कोरोना वायरस के संकट से निपटने के लिए देश में लॉकडाउन लागू है. साथ ही लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं. हालांकि किसानों के लिए खेतों में काम करते वक्त सोशल डिस्टेंसिंग किसी चुनौती से कम नहीं. खेती के समय मास्क और ग्लव्स पहनना और आपस में दूरी बनाकर रखना मुश्किल है, कभी-कभी तो नामुमकिन है.
किसान खेतों में काम करते वक्त मास्क और ग्लव्स तो दूर अपना चेहरा भी कई बार कपड़े से नहीं ढक पाते. लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग संबंधी सरकार के नियमों को मानने की जरूर कोशिश कर रहे हैं. नॉर्थ 24 परगना के किसान विश्वजीत पात्रा कहते हैं, 'हमें सोशल डिस्टेंस बनाकर रखने में कोई समस्या नही है. जमीन लगभग खाली है लेकिन इसकी जुताई और बीजों की बुवाई के वक्त और हाथों की जरूरत होती है. सरकार ने हमें 2 मीटर की दूरी बनाकर काम करने के लिए कहा है, वैसा हम कर रहे हैं.'
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खेती में पेश आ रही दिक्कतों को लेकर पात्रा का दर्द जुबान पर आ गया. पात्रा ने कहा, 'हमें फसल के सही दाम मिलने में दिक्कत आ रही है. पहले हमें जो दाम मिलते थे वो अब से बेहतर थे. इस लॉकडाउन में हमें बीज नहीं मिल रहे. हम बीज नीलगंज बाजार से लिया करते हैं. ये बाजार अब लॉकडाउन की वजह से बंद है. ऐसे में फसल उगाने में दिक्कत आती. ऐसे में हमने बैंगन और फली बोने का फैसला किया.'
किसान (फोटो- दीपक देबनाथ)
माली हालत खराब होने को लेकर पात्रा ने कहा, 'हां दिक्कतें आ रही हैं लेकिन किसी तरह सब चला रहे हैं. हम सरकार के नियमों के खिलाफ नहीं जा सकते. मैं लॉकडाउन का समर्थन कर रहा हूं और सभी को ऐसा करना चाहिए.' पात्रा के मुताबिक, 'गर्मी का मौसम होने की वजह से खेतों में काम करते वक्त मास्क पहनना मुमकिन नहीं है और काम नहीं करेंगे तो परिवार के सदस्य बिना खाना मर जाएंगे.'
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एक और किसान बिद्युत खारा ने कहा, 'हम वैसे मास्क पहनते हैं लेकिन खेत में काम करते वक्त नहीं. हम सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी कर रहे हैं.' खारा ने अपनी समस्या का हवाला देते हुए कहा, 'हम अपनी फसल बाजार में नहीं बेच सकते. फर्टिलाइजर्स की दुकानें बंद होने की वजह से हम बीज नहीं खरीद सकते. उर्वरक और तिलहन नहीं खरीद सकते. बाजार बंद है और कीमतें ऊंची हो चुकी हैं.
मास्क पहनने से दिक्कत
वहीं शेफाली बारा अपने पति सूर्या बारा के साथ खेती में हाथ बंटाती हैं. दोनों दूरी बनाकर काम कर रहे हैं लेकिन दोनों ने मास्क और ग्लव्स नहीं पहने हैं. शेफाली ने बताया, 'खेत में काम करते वक्त मास्क पहनने से दिक्कत होती है. लेकिन कहीं जाते हैं तो मास्क लगाकर चलते हैं. अभी हमारी समस्या तिलहन का नहीं मिल पाना है. इसकी कीमत बहुत ऊंची है. और हमें टमाटर, भिंडी, लौकी जैसी सब्जी कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है. ऐसे हाल में हम अपना परिवार पाल रहे हैं.'
कैमरे को देख शेफाली के पति सूर्या बारा ने अपना चेहरा रूमाल से ढकने की कोशिश की. साथ ही कहा, 'हमें हमारी सब्जियों के वाजिब दाम नहीं मिल रहे. बाजार में ग्राहक आने से डर रहे हैं.'
किसान (फोटो- दीपक देबनाथ)
एक बेटी के पिता और किसान संजीब बारा ने अपना दर्द कुछ इस तरह बयान किया, 'बहुत दिक्कत है. सब्जी खेत में पड़ी है. हम इसे बाजार में नहीं बेच सकते. कई बार कम कीमत पर इसे बेचना पड़ता है. जिसके दाम 10 रुपए किलो है, खरीदने वाला उसके 4-5 रुपए ही देना चाहता है. लॉकडाउन 3 मई तक बढ़ने से हमारे पास कोई चारा नहीं. सब्जियों को खेत में ही छोड़ने के अलावा हम कुछ नहीं कर सकते. हम बिना खाने के मर जाएंगे.'
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दोपेरिया ग्राम पंचायत के नवारान और सूर्यापुर क्षेत्रों में 100 से ज्यादा किसान जुताई में लगे हुए हैं. कुछ के अपने खेत हैं, कुछ दूसरों के खेत लीज पर लेकर जोत रहे हैं. इस क्षेत्र में दो बड़ी सब्जी मंडियां- नालागढ़ और निलगुआंगे हैं. नालागढ़ की दोनों गांवों से दूरी एक किलोमीटर और निलगुआंगे की 5 किलोमीटर है.
संजीब बेरा ने बताया, 'हम इन दोनों मंडियों में ही अपने उत्पाद बेचते थे. लेकिन इनके अब बंद होने से हम सड़क किनारे खड़े हैं. हमें अंदर नहीं जाने दिया जा रहा. पुलिस ने इस इलाके में सुबह आकर मुआयना किया था. खरीदार स्थिति का फायदा उठा रहे हैं और हमें बहुत कम कीमत दे रहे हैं.'
किसानों को मिलेंगी छूटलॉकडाउन 2.0 में सरकार ने अपनी गाइडलाइंस में कृषि से जुड़ी गतिविधियों के लिए कुछ छूट देने की बात कही है. कहा गया है कि 20 अप्रैल से लोगों की दिक्कतें कम करने के लिए कुछ गतिवधियां शुरू करने की इजाजत दी जाएगी. आवश्यक वस्तुओं से जुड़ा कृषि ऐसा ही सेक्टर है जिसे ऐसी छूट मिलेंगी.
(नॉर्थ 24 परगना से दीपक देबनाथ के इनपुट्स के साथ)