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कोरोना कंट्रोल का क्या है धारावी मॉडल, जिसकी WHO ने की तारीफ

2.5 वर्ग किलोमीटर में फैली धारावी एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी-झोपड़ी बस्ती है. यहां पर जनसंख्या का घनत्व 2,27,136 प्रति किलोमीटर है. यहां की आबादी 10 से 12 लाख के करीब है. धारावी की आर्थिक उपयोगिता को इसी बात से समझा जा सकता है कि यहां से हर साल 1 अरब डॉलर का निर्यात होता है.

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मुंबई के धारावी में घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करते स्वास्थ्यकर्मी (फोटो- पीटीआई)
मुंबई के धारावी में घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करते स्वास्थ्यकर्मी (फोटो- पीटीआई)

  • धारावी में कैसे कंट्रोल हुआ कोरोना संक्रमण
  • धारावी में कोरोना के मात्र 166 एक्टिव केस
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने धारावी में कोरोना कंट्रोल के तरीकों की सराहाना की है. WHO चीफ टेड्रोस एडहानोम ने कहा है कि मुंबई जैसे मेगासिटी के धारावी में कोरोना को नियंत्रित करना बताता है कि कोरोना पर काबू पाया जा सकता है.

हम आपको बताते हैं कि कैसे महाराष्ट्र सरकार और बीएमसी ने धारावी में कोरोना पर काबू पाया. बता दें कि पिछले मंगलवार को धारावी में कोरोना का एक मात्र केस मिला. धारावी में अब तक कोरोना वायरस के लगभग 2300 केस मिले हैं. मुंबई जो कि कोरोना से भारत का सबसे ज्यादा प्रभावित शहर है वहां 2300 की संख्या तुलनात्मक रूप से काफी कम है.

2.5 वर्ग किलोमीटर में फैली धारावी एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी-झोपड़ी बस्ती है. यहां पर जनसंख्या का घनत्व 2,27,136 प्रति किलोमीटर है. यहां की आबादी 10 से 12 लाख के करीब है. धारावी की आर्थिक उपयोगिता को इसी बात से समझा जा सकता है कि यहां से हर साल 1 अरब डॉलर का निर्यात होता है.

एक महीने पहले जब धारावी में कोरोना का पहला केस सामने आया था तो लोग ये सोचकर डरे हुए थे कि यहां स्थिति भयावह होने वाली है. यहां की गलियां और घर इतने संकरे हैं कि होम क्वारनटीन और सोशल डिस्टेंसिंग संभव ही नहीं है. म्यूनिशिपल कॉरपोरेशन ऑफ ग्रेटर मुंबई के सामने ये बड़ी चुनौती थी.

धारावी में कोरोना कंट्रोल के लिए बीएमसी ने 4 चीजों पर ध्यान दिया.

1-ट्रेसिंग: डॉक्टरों और निजी क्लिनिकों के सहयोग से 47500 घरों में लोगों की जांच की गई. सिर्फ मोबाइल वैन में 14970 लोगों की स्क्रीनिंग की गई.

2-ट्रैकिंग: 3 लाख 60 हजार से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की गई, 8246 बुजुर्गों का सर्वे किया गया.

3-टेस्टिंग: धारावी में 13500 लोगों के टेस्ट किए गए.

4-ट्रीटमेंट: धारावी की स्लम में न सिर्फ इलाज के लिए व्यवस्था की गई. बल्कि 24 घंटे 7 दिन भोजन मुहैया कराने का भी इंतजाम किया गया. सिर्फ गंभीर मरीजों को ही बाहर भेजा गया, 90 फीसदी मरीजों का इलाज वहीं किया गया, इससे संक्रमण कम फैला.

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चूंकि धारावी मात्र 2.5 वर्ग किलोमीटर में फैला है, इसलिए बीएमसी ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए वायरस को खदेड़ो की नीति पर काम करना शुरू किया.

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1- इसके तहत हाई रिस्क जोन में लोगों की खूब जांच की गई. फीवर कैंप आयोजित किए गए ताकि संदिग्ध मरीजों की पहचान हो पाए.

2- इस दौरान बीएमसी के सामने डॉक्टरों की समस्या आई, इसके लिए 24 निजी डॉक्टर बीएमसी के लिए काम करने को तैयार हुए. इन्हें बीएमसी ने सारी सुविधा दी. ये डॉक्टर घर-घर पहुंचे और लोगों की जांच की. इससे संदिग्धों की पहचान हुई.

3- इसके बाद सभी डॉक्टरों को अपना क्लीनिक खोलने को कहा गया. डॉक्टरों को कहा गया कि अगर उनके यहां कोई भी संदिग्ध मरीज आते हैं तो वे तुंरत इसकी सूचना बीएमसी को दें.

4-बीएमसी ने इन सभी निजी चिकित्सों के क्लिनिक को सैनिटाइज किया और उन्हें, पीपीई, गल्व्स समेत दूसरी चीजें मुहैया कराई.

चूंकि धारावी में होम क्वारनटीन संभव नहीं था, इसलिए संस्थानिक क्वारनटीन पर ज्यादा से ज्यादा जोर दिया गया.

पढ़ें- मुंबई के धारावी में टूटी कोरोना ट्रांसमिशन की चेन, WHO चीफ ने की तारीफ

इसके लिए स्कूल, शॉदी हॉल, स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में मरीजों का रखा गया. यहां पर कम्युनिटी किचन की व्यवस्था थी. यहां मरीजों को नाश्ता, खाना और रात का भोजना मिलता था. यहां पर 24 घंटे डॉक्टर मौजूद रहे, नर्स समेत दूसरे मेडिकल स्टाफ की मौजूदगी भी यहां पर्याप्त रही. मरीजों को दवाइयां और विटामिन की गोलियां भी दी जाती रही.

धारावी में कोरोना के आंकड़े

10 जुलाई तक धारावी में कोरोना के कुल आंकड़े 2359 थे. हालांकि यहां 1952 लोग इलाज के दौरान ठीक हो चुके हैं, यहां पर कोरोना के सक्रिय मामले मात्र 166 बचे हैं. यहां इलाज के दौरान 215 लोगों की मौत हो चुकी है.

यहां पर 58 हजार 154 लोगों की कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग की गई है. यानी कि 1 कोरोना पॉजिटिव के लिए 24 लोगों की ट्रेसिंग की गई. अगर क्वारनटीन की बात करें तो 1 पॉजिटिव केस पर उसके संपर्क में आने वाले 5 लोगों को क्वारनटीन किया गया.

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