scorecardresearch
 

IT प्रोफेशनल और वेट लिफ्टर कोरोना संक्रमितों के उठा रहा शव, सैकड़ों का किया अंतिम संस्कार

मोहम्मद अजमत को अब ये भी याद नहीं है कि उन्होंने कितने कोरोना संक्रमितों शवों का अंतिम संस्कार किया है. उनका कहना है कि जब से महामारी शुरू हुई है, तब से अब तक वो 100 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं.

Advertisement
X
मोहम्मद अजमत (फोटो-इंस्टाग्राम)
मोहम्मद अजमत (फोटो-इंस्टाग्राम)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अजमत संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार कर रहे
  • बैंक में प्रोग्राम लीडर भी हैं मोहम्मद अजमत

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच जहां कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जब लोग अपनों के ही शव का अंतिम संस्कार करने में डर रहे हैं. ऐसे वक्त में कुछ ऐसे लोग अब भी हैं, जो बताते हैं कि इंसानियत अब भी जिंदा है. ये कहानी भी एक ऐसे ही शख्स की है. जो पॉवर लिफ्टर हैं. आईटी प्रोफेशनल हैं. नाम है मोहम्मद अजमत. बेंगलुरु के रहने वाले मोहम्मद अजमत इन दिनों कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों का अंतिम संस्कार करने में जुटे हुए हैं. 

मोहम्मद अजमत को अब ये भी याद नहीं है कि उन्होंने कितने कोरोना संक्रमितों शवों का अंतिम संस्कार किया है. उनका कहना है कि जब से महामारी शुरू हुई है, तब से अब तक वो 100 से ज्यादा शवों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं. मोहम्मद बेंगलुरु में एक एनजीओ के साथ जुड़े हुए हैं. 

अजमत बेंगलुरु में एक मल्टीनेशनल बैंक में बतौर प्रोग्राम लीड काम करते हैं और उन्हें अपने सीनियर्स से इस काम के लिए मंजूरी भी मिल गई है. अजमत बताते हैं कि दिन में जब भी उन्हें वक्त मिलता है, वो ऑफिस का काम निपटाते हैं. बाकी समय शवों के अंतिम संस्कार में ही जुटे रहते हैं.

हम जब अजमत से मिले तो उस वक्त भी वो एक महिला के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जा रहे थे. महिला की मौत कोरोना की वजह से हो गई थी. उनका बेटा भी कोरोना संक्रमित है और अस्पताल में भर्ती था. बेटी असम में फंसी हुई है. इस वजह से कोई भी महिला का अंतिम संस्कार के लिए नहीं आ सका. 

Advertisement

अजमत ने 'इंडिया टुडे' को बताया, "महिला का अंतिम संस्कार करने के लिए कोई नहीं था. इसलिए हम उनके शव को ले गए. मैंने खुद चिता को आग लगाई. उस वक्त मैं उनका बेटा था. हम एक परिवार हैं." अजमत बताते हैं कि कोरोना के मामलों में कई बार परिवार वाले शव के अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं आते. ऐसे में हम ही उनका अंतिम संस्कार करते हैं. वो कहते हैं, "मुझे अभी भी बच्चों के रोने की आवाजें याद हैं. वो मेरे दिमाग में है. लेकिन हम ये सब साइड में रखकर लगातार लोगों की मदद कर रहे हैं."

मोहम्मद अजमत सरकार पर मौतें के आंकड़े छिपाने के आरोप भी लगाते हैं. वो कहते हैं कि इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में तो कुछ नहीं दिखाई देता, लेकिन श्मशान घाट में सब सामने है. 

 

Advertisement
Advertisement