसरी लहर से बचाएगी. 

 

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