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Bharat Biotech की उस Intranasal Vaccine के बारे में जानें सबकुछ, जिसे ट्रायल करने को सरकार ने मंजूरी दी

ड्रग्स रेगुलेटर ने भारत बायोटेक को अपनी नेजल वैक्सीन की तीसरे फेज के ट्रायल्स करने की मंजूरी दे दी है. ये ट्रायल 900 लोगों पर किया जाएगा. फेज-1 और फेज-2 के ट्रायल्स में वैक्सीन असरदार साबित हुई है.

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भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन बूस्टर डोज के तौर पर दी जाएगी. (फाइल फोटो-PTI)
भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन बूस्टर डोज के तौर पर दी जाएगी. (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 9 जगहों पर होंगे वैक्सीन के ट्रायल
  • भारत की पहली नेजल वैक्सीन है
  • नेजल वैक्सीन ज्यादा असरदार

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने भारत बायोटेक (Bharat Biotech) की नेजल वैक्सीन (Nasal Vaccine) को ट्रायल की मंजूरी दे दी है. नेजल वैक्सीन यानी नाक के जरिए दी जाने वाली वैक्सीन. ये ट्रायल देशभर में होगा. अगर ट्रायल में वैक्सीन असरदार साबित हुई तो इसका इस्तेमाल बूस्टर डोज के तौर पर किया जाएगा. 

सरकार ने किस वैक्सीन के ट्रायल को दी मंजूरी?

ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) ने भारत बायोटेक की इंट्रानेजल वैक्सीन (Intranasal Vaccine) को मंजूरी दी है. इसका नाम BBV154 है. इसे भारत बायोटेक और वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन  मिलकर बना रहे हैं. इसके फेज-1 और फेज-2 के ट्रायल हो चुके हैं और अब फेज-3 का ट्रायल करने की मंजूरी मिली है. सितंबर 2020 में भारत बायोटेक ने दावा किया था कि 2022 में नेजल वैक्सीन की 100 करोड़ डोज के प्रोडक्शन का टारगेट है.

कितने लोगों पर होगा ट्रायल?

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, देशभर में 9 जगहों पर इस वैक्सीन का ट्रायल किया जाएगा. इसमें दिल्ली एम्स भी शामिल है. ये ट्रायल 900 लोगों पर होगा. 

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ट्रायल में किन्हें शामिल किया जाएगा?

चूंकि भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन का इस्तेमाल बूस्टर डोज के लिए किया जाएगा, इसलिए ट्रायल में उन लोगों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी होगी. 

अब तक हुए ट्रायल में वैक्सीन कितनी इफेक्टिव?

वैक्सीन के पहले फेज के ट्रायल के नतीजे ठीक रहे हैं. पहले फेज में 18 से 60 साल के लोगों को शामिल किया गया था. नेजल वैक्सीन वॉलेंटियर पर असरदार साबित हुई और कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स नहीं हुआ. पिछले साल अगस्त में सरकार ने फेज-2 के ट्रायल करने की मंजूरी दी थी. भारत बायोटेक के चेयरमैन डॉ. कृष्णा एल्ला ने बताया था कि फेज-2 ट्रायल्स के नतीजे भी सकारात्मक रहे हैं. कंपनी ने 20 दिसंबर को फेज-3 के ट्रायल्स को करने की अनुमति मांगी थी. 

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बाकी वैक्सीन से कितनी अलग?

भारत में अब तक 8 वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी मिल चुकी है. ये सभी इंट्रामस्कुलर वैक्सीन है. इन्हें इंजेक्शन के जरिए लगाया जाता है. लेकिन भारत बायोटेक की ये वैक्सीन नेजल होगी. इसे नाक के जरिए दिया जाएगा. इसका मतलब ये नहीं कि इंजेक्शन नाक में लगाया जाएगा. बल्कि ड्रॉप की तरह इसे नाक में डाला जाएगा. 

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नेजल वैक्सीन को मस्कुलर वैक्सीन से ज्यादा असरदार माना जाता है. उसकी वजह ये है कि जब इंजेक्शन के जरिए बांह में वैक्सीन लगाई जाती है तो वो संक्रमण से फेफड़ों को बचाती है. लेकिन नेजल वैक्सीन नाक में दी जाती है और ये नाक में ही वायरस के खिलाफ इम्युनिटी बना देती है जिससे वायरस शरीर के अंदर नहीं जा पाता. 

नेजल वैक्सीन काम कैसे करती है?

कोरोना समेत ज्यादातर वायरस म्युकोसा के जरिए शरीर में जाते हैं. म्युकोसा नाक, फेफड़ों, पाचन तंत्र में पाया जाने वाला चिपचिपा पदार्थ होता. नेजल वैक्सीन सीधे म्युकोसा में ही इम्युन रिस्पॉन्स पैदा करती है, जबकि मस्कुलर वैक्सीन ऐसा नहीं कर पाती.

कब तक आ जाएगी ये वैक्सीन?

अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता. वैक्सीन अभी ट्रायल स्टेज में है. तीसरे फेज के ट्रायल के नतीजों के बाद कंपनी इसके इमरजेंसी यूज के एप्रूवल के लिए आवेदन देगी. पहले सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी और फिर डीजीसीआई से एप्रूवल के बाद ही वैक्सीन बाजार में आएगी. अगर सबकुछ ठीक रहा तो भी इस वैक्सीन को बाजार में आने में कम से कम 6 महीने तो लग ही जाएंगे.

 

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