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आजतक के वरिष्ठ एंकर रोहित सरदाना का निधन, खामोश हुआ दंगल का उस्ताद

समाचार चैनल आजतक की एक मज़बूत आवाज़ और अपने तेवर, बेबाकी के लिए मशहूर वरिष्ठ पत्रकार रोहित सरदाना का शुक्रवार को 41 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है.

आजतक के वरिष्ठ एंकर रोहित सरदाना का निधन (फाइल फोटो) आजतक के वरिष्ठ एंकर रोहित सरदाना का निधन (फाइल फोटो)
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वरिष्ठ पत्रकार और आजतक के ऊर्जावान एंकर रोहित सरदाना नहीं रहे. आज दोपहर उनका हार्ट अटैक के चलते निधन हो गया. उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटियां हैं.
 
रोहित को कुछ दिनों पहले कोविड संक्रमण हुआ था लेकिन वो उससे निकल रहे थे और सक्रिय थे. गुरुवार की रात तक वो संस्थान और अपने बाकी साथियों का हौसला बढ़ाते रहे और काम करते रहे. लेकिन रात में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें नोएडा के मैट्रो अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां शुक्रवार को हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया.
 
हरियाणा के कुरुक्षेत्र से आने वाले रोहित के नाम बेस्ट एंकर के NT Award और ENBA Award के साथ-साथ हिंदी पत्रकारिता का प्रतिष्ठित गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार भी है.
 
रोहित सरदाना भारत के सबसे ज़्यादा पसंद किए जाने वाले, ऊर्जावान एंकर थे. उन्होंने डेढ़ दशक के अपने करियर में ऑल इंडिया रेडियो में बतौर उद्घोषक पहले अपनी आवाज़ घर-घर पहुंचाई और उसके बाद ईटीवी, सहारा समय, जी न्यूज़ और फिर आजतक में अपने विशेष तेवरों वाली एंकरिंग से घर-घर में अपनी पहचान बनाई.
 
वे हिंदी के सबसे तेजतर्रार एंकरों में गिने जाते थे. आजतक के प्राइम टाइम शो, दंगल के एंकर के तौर पर रोहित ने टीवी एंकरिंग में वो मुकाम हासिल किया जो बहुत कम लोगों को हासिल हुआ है. इससे पहले वो जी न्यूज में एक पापुलर शो के एंकर भी रहे थे.
 
दंगल का उस्ताद 
तीखे और स्पष्ट सवाल रोहित सरदाना की एंकरिंग की वो खूबी माने जाते हैं जिनकी वजह से वे अक्सर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं की बोलती बंद कर दिया करते थे. सोशल मीडिया पर उनके लाखों की संख्या में फॉलोअर्स थे. 
 
रोहित की कई ऐसी स्टोरीज रहीं जिन्होंने देश की खबरों का एजेंडा सेट किया, जिनमें से ख़ास रहीं जेएनयू में देश विरोधी नारे, कश्मीर में हुर्रियत नेताओं का पाकिस्तान का फंड कनेक्शन, पं. बंगाल के मालदा और धूलागढ़ की सांप्रदायिक हिंसा, कैराना के पलायन का सच और तीन तलाक के खिलाफ़ एक सामाजिक आंदोलन की शुरुआत.
 
2014 में लोकसभा चुनावों के पहले सांसदों का लेखाजोखा उनके द्वारा बनाया गया मील का पत्थर कार्यक्रम है. निर्भीक एंकर होने के साथ-साथ वे बेहतरीन रिपोर्टर भी थे.
 
ग्राउंड पर जाकर चुनावी फिजा को भांपने और उसे जनता तक पहुंचाने में उनकी अलग ही महारत थी. उनके निधन पर समाज के अलग अलग क्षेत्र की तमाम हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है. 
 
रोहित के निधन की खबर सार्वजनिक करने से पहले संस्थान का यह दायित्व था कि रोहित के परिवार को इसके बारे में सूचित किया जाए. इंडिया टुडे समूह ने अपना नैतिक कर्तव्य निभाते हुए पहले परिवार को इसकी सूचना दी और उसके बाद ही इस दुखद सूचना को सार्वजनिक किया है. 

 

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